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जीरकपुर : सैनीटेशन ब्रांच में नहीं चीफ, इंस्पेक्टरों के भरोसे सफाई व्यवस्था
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जीरकपुर। नगर परिषद की स्वच्छता शाखा में लंबे समय से मुख्य स्वच्छता निरीक्षक (सीएसआई) का पद खाली है। इस कारण पूरे शहर की सफाई व्यवस्था निरीक्षकों के भरोसे चल रही है। स्थायी प्रमुख अधिकारी न होने से कई प्रशासनिक कार्य और परियोजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। शहर की रोजाना सफाई, कूड़ा उठान, घर-घर कूड़ा संग्रहण, सीवर और विशेष सफाई अभियानों की निगरानी की जिम्मेदारी इसी शाखा पर है। शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। इससे कूड़े के ढेर में भी इजाफा हो रहा है। नई कॉलोनियों और रिहायशी सोसाइटियों के जुड़ने से सफाई व्यवस्था का दायरा भी बढ़ गया है। इन योजनाओं को अंतिम मंजूरी दिलाने और बजट संबंधी फाइलों को आगे बढ़ाने में अधिकारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक कार्यों में बाधाएं और बढ़ती चुनौतियां
मौजूदा समय में स्वच्छता शाखा का काम निरीक्षक संभाल रहे हैं। वे रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था तो किसी तरह संचालित कर रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर के निर्णय लेने में देरी हो जाती है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। नई मशीनों की खरीद, सफाई कर्मचारियों की तैनाती और वार्डों में संसाधनों के बेहतर वितरण जैसे कई प्रस्ताव लंबित हैं। हाल ही में कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान भी शीर्ष स्तर के अधिकारी न होने से निर्णय लेने में अधिक समय लगा।
बढ़ती आबादी के साथ बढ़ा काम
- शहर के सभी वार्डों की सफाई व्यवस्था की निगरानी सैनीटेशन ब्रांच के जिम्मे।
- डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, डंपिंग, विशेष सफाई अभियान और शिकायतों का निस्तारण भी इसी शाखा की जिम्मेदारी।
- स्थायी चीफ नहीं होने से प्रशासनिक फैसलों और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी।
शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सैनीटेशन ब्रांच में स्थायी चीफ की नियुक्ति जरूरी है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसको लेकर विभाग के आलाधिकारियों को पहले ही पत्र भेजकर अवगत करवाया जा चुका है, जिस पर फैसला लेने का अधिकार आलाधिकारियों के पास है। -परविंदर सिंह, ईओ, जीरकपुर नगर परिषद।
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प्रशासनिक कार्यों में बाधाएं और बढ़ती चुनौतियां
मौजूदा समय में स्वच्छता शाखा का काम निरीक्षक संभाल रहे हैं। वे रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था तो किसी तरह संचालित कर रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर के निर्णय लेने में देरी हो जाती है। इसका असर शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर भी पड़ रहा है। नई मशीनों की खरीद, सफाई कर्मचारियों की तैनाती और वार्डों में संसाधनों के बेहतर वितरण जैसे कई प्रस्ताव लंबित हैं। हाल ही में कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान भी शीर्ष स्तर के अधिकारी न होने से निर्णय लेने में अधिक समय लगा।
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बढ़ती आबादी के साथ बढ़ा काम
- शहर के सभी वार्डों की सफाई व्यवस्था की निगरानी सैनीटेशन ब्रांच के जिम्मे।
- डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन, डंपिंग, विशेष सफाई अभियान और शिकायतों का निस्तारण भी इसी शाखा की जिम्मेदारी।
- स्थायी चीफ नहीं होने से प्रशासनिक फैसलों और नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी।
शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सैनीटेशन ब्रांच में स्थायी चीफ की नियुक्ति जरूरी है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। इसको लेकर विभाग के आलाधिकारियों को पहले ही पत्र भेजकर अवगत करवाया जा चुका है, जिस पर फैसला लेने का अधिकार आलाधिकारियों के पास है। -परविंदर सिंह, ईओ, जीरकपुर नगर परिषद।
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