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Rajasthan News: दूध बेचने वाला युवक कैसे बना चंबल का सबसे खौफनाक डाकू? जानिए जगन गुर्जर की पूरी कहानी

Tue, 30 Jun 2026 04:56 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Tue, 30 Jun 2026 04:56 PM IST
सार

दूध बेचने वाले एक साधारण युवक से चंबल के सबसे खौफनाक डाकुओं में शामिल होने तक का सफर और फिर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में हत्या..। करीब दो दशक तक चंबल के बीहड़ों में आतंक का पर्याय रहे जगन गुर्जर का अंत उसी अपराध की दुनिया में हो गया।

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Rajasthan News: How Did a Milk Seller Become Chambal's Most Feared Dacoit? The Complete Story of Jagan Gurjar
आखिर कैसे खत्म हुई चंबल के कुख्यात डाकू जगन गुर्जर की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंबल के बीहड़ों में कभी एक नाम सुनते ही गांवों के दरवाजे बंद हो जाते थे, रास्ते सूने पड़ जाते थे और लोग अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने तक नहीं देते थे। वह नाम था जगन गुर्जर। हत्या, लूट, डकैती, रंगदारी, अपहरण और खुलेआम मारपीट जैसे संगीन अपराधों से उसने ऐसा खौफ कायम किया कि लोग उसके खिलाफ गवाही देने तक से डरते थे। यही वजह रही कि 120 से ज्यादा मुकदमे दर्ज होने के बावजूद वह करीब 70 मामलों में बरी हो गया।

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करीब दो दशक तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहने वाले इस कुख्यात डाकू की कहानी 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की एक बैरक में खत्म हो गई। आरोप है कि भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी लेकिन यह सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की कहानी का अंत है, जिसने साधारण जिंदगी से निकलकर अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और अंत भी उसी दुनिया की हिंसा में हुआ।
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पुजारी का बेटा, दूध बेचने वाला युवक
जगन गुर्जर धौलपुर जिले के भवुतीपुरा गांव का रहने वाला था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर स्थानीय लोक देवता बाबू महाराज के मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे। परिवार दूध का कारोबार भी करता था और जगन भी दूध बेचने का काम करता था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही युवक एक दिन चंबल का सबसे चर्चित डाकू बन जाएगा। अपराध की शुरुआत किसी बड़ी साजिश से नहीं, बल्कि मंदिर के एक विवाद से हुई। प्रसाद वितरण को लेकर मंदिर कमेटी और उसके पिता के बीच कहासुनी हुई। जब यह बात जगन तक पहुंची तो उसने कमेटी के सदस्यों के साथ मारपीट कर दी। पुलिस कार्रवाई के डर से वह बीहड़ों में भाग गया। यही भागना उसके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

महज 20 साल की उम्र में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ। बीहड़ों में पहुंचकर वह डकैत मोहन गुर्जर के गिरोह में शामिल हो गया लेकिन कुछ ही समय बाद अपने जीजा की हत्या का बदला लेने के लिए उसने अपने ही गुरु मोहन गुर्जर और उसके साथियों की हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद का गिरोह बना लिया और धीरे-धीरे चंबल में उसका आतंक फैलने लगा।

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संसद में गूंजा नाम
जगन गुर्जर शायद देश का पहला ऐसा डाकू था, जिसके एनकाउंटर की मांग संसद में उठी। जून 2019 में सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्यसभा में कहा कि जगन गुर्जर ने व्यापारियों के साथ मारपीट की, महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया और कानून व्यवस्था को चुनौती दी। उन्होंने केंद्र सरकार से उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग की थी। जगन ने पहली बार 2001 में तत्कालीन एसपी बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने आत्मसमर्पण किया। लेकिन जेल से बाहर आया तो फिर अपराध शुरू कर दिया। दूसरी बार 30 जनवरी 2009 को कांग्रेस नेता सचिन पायलट की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया। कुछ समय तक शांत रहा, लेकिन फिर हथियार उठा लिए। तीसरी बार 19 अगस्त 2018 को तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने सरेंडर किया। उसने कहा कि जंगलों की जिंदगी, भूख, गंदा पानी और लगातार भागते रहने से वह परेशान हो चुका है लेकिन यह बदलाव भी ज्यादा दिन नहीं चला। आत्मसमर्पण के बाद उसने अपनी पत्नी को उपचुनाव लड़वाया। उम्मीद थी कि परिवार सामान्य जीवन जिएगा लेकिन चुनाव हारने के बाद उसने फिर हथियार उठा लिए और अपराध की दुनिया में लौट आया।




3 रुपये के खुल्ले पैसे पर भी चला आतंक
2019 में बेटी के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा। वहां तीन रुपये के पानी के पाउच खरीदे। दुकानदार ने खुल्ले पैसे मांगे तो वह भड़क गया। बाजार में दुकानदार और व्यापारियों के साथ मारपीट की, बंदूक लहराई और तोड़फोड़ कर दी। कुछ दिनों बाद पंचर बनाने वाले से हवा कम भरने को लेकर विवाद हुआ तो उसके साथ भी मारपीट कर दी। 2018 में बेटी की शादी के दौरान उसने अपराध छोड़ने की सार्वजनिक कसम खाई लेकिन जेल से बाहर आने के बाद दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने जैसी शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद फिर बीहड़ों में भाग गया। उसके आतंक का असर इतना था कि कई गांवों में वर्षों तक शादियां नहीं हुईं। उसके अपने गांव में करीब दस साल तक कोई शादