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Mohali News: किसान और कर्मचारी संगठनों ने विधायक कार्यालय के सामने दिया धरना, केंद्र-राज्य के खिलाफ की नारेबाजी
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डेराबस्सी। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर विभिन्न किसान और कर्मचारी संगठनों ने हलका विधायक कुलजीत सिंह रंधावा के कार्यालय के सामने सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना दिया। इस दौरान केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई तथा विभिन्न कानूनों के कारण आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, बिजली बिल-2025, बीज बिल, मनरेगा की जगह लाई जा रही जी राम जी योजना और चार लेबर कोड्स को लेकर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि ये सभी कानून हर वर्ग के हितों को प्रभावित करने वाले हैं और विशेष रूप से किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों के लिए नुकसानदायक साबित होंगे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भले ही ये कानून केंद्र सरकार द्वारा लाए गए हैं, लेकिन इस मामले में पंजाब सरकार की साजिशी चुप्पी भी किसी से छिपी नहीं है। वह केंद्र के साथ मिलकर इन्हें लागू कराने में सहयोग कर रही है। धरने के दौरान बठिंडा में किसानों पर किए लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि पहले भी किसानों ने लंबा संघर्ष कर तीन काले कानूनों को रद्द करवाया था, लेकिन अब उन्हीं कानूनों को नए नाम और अलग रूप में फिर से लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी फैसले केवल व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। अंत में सभी संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर निरंतर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि ये सभी कानून हर वर्ग के हितों को प्रभावित करने वाले हैं और विशेष रूप से किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों के लिए नुकसानदायक साबित होंगे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भले ही ये कानून केंद्र सरकार द्वारा लाए गए हैं, लेकिन इस मामले में पंजाब सरकार की साजिशी चुप्पी भी किसी से छिपी नहीं है। वह केंद्र के साथ मिलकर इन्हें लागू कराने में सहयोग कर रही है। धरने के दौरान बठिंडा में किसानों पर किए लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा की गई।
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वक्ताओं ने कहा कि पहले भी किसानों ने लंबा संघर्ष कर तीन काले कानूनों को रद्द करवाया था, लेकिन अब उन्हीं कानूनों को नए नाम और अलग रूप में फिर से लागू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी फैसले केवल व्यापारिक हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। अंत में सभी संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर निरंतर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।