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पंजाब के शहरों में कुपोषण: हर चौथा बच्चा शिकार, क्या है गांवों का हाल? चौंकाने वाली है रिपोर्ट

राजिंद्र शर्मा, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sun, 14 Jun 2026 12:07 PM IST
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सार

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पांच साल तक के 23 फीसदी बच्चों की उम्र के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही है और साथ ही 17 फीसदी बच्चों का वजन कम है। 

Children in Punjab's cities are victims of malnutrition
पंजाब में बच्चे कुपोषण का शिकार - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार

पंजाब के शहरों में हर चौथा बच्चा कुपोषण का शिकार है और गांवों के मुकाबले स्थिति अधिक गंभीर है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पांच साल तक के 23 फीसदी बच्चों की उम्र के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही है और साथ ही 17 फीसदी बच्चों का वजन कम है। गांवों के मुकाबले शहरों में स्थिति अधिक गंभीर है। इसमें पहले से कमी जरूर आई है लेकिन अब भी यह बड़ी समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020-21 के दौरान 24.5 फीसदी बच्चों की उम्र के साथ लंबाई नहीं बढ़ रही थी लेकिन वर्ष 2023-24 में यह समस्या कम होकर 20.4% हो गई है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में अभी भी हालात खराब हैं और 23 फीसदी बच्चे इससे प्रभावित हैं जबकि गांवों में इसका प्रतिशत 18.9 है।


इसके अलावा पांच साल तक के 23.7% शहरी बच्चों का उम्र के साथ वजन नहीं बढ़ रहा है जबकि 23.6% ग्रामीण बच्चों में यह समस्या है। इसी तरह प्रदेश के शहरों में 17.2% बच्चों का लंबाई के साथ वजन भी बढ़ रहा है जबकि 4 फीसदी बच्चों में यह समस्या अधिक गंभीर है जिस कारण ऐसे बच्चों में अन्य बीमारियों का भी खतरा रहता है। हालांकि अधिक वजन की समस्या बच्चों में ज्यादा नहीं है और केवल 2.3% शहरी और 1.5% ग्रामीण बच्चे ही इससे प्रभावित हैं।
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प्रदेश के 23 जिलों में 27,313 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिन पर 155 परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें कुल 25,663 आंगनबाड़ी वर्कर काम कर रहे हैं लेकिन प्रदेश में आंगनबाड़ी वर्करों व हेल्परों की कमी के कारण बच्चों को केंद्रों के साथ जोड़ने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बच्चों का विकास प्रभावित होने के प्रमुख कारण 
-बच्चों को पर्याप्त ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व नहीं मिलना उनके विकास में बाधा बनता है।
-पर्याप्त मात्रा में विभिन्न खाद्य पदार्थ का भी नहीं मिलना पोषक तत्वों के असंतुलन का कारण बनता है।
-हृदय रोग, किडनी रोग या अन्य पुरानी बीमारियां बच्चे के शरीर की अतिरिक्त कैलोरी की मांग को बढ़ा सकती हैं।

 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चलाई जा रही ये योजनाएं 
गर्भवती महिलाओं और बच्चों में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार विशेष अभियान चला रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नमकीन दलिया, मीठा दलिया, मुरमुरे और खिचड़ी दी जाती है। महिलाओं को पंजीरी भी दी जाती है। केंद्र सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना व एकीकृत बाल विकास सेवा योजना भी चला रहा है।

वजन और लंबाई के तय मानक
बच्चों की लंबाई, उम्र, लिंग, अनुवांशिकता के आधार पर अलग होती है। नवजात शिशु की औसत लंबाई 18-22 इंच, एक वर्ष की उम्र तक 28-30 इंच, दो वर्ष तक 32-36 और पांच वर्ष तक लंबाई 39-43 इंच तक होनी चाहिए। 1 साल के लड़के का वजन लगभग 9.6 किलो और लड़की का 8.9 किलो होना चाहिए। 2 साल के बच्चों के लिए लड़कों का वजन 12.3 और लड़कियों का 11.8 किलो हो सकता है। 3 साल के बच्चों में लड़कों का वजन 14.6 और लड़कियों का 14.1 किलो तक होना चाहिए। चार साल तक के लड़के का वजन 16.3 और लड़की का 15.8 किलो व पांच साल तक के लडके का 18.3 और लड़की का 18.2 किलो हो सकता है।




 
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