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पंजाब कांग्रेस में बगावत पर राहुल नाराज: प्रभारी बघेल दिल्ली तलब, इस दिन नाराज नेताओं से हो सकती है मुलाकात
Tue, 14 Jul 2026 10:35 PM IST
शाहिल शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 14 Jul 2026 10:35 PM IST
सार
पंजाब कांग्रेस में रार को लेकर हाईकमान ने रायपुर से विधानसभा सत्र बीच में छुड़वाकर पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल को दिल्ली तलब किया है।
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पंजाब कांग्रेस में रार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब कांग्रेस में बगावत पर राहुल गांधी खासे नाराज हैं। सूबे में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेताओं के विद्रोह ने हाईकमान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाईकमान ने रायपुर से विधानसभा सत्र बीच में छुड़वाकर पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल को दिल्ली तलब कर लिया है। राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 16 जुलाई को पंजाब के नाराज नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं।
दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई। इस दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी, नेतृत्व विवाद और साल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर समीक्षा की गई। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। बघेल ने सोमवार को अपने पंजाब दाैरे की रिपोर्ट हाईकमान को साैंपी थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थकों की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठाए गए सवालों पर चर्चा हुई। इस दाैरान पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बढ़ती खींचतान को गंभीर माना। राहुल और खरगे ने विधानसभा चुनाव से पहले इस पर खासी नाराजगी जाहिर की।
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सूत्र बताते हैं कि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक दल के नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। हालांकि बैठक के बाद इस संदर्भ में अभी किसी फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इसके अलावा हाईकमान ने बैठक में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करने, संगठन को मजबूत करने और आम आदमी पार्टी के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने पर भी विमर्श हुआ।
फैसले से पहले बघेल को सुनना चाहते हैं राहुल
पंजाब कांग्रेस में छिड़े विद्रोह को शांत करवाने और पार्टी को एकजुट करने की बड़ी जिम्मेदारी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल को साैंपी थी। इसके लिए बघेल 6 जुलाई को चंडीगढ़ पहुंचे और 11 जुलाई तक उन्होंने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी समेत करीबन सभी नाराज नेताओं से सामूहिक व वन-टू-वन चर्चा की। 13 जुलाई को बघेल ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी थी। इस मसले पर वरिष्ठ नेताओं की चर्चा के बाद अब किसी बड़े फैसले का इंतजार किया जा रहा है मगर फैसला लेने से पहले राहुल गांधी रूबरू होकर प्रभारी बघेल को सुनना व उनसे कुछ तथ्यों पर चर्चा करना चाहते हैं इसलिए उन्हें तत्काल रायपुर से दिल्ली तलब किया गया है।
वड़िंग पर दबाव, विरोधी खेमा शांत
मंगलवार को पंजाब कांग्रेस में बगावत पर हाईकमान की बैठक के बाद मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर दबाव बढ़ गया है। इस विवाद के बीच कांग्रेस हाईकमान वड़िंग से इस्तीफा ले सकती है, ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं। दूसरी ओर, विरोधी खेमा भी इस वक्त शांत है। इस खेमे के कुछ एक वरिष्ठ नेताओं ने सिर्फ इतना कहा कि वे भी हाईकमान के बुलावे और फैसले का ही इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले वे जल्द एक बैठक कर सकते हैं। बता दें कि नाराज नेताओं का धड़ा प्रदेशाध्यक्ष वड़िंग को बदलने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहा है। प्रभारी बघेल नाराज नेताओं की दोनों मांगों को सिरे से खारिज कर गए थे।
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दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच करीब दो घंटे तक बैठक हुई। इस दौरान पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी, नेतृत्व विवाद और साल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर समीक्षा की गई। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। बघेल ने सोमवार को अपने पंजाब दाैरे की रिपोर्ट हाईकमान को साैंपी थी।
