फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   High Court stays construction and land transactions in Mohali 16 villages reprimands Punjab government

Mohali: 16 गांवों में निर्माण व जमीन की खरीद फरोख्त पर हाईकोर्ट की रोक, पंजाब सरकार को फटकार

Fri, 24 Jul 2026 08:58 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 24 Jul 2026 08:58 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में वन भूमि की पहचान और सीमांकन के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन इतने वर्षों बाद भी राज्य सरकार इनका पालन नहीं कर सकी।

विज्ञापन
High Court stays construction and land transactions in Mohali 16 villages reprimands Punjab government
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के आसपास शिवालिक की तलहटी में स्थित पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने मोहाली जिले के 16 गांवों में सभी प्रकार के निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल रोक लगा दी है। 
विज्ञापन


इसके साथ ही इन गांवों में जमीन के हस्तांतरण, बिक्री और जीपीए या पीओए के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरित करने पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में वन भूमि की पहचान और सीमांकन के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन इतने वर्षों बाद भी राज्य सरकार इनका पालन नहीं कर सकी। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय माना। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने कहा कि करोरां, नाडा, पड़च्छ, सियुंक, माजरियां, छोटी नागल, बड़ी नागल, परोल, सिसवां, पल्लनपुर, सैनी माजरा, दुलवां, बुराना, गोचर, मिर्जापुर, तारापुर और सुल्तानपुर गांवों की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया वन भूमि के रूप में दर्ज है। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट रूप से तय नहीं किया गया कि वास्तव में कितनी भूमि वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

अदालत ने कहा कि केवल पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र का अधिसूचित होना अपने आप में उसे वन भूमि नहीं बना देता। वास्तविक स्थिति का निर्धारण पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है। खंडपीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव को वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने का आदेश दिया है। 

टीम का नेतृत्व मुख्य वन संरक्षक करेंगे और इसमें कम से कम प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी भी शामिल होगा। टीम वर्ष 1980 में वन (संरक्षण) अधिनियम लागू होने के समय उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर वन भूमि की वास्तविक सीमा तय करेगी। मुख्य सचिव को एक सप्ताह के भीतर संबंधित 16 गांवों के सभी राजस्व रिकॉर्ड की प्रतियां हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास सुरक्षित जमा कराने को कहा गया है। अदालत ने क्षेत्र में तेजी से हो रहे व्यावसायीकरण पर भी गंभीर चिंता जताई। 


खंडपीठ ने कहा कि शिवालिक की तलहटी का यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। जंगलों और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया जाना राज्य की गंभीर विफलता को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि इस क्षेत्र को जिस तरह से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए खोला जा रहा है, वह पर्यावरण संरक्षण की भावना के विपरीत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed