{"_id":"69dffd5d734a3920940b202a","slug":"sukh-seva-sealed-several-hospitals-under-scrutiny-mohali-news-c-71-1-mli1010-141336-2026-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: सुख सेवा हुआ सील, जांच \nके घेरे में आए कई अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: सुख सेवा हुआ सील, जांच के घेरे में आए कई अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहाली। किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच में बड़ा मोड़ सामने आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को अब संदेह है कि किडनी ट्रांसप्लांट खरड़ के जिस निजी अस्पताल में होने का दावा किया गया, वहां वास्तव में सर्जरी हुई ही नहीं। जांच अधिकारियों के अनुसार इस पूरे मामले में किसी दूसरे अस्पताल या बाहरी ऑपरेशन थिएटर (ऑपरेशन थिएटर) सुविधा के इस्तेमाल की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। वहीं, दूसरी तरफ डीसी मोहाली कोमल मित्तल के निर्देश पर अस्पताल सुख सेवा को सील कर दिया गया है। एसपी मनप्रीत सिंह की अगुवाई में चल रही जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि संबंधित अस्पताल के पास ‘मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के तहत किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यक अनुमति ही नहीं थी। इसके बावजूद ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया के किए जाने के दावे ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। एसआईटी इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि क्या अस्पताल ने कानूनी रूप से जरूरी मूल्यांकन तंत्र तैयार किया था या नहीं। नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों की एक समिति, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक राजपत्रित अधिकारी शामिल होना अनिवार्य होता है। यह पैनल डोनर और रिसीवर के बीच रिश्ते की वैधता की पुष्टि करता है और यह सुनिश्चित करता है कि किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या अवैध सौदा न हो।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित डोनर नेपाल का नागरिक है, जबकि रिसीवर दिल्ली का रहने वाला है। इस कारण यह मामला ‘गैर-रिश्तेदार डोनर’ की श्रेणी में आता है। इसमें जिला या राज्य स्तर की प्राधिकरण समिति से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होता है। एसआईटी ने सिविल सर्जन कार्यालय से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस ट्रांसप्लांट के लिए कोई आवेदन या मंजूरी प्रक्रिया शुरू की गई थी। जांच के दौरान एक और गंभीर सवाल है। आरोपी डॉक्टर के खिलाफ 2018 और 2023 में ‘पीसीपीएनडीटी एक्ट’ के तहत दो मामले दर्ज होने के बावजूद उसका मेडिकल लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया गया। इस पर भी एसआईटी ने संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी अंग प्रत्यारोपण से पहले प्राधिकरण समिति की मंजूरी अनिवार्य होती है। खासकर विदेशी डोनर के मामलों में अतिरिक्त जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और दूतावास से पुष्टि जरूरी होती है। मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एसआईटी का कहना है कि रेगुलेटरी चूक, संभावित मिलीभगत और अवैध नेटवर्क के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी।
Trending Videos
अधिकारियों ने बताया कि संबंधित अस्पताल के पास ‘मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के तहत किडनी ट्रांसप्लांट करने की आवश्यक अनुमति ही नहीं थी। इसके बावजूद ट्रांसप्लांट जैसी जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया के किए जाने के दावे ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। एसआईटी इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि क्या अस्पताल ने कानूनी रूप से जरूरी मूल्यांकन तंत्र तैयार किया था या नहीं। नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों की एक समिति, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक राजपत्रित अधिकारी शामिल होना अनिवार्य होता है। यह पैनल डोनर और रिसीवर के बीच रिश्ते की वैधता की पुष्टि करता है और यह सुनिश्चित करता है कि किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या अवैध सौदा न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित डोनर नेपाल का नागरिक है, जबकि रिसीवर दिल्ली का रहने वाला है। इस कारण यह मामला ‘गैर-रिश्तेदार डोनर’ की श्रेणी में आता है। इसमें जिला या राज्य स्तर की प्राधिकरण समिति से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य होता है। एसआईटी ने सिविल सर्जन कार्यालय से भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस ट्रांसप्लांट के लिए कोई आवेदन या मंजूरी प्रक्रिया शुरू की गई थी। जांच के दौरान एक और गंभीर सवाल है। आरोपी डॉक्टर के खिलाफ 2018 और 2023 में ‘पीसीपीएनडीटी एक्ट’ के तहत दो मामले दर्ज होने के बावजूद उसका मेडिकल लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया गया। इस पर भी एसआईटी ने संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी अंग प्रत्यारोपण से पहले प्राधिकरण समिति की मंजूरी अनिवार्य होती है। खासकर विदेशी डोनर के मामलों में अतिरिक्त जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और दूतावास से पुष्टि जरूरी होती है। मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एसआईटी का कहना है कि रेगुलेटरी चूक, संभावित मिलीभगत और अवैध नेटवर्क के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी।