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पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थकों की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व पर उठाए गए सवालों पर चर्चा हुई। इस दाैरान पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बढ़ती खींचतान को गंभीर माना। राहुल और खरगे ने विधानसभा चुनाव से पहले इस पर खासी नाराजगी जाहिर की।
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सूत्र बताते हैं कि बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस विधायक दल के नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। हालांकि बैठक के बाद इस संदर्भ में अभी किसी फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। इसके अलावा हाईकमान ने बैठक में विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करने, संगठन को मजबूत करने और आम आदमी पार्टी के खिलाफ प्रभावी रणनीति बनाने पर भी विमर्श हुआ।
फैसले से पहले बघेल को सुनना चाहते हैं राहुल
पंजाब कांग्रेस में छिड़े विद्रोह को शांत करवाने और पार्टी को एकजुट करने की बड़ी जिम्मेदारी हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल को साैंपी थी। इसके लिए बघेल 6 जुलाई को चंडीगढ़ पहुंचे और 11 जुलाई तक उन्होंने पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी समेत करीबन सभी नाराज नेताओं से सामूहिक व वन-टू-वन चर्चा की। 13 जुलाई को बघेल ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी थी। इस मसले पर वरिष्ठ नेताओं की चर्चा के बाद अब किसी बड़े फैसले का इंतजार किया जा रहा है मगर फैसला लेने से पहले राहुल गांधी रूबरू होकर प्रभारी बघेल को सुनना व उनसे कुछ तथ्यों पर चर्चा करना चाहते हैं इसलिए उन्हें तत्काल रायपुर से दिल्ली तलब किया गया है।
वड़िंग पर दबाव, विरोधी खेमा शांत
मंगलवार को पंजाब कांग्रेस में बगावत पर हाईकमान की बैठक के बाद मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर दबाव बढ़ गया है। इस विवाद के बीच कांग्रेस हाईकमान वड़िंग से इस्तीफा ले सकती है, ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं। दूसरी ओर, विरोधी खेमा भी इस वक्त शांत है। इस खेमे के कुछ एक वरिष्ठ नेताओं ने सिर्फ इतना कहा कि वे भी हाईकमान के बुलावे और फैसले का ही इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले वे जल्द एक बैठक कर सकते हैं। बता दें कि नाराज नेताओं का धड़ा प्रदेशाध्यक्ष वड़िंग को बदलने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहा है। प्रभारी बघेल नाराज नेताओं की दोनों मांगों को सिरे से खारिज कर गए थे।
पंजाब कांग्रेस में बगावत एक नजर
- 01 जुलाई को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने चुनावी तैयारियों के मद्देनजर विभिन्न कमेटियां गठित कीं। साथ ही अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के प्रदेशाध्यक्ष कार्याकाल को जारी रखते हुए तीन प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्षों की व्यवस्था कर दी।
- पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को इस दौरान कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। यहीं से शुरू की पंजाब कांग्रेस में बगावत
- पूर्व सीएम चन्नी समेत उनके समर्थक नेताओं ने मोरिंडा में बैठक कर राजा वड़िंग का नेतृत्व नकार दिया। साथ ही पूर्व सीएम चन्नी को प्रदेशाध्यक्ष अथवा विधानसभा चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने की मांग बुलंद कर दी।
- पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत 117 में से 92 हलकों के पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, 16 में से 12 मौजूदा विधायक और 7 में से 3 सांसदों ने चन्नी को समर्थन दे दिया।
- बगावत के हालात जब गंभीर बने तो हाईकमान ने 06 जुलाई को हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल को इस विवाद को निपटाने चंडीगढ़ भेजा।
- 11 जुलाई तक बघेल चंडीगढ़ में रहे और लगभग सभी नाराज नेताओं से उन्होंने बातचीत की। इस दौरान सभी नेता राजा वड़िंग को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने और चुनाव से पहले सीएम फेस घाेषित करने संंबंधी मांग पर अड़े रहे।
- बघेल दिल्ली लौट गए और 13 जुलाई को उन्होंने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी।
- 14 जुलाई को राहुल गांधी ने दिल्ली में बैठक बुला ली। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
- राहुल गांधी और खरगे ने पंजाब में बगावत की स्थिति पर काफी चिंता और नाराजगी जाहिर की।
