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निकाय चुनाव: EVM पर पंजाब का जवाब-मांगी थीं, केंद्र ने कहा-जवाबी कार्रवाई में देरी; हाईकोर्ट में सुनवाई आज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 21 May 2026 08:24 AM IST
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सार
पंजाब में 26 मई को निकाय चुनाव के लिए मतदान होना है। 29 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने के फैसले पर पंजाब राज्य चुनाव आयोग बुधवार को हाईकोर्ट में घिरता नजर आया। पंजाब चुनाव आयोग की ओर से पहले कहा गया था कि उन्होंने ईवीएम की मांग की थी लेकिन केंद्रीय चुनाव आयोग ने मशीनें उपलब्ध नहीं करवाईं।
इस पर बुधवार को सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने पंजाब से जरूरत और डिमांड को लेकर जानकारी मांगी थी लेकिन इसके जवाब में प्रदेशस्तर पर देरी हुई।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईवीएम को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग और पंजाब सरकार भी आमने-सामने नजर आए। केंद्रीय आयोग ने कहा कि ईवीएम प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू करनी पड़ती है। इस पर पंजाब सरकार ने दलील दी कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने समय पर ही प्रयास शुरू कर दिए थे। इसके समर्थन में कोर्ट में पत्रों का हवाला भी दिया गया।
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सुनवाई के दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट आदेश करे तो दो से तीन दिन में ईवीएम उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। इसके लिए पड़ोसी राज्यों से मशीनों का इंतजाम उधार के तौर पर किया जा सकता है।
इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि 26 मई को चुनाव प्रस्तावित हैं और ईवीएम के इस्तेमाल के लिए कम से कम 17 से 18 दिन पहले तैयारी करनी होती है। ऐसे में अब ईवीएम का इस्तेमाल व्यावहारिक नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई वीरवार तक स्थगित कर दी।
इससे पहले मंगलवार को हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से पूछा था कि जब देशभर में चुनाव ईवीएम से हो रहे हैं तो पंजाब निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है। तब आयोग ने कहा था कि ईवीएम उपलब्ध नहीं हैं।
इस पर बुधवार को सुनवाई के दौरान भारतीय निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने पंजाब से जरूरत और डिमांड को लेकर जानकारी मांगी थी लेकिन इसके जवाब में प्रदेशस्तर पर देरी हुई।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईवीएम को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग और पंजाब सरकार भी आमने-सामने नजर आए। केंद्रीय आयोग ने कहा कि ईवीएम प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू करनी पड़ती है। इस पर पंजाब सरकार ने दलील दी कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने समय पर ही प्रयास शुरू कर दिए थे। इसके समर्थन में कोर्ट में पत्रों का हवाला भी दिया गया।
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सुनवाई के दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि यदि हाईकोर्ट आदेश करे तो दो से तीन दिन में ईवीएम उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। इसके लिए पड़ोसी राज्यों से मशीनों का इंतजाम उधार के तौर पर किया जा सकता है।
इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि 26 मई को चुनाव प्रस्तावित हैं और ईवीएम के इस्तेमाल के लिए कम से कम 17 से 18 दिन पहले तैयारी करनी होती है। ऐसे में अब ईवीएम का इस्तेमाल व्यावहारिक नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई वीरवार तक स्थगित कर दी।
बैलेट बाॅक्स प्रणाली को बताया था अव्यवहारिक
मोहाली निवासी रुचिता गर्ग ने जनहित याचिका दाखिल कर स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर के बजाय ईवीएम से कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चुनाव प्रक्रिया को बैलेट पेपर प्रणाली में वापस ले जाना अव्यवहारिक है। याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पंजाब कानून की धारा 64 में भी स्पष्ट है कि जहां बैलेट बॉक्स या बैलेट पेपर का उल्लेख है वहां ईवीएम को भी शामिल माना जाएगा।इससे पहले मंगलवार को हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से पूछा था कि जब देशभर में चुनाव ईवीएम से हो रहे हैं तो पंजाब निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है। तब आयोग ने कहा था कि ईवीएम उपलब्ध नहीं हैं।