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चंडीगढ़ के बाजारों में चलें कहां: खाने-पीने की सुविधा के नाम पर सार्वजनिक जगहों पर कब्जा, सब नियम ठेंगे पर
वरिंदरजीत सिंह, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 11 Jun 2026 09:17 AM IST
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सार
निगम ने करीब 100 रेस्टोरेंट और ढाबों को बाहर ग्राहकों के बैठने की सुविधा देने के लिए सार्वजनिक स्थान किराये पर आवंटित किए हैं। इसके लिए 100 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है। इसके अनुसार नाश्ता, दोपहर और रात के भोजन के निर्धारित समय में कुर्सी-टेबल लगाने की अनुमति है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
चंडीगढ़ सेक्टर 28 में फुटपाथ पर टेबल कुर्सियां लगा कर किया हुआ अतिक्रमण
- फोटो : संवाद
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विस्तार
चंडीगढ़ के बाजारों में लोगों के लिए बनाए गए गलियारे और खुले सार्वजनिक स्थान अब धीरे-धीरे सिमटते नजर आ रहे हैं। नगर निगम की ओर से रेस्टोरेंट और ढाबों को ग्राहकों के बैठने के लिए किराये पर जगह देने की योजना कई स्थानों पर अतिक्रमण का रूप ले चुकी है।
हालत यह है कि जहां कभी लोग आराम से टहलते और खरीदारी करते थे, वहां अब कुर्सियां, मेजें, गमले और सजावटी सामान रास्ता रोकते दिखाई देते हैं। कई बाजारों में पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
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हालत यह है कि जहां कभी लोग आराम से टहलते और खरीदारी करते थे, वहां अब कुर्सियां, मेजें, गमले और सजावटी सामान रास्ता रोकते दिखाई देते हैं। कई बाजारों में पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
प्लाजा में रेस्टोरेंट को 290 वर्ग फीट की जगह किराये पर दी
सेक्टर-17 प्लाजा में रेस्टोरेंट को 290 वर्ग फीट की जगह दी गई है। वहीं सेक्टर-19, सेक्टर-28 और सेक्टर-8 समेत कई प्रमुख बाजारों में 100 से लेकर 250 वर्ग फीट तक जगह किराये पर दी गई है लेकिन कई प्रतिष्ठानों ने तय सीमा से अधिक जगह घेर रखी है। कहीं गलियारों में स्थायी रूप से टेबल-कुर्सियां लगी हैं तो कहीं बड़े-बड़े गमले, ब्रांडिंग बोर्ड और सजावटी सामग्री रखकर सार्वजनिक स्थानों को निजी उपयोग में बदल दिया गया है। इसकी जांच का काम नगर निगम के अतिक्रमण विंग का है।पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा
इसका सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ रहा है। पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि कई जगह दुकानों तक पहुंचने के लिए उन्हें कुर्सियों और मेजों के बीच से रास्ता बनाना पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी होती है। कुछ बाजारों में तो पार्किंग क्षेत्र भी प्रभावित हो चुका है जिससे वाहन चालकों को अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।व्यापारी बोले-कारोबार प्रभावित हो रहा
इस व्यवस्था से दूसरे व्यापारी भी खुद को प्रभावित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि रेस्टोरेंट के बाहर बढ़ती भीड़ और कब्जे के कारण उनकी दुकानें कम दिखाई देती हैं। ग्राहक सीधे दुकानों तक नहीं पहुंच पाते जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं की गई तो बाजारों में अतिक्रमण की एक नई समस्या खड़ी हो जाएगी।सार्वजनिक स्थानों का दायरा सिमटता जा रहा
दिलचस्प बात यह है कि एक ओर सेक्टर-17 प्लाजा और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर रेहड़ी-फड़ी वालों को बैठने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि रास्ते खुले रहें, वहीं दूसरी ओर कुर्सी-टेबल लगाने के नाम पर उन्हीं सार्वजनिक स्थानों का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। इससे हाईकोर्ट की उस टिप्पणी पर भी सवाल उठ रहे हैं जिसमें सार्वजनिक मार्गों को बाधारहित रखने पर जोर दिया गया था।नगर निगम ने रेस्टोरेंट्स को ग्राहकों की सुविधा के लिए सीमित दायरे में जगह उपलब्ध कराई थी। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन कर सार्वजनिक स्थानों पर अतिरिक्त कब्जा किया गया है तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -बलबीर राज सिंह, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों को ग्राहकों की सुविधा के लिए जगह देना अच्छी पहल है लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। नियमों के अनुसार कुर्सी-टेबल केवल निर्धारित समय पर लगनी चाहिए, उन्हें स्थायी रूप से सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रखा जाना चाहिए। यह परमिशन होनी ही नहीं चाहिए। यदि नगर निगम ने कोई नियम बनाए हैं तो उनका पालन भी सख्ती से होना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक कब्जा करना गलत है। प्रशासन को नियमित निगरानी कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। -हितेश पुरी, चेयरमैन क्राफ्ड
कुछ प्रतिष्ठानों ने जिस तरह स्थायी रूप से कुर्सी-टेबल लगा रखी हैं, उससे दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होंगे। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो सेक्टर-17 प्लाजा समेत शहर के बाजारों की सुंदरता और खुलापन धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। -बलजिंदर सिंह बिट्टू, चेयरमैन, फास्वेक