- तय किया गया कि पंजाब कांग्रेस के सभी नाराज नेताओं को 16 जुलाई को दिल्ली बुला लिया जाए। इसका अभी औपचारिक न्योता नाराज धड़े के नेताओं को नहीं मिला है।
- उधर, भपूेश बघेल को भी तत्काल रायपुर से दिल्ली तलब कर लिया है। राहुल व खरगे उनसे चर्चा करेंगे, जिसके बाद यह तय होगा कि प्रदेशाध्यक्ष हटाया जाना है या नहीं। साथ ही पंजाब में सीएम फेस देना है या नहीं।
- वैसे बघेल इन दोनों मांगों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। उन्होंने मीटिंग से पहले अपने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि पंजाब में राहुल गांधी ही सीएम फेस होंगे।
- अब पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से हालात बने हुए हैं, उसके मद्देनजर हाईकमान पर काफी दबाव की स्थिति है। प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी खासे दबाव में दिख रहे हैं।
- पूर्व सीएम सुखजिंदर रंधावा भी कह चुके हैं कि कई बार हाईकमान को फैसले बदलने भी पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा भी लिया जा सकता है।
- राहुल गांधी बीच का रास्ता तलाशते हुए जल्द इस विवाद का पटाक्षेप चाहते हैं, ताकि पंजाब में एकता का संदेश देते हुए आगे बढ़ा जा सके, क्योंकि हाईकमान इस वक्त पंजाब में कांग्रेस को ही माैजूदा आम आदमी पार्टी सरकार का सबसे प्रतिद्वंद्वी मानकर चुनावी तैयारी कर रही है।
- 01 जुलाई को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने चुनावी तैयारियों के मद्देनजर विभिन्न कमेटियां गठित कीं। साथ ही अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के प्रदेशाध्यक्ष कार्याकाल को जारी रखते हुए तीन प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्षों की व्यवस्था कर दी।
- पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को इस दौरान कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। यहीं से शुरू की पंजाब कांग्रेस में बगावत
- पूर्व सीएम चन्नी समेत उनके समर्थक नेताओं ने मोरिंडा में बैठक कर राजा वड़िंग का नेतृत्व नकार दिया। साथ ही पूर्व सीएम चन्नी को प्रदेशाध्यक्ष अथवा विधानसभा चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने की मांग बुलंद कर दी।
- पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत 117 में से 92 हलकों के पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, 16 में से 12 मौजूदा विधायक और 7 में से 3 सांसदों ने चन्नी को समर्थन दे दिया।
- बगावत के हालात जब गंभीर बने तो हाईकमान ने 06 जुलाई को हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल को इस विवाद को निपटाने चंडीगढ़ भेजा।
- 11 जुलाई तक बघेल चंडीगढ़ में रहे और लगभग सभी नाराज नेताओं से उन्होंने बातचीत की। इस दौरान सभी नेता राजा वड़िंग को प्रदेशाध्यक्ष पद से हटाने और चुनाव से पहले सीएम फेस घाेषित करने संंबंधी मांग पर अड़े रहे।
- बघेल दिल्ली लौट गए और 13 जुलाई को उन्होंने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी।
- 14 जुलाई को राहुल गांधी ने दिल्ली में बैठक बुला ली। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
- राहुल गांधी और खरगे ने पंजाब में बगावत की स्थिति पर काफी चिंता और नाराजगी जाहिर की।
- तय किया गया कि पंजाब कांग्रेस के सभी नाराज नेताओं को 16 जुलाई को दिल्ली बुला लिया जाए। इसका अभी औपचारिक न्योता नाराज धड़े के नेताओं को नहीं मिला है।
- उधर, भपूेश बघेल को भी तत्काल रायपुर से दिल्ली तलब कर लिया है। राहुल व खरगे उनसे चर्चा करेंगे, जिसके बाद यह तय होगा कि प्रदेशाध्यक्ष हटाया जाना है या नहीं। साथ ही पंजाब में सीएम फेस देना है या नहीं।
- वैसे बघेल इन दोनों मांगों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। उन्होंने मीटिंग से पहले अपने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि पंजाब में राहुल गांधी ही सीएम फेस होंगे।
- अब पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से हालात बने हुए हैं, उसके मद्देनजर हाईकमान पर काफी दबाव की स्थिति है। प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी खासे दबाव में दिख रहे हैं।
- पूर्व सीएम सुखजिंदर रंधावा भी कह चुके हैं कि कई बार हाईकमान को फैसले बदलने भी पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा भी लिया जा सकता है।
- राहुल गांधी बीच का रास्ता तलाशते हुए जल्द इस विवाद का पटाक्षेप चाहते हैं, ताकि पंजाब में एकता का संदेश देते हुए आगे बढ़ा जा सके, क्योंकि हाईकमान इस वक्त पंजाब में कांग्रेस को ही माैजूदा आम आदमी पार्टी सरकार का सबसे प्रतिद्वंद्वी मानकर चुनावी तैयारी कर रही है।