{"_id":"6a0ccb47052ec318d6095bb8","slug":"eto-ranjit-singh-suicide-case-former-sp-amandeep-kaur-and-rajinder-alias-gopi-convicted-mohali-news-c-71-1-spkl1025-142659-2026-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईटीओ रणजीत सिंह आत्महत्या मामला : पूर्व एसपी अमनदीप कौर और राजिंदर उर्फ गोपी दोषी करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईटीओ रणजीत सिंह आत्महत्या मामला : पूर्व एसपी अमनदीप कौर और राजिंदर उर्फ गोपी दोषी करार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मोहाली। बहुचर्चित ईटीओ रणजीत सिंह आत्महत्या मामले में मोहाली जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विजिलेंस एसपी अमनदीप कौर और कारोबारी राजिंदर सिंह उर्फ गोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी ठहराया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 306 और 120-बी के तहत तीन-तीन साल की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लगे आरोपों से अमनदीप कौर को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिश्वत मांगने और लेने के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल रकम की बरामदगी या आरोप पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मांग और स्वीकार करने के स्पष्ट प्रमाण होना आवश्यक हैं। मामले के अनुसार, वर्ष 2011 में ईटीओ रणजीत सिंह ने टैक्स चोरी के आरोप में दो ट्रक पकड़े थे। इसके बाद विजिलेंस ने उन पर रिश्वत मांगने का केस दर्ज कर ट्रैप लगाया। रणजीत सिंह की पत्नी मनजीत कौर ने आरोप लगाया था कि यह पूरा मामला साजिश के तहत बनाया गया। शिकायत में कहा गया कि विजिलेंस अधिकारियों और कारोबारियों ने मिलकर रणजीत सिंह को झूठे केस में फंसाया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और मोटी रकम की मांग की। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि रणजीत सिंह को लगातार मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा।
गिरफ्तारी, सार्वजनिक बेइज्जती और समराला के गिल रीजेंसी होटल में हुई कथित बातचीत ने मृतक को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही 50 लाख रुपये की मांग को लेकर प्रत्यक्ष साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे, लेकिन घटनाओं की पूरी श्रृंखला यह दर्शाती है कि मृतक लगातार दबाव और अपमान झेल रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को इस हद तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कि वह आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाए, कानूनन अपराध है। फैसले में आरोपी परमजीत सिंह को सभी आरोपों से बरी किया गया, जबकि सह-आरोपी हरमिंदर सिंह और राजीव सूद की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
विज्ञापन
Trending Videos
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल रकम की बरामदगी या आरोप पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मांग और स्वीकार करने के स्पष्ट प्रमाण होना आवश्यक हैं। मामले के अनुसार, वर्ष 2011 में ईटीओ रणजीत सिंह ने टैक्स चोरी के आरोप में दो ट्रक पकड़े थे। इसके बाद विजिलेंस ने उन पर रिश्वत मांगने का केस दर्ज कर ट्रैप लगाया। रणजीत सिंह की पत्नी मनजीत कौर ने आरोप लगाया था कि यह पूरा मामला साजिश के तहत बनाया गया। शिकायत में कहा गया कि विजिलेंस अधिकारियों और कारोबारियों ने मिलकर रणजीत सिंह को झूठे केस में फंसाया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और मोटी रकम की मांग की। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि रणजीत सिंह को लगातार मानसिक प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
गिरफ्तारी, सार्वजनिक बेइज्जती और समराला के गिल रीजेंसी होटल में हुई कथित बातचीत ने मृतक को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही 50 लाख रुपये की मांग को लेकर प्रत्यक्ष साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे, लेकिन घटनाओं की पूरी श्रृंखला यह दर्शाती है कि मृतक लगातार दबाव और अपमान झेल रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को इस हद तक मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कि वह आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाए, कानूनन अपराध है। फैसले में आरोपी परमजीत सिंह को सभी आरोपों से बरी किया गया, जबकि सह-आरोपी हरमिंदर सिंह और राजीव सूद की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।