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Mohali News: एरोट्रोपोलिस प्लॉट नीति पर किसान भड़के, गमाडा को दी आंदोलन की चेतावनी
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मोहाली। गमाडा की एरोट्रोपोलिस परियोजना की घोषित प्लॉट नीति का किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों ने तीन अगस्त को घोषित प्लॉटों के आकार पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन शुरू करेंगे। प्रभावित किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को अपना मांगपत्र सौंपा। उन्होंने पंजाब शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग से मुलाकात की। गमाडा के मुख्य प्रशासक संदीप ऋषि और भूमि अधिग्रहण कलेक्टर रोहित जिंदल भी इस बैठक में शामिल थे।
किसानों का कहना है कि भूमि एकीकरण नीति के तहत प्लॉट आकार उनकी सहमति के बिना तय किए गए। भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को बैठक में प्रतिनिधित्व का आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें विश्वास में लिए बिना ही प्लॉटों का आकार तय कर दिया। एरोट्रोपोलिस परियोजना के लिए करीब 3522 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। किसानों के अनुसार, यह निर्णय उनके हितों के अनुरूप नहीं है।
किसानों की मुख्य मांगें
किसानों ने भूमि एकीकरण नीति के तहत निर्धारित आवासीय प्लॉटों के आकार के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। उन्होंने छह से आठ कनाल तक के प्लॉटों में संशोधन का सुझाव दिया है। किसानों के सुझावों को शामिल कर एक नई नीति लागू करने की बात कही गई। उनका कहना है कि यह प्रदेश की एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना है। इसलिए इससे प्रभावित किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
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आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि गमाडा ने उनकी मांगों के अनुरूप प्लॉट आकार में संशोधन नहीं किया। तो वे व्यापक संघर्ष शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी। इस विरोध में गांव कुरड़ी, बड़ी, मटरां, पत्तों, सियाऊ, बाकरपुर, किशनपुरा और छत्त के किसान शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में नाहर सिंह, बलजीत सिंह, मोहन सिंह और हरबंस सिंह जैसे किसान नेता मौजूद थे।
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किसानों का कहना है कि भूमि एकीकरण नीति के तहत प्लॉट आकार उनकी सहमति के बिना तय किए गए। भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को बैठक में प्रतिनिधित्व का आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में अधिकारियों ने उन्हें विश्वास में लिए बिना ही प्लॉटों का आकार तय कर दिया। एरोट्रोपोलिस परियोजना के लिए करीब 3522 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी। किसानों के अनुसार, यह निर्णय उनके हितों के अनुरूप नहीं है।
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किसानों की मुख्य मांगें
किसानों ने भूमि एकीकरण नीति के तहत निर्धारित आवासीय प्लॉटों के आकार के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। उन्होंने छह से आठ कनाल तक के प्लॉटों में संशोधन का सुझाव दिया है। किसानों के सुझावों को शामिल कर एक नई नीति लागू करने की बात कही गई। उनका कहना है कि यह प्रदेश की एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना है। इसलिए इससे प्रभावित किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
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आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि गमाडा ने उनकी मांगों के अनुरूप प्लॉट आकार में संशोधन नहीं किया। तो वे व्यापक संघर्ष शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी। इस विरोध में गांव कुरड़ी, बड़ी, मटरां, पत्तों, सियाऊ, बाकरपुर, किशनपुरा और छत्त के किसान शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में नाहर सिंह, बलजीत सिंह, मोहन सिंह और हरबंस सिंह जैसे किसान नेता मौजूद थे।