पद्मश्री: पंजाब के कोच बलदेव सिंह, क्रिकेटर हरमनप्रीत सम्मानित, संत निरंजन दास को भी मिला अवाॅर्ड
बलदेव सिंह एक अनुभवी हॉकी कोच हैं जिन्होंने 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया है। प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर ने कप्तान के रूप में भारत को महिला विश्व कप में जीत दिलाई है।
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पंजाब की तीन हस्तियों को आज पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें हॉकी कोच बलदेव सिंह, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और संत निरंजन दास शामिल हैं।
पंजाब के मोगा जिले के गांव दुननेके की रहने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को 25 जनवरी को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री देने की घोषणा की गई थी। 25 मई को उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
यह सम्मान भारतीय महिला क्रिकेट में उनके ऐतिहासिक योगदान और नेतृत्व में टीम को पहली बार वनडे विश्व कप खिताब दिलाने के लिए दिया गया है। 2 नवंबर 2025 को उनकी कप्तानी में भारत ने विश्व कप जीतकर इतिहास रचा। साधारण परिवार से आने वाली हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर मोगा जिला अदालत में वकील के मुंशी रहे हैं।
बचपन से ही उन्होंने क्रिकेट में रुचि दिखाई और पिता के साथ गुरु नानक कॉलेज के मैदान में लड़कों के साथ खेलना शुरू किया। समाज के विरोध के बावजूद पिता ने उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 2014 में टेस्ट डेब्यू किया। 2017 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला था। अब पद्म श्री से सम्मानित होकर उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। पिता ने इसे गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह सम्मान शब्दों से परे है। यह उपलब्धि देश की बेटियों के लिए प्रेरणा है।
संत निरंजन दास को पद्मश्री, पंजाब की राजनीति पर पड़ेगा असर
जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास जी को पद्मश्री सम्मान मिलना केवल धार्मिक या सामाजिक उपलब्धि नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे पंजाब की राजनीति और सामाजिक समीकरणों में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस सम्मान ने जहां रविदासिया समाज का मनोबल बढ़ाया है, वहीं भाजपा को पंजाब खासकर दोआबा क्षेत्र में दलित वर्ग के बीच नई राजनीतिक पकड़ बनाने का अवसर भी दिया है। इसी वर्ष गुरु रविदास जयंती के अवसर पर पीएम मोदी का डेरा सचखंड बल्लां पहुंचना केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं माना गया।
राजनीतिक हलकों में इसे एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा गया कि केंद्र सरकार रविदासिया समाज और डेरा बल्लां के सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम के जरिये भाजपा पंजाब के दलित वोट बैंक में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करवाने की कोशिश कर रही है। खासकर दोआबा क्षेत्र, जहां अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 45 प्रतिशत है, वहां डेरा बल्लां का प्रभाव बेहद अहम माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पंजाब की करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से संबंधित है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाती है। यह चर्चा राजनीतिक रूप से तेज है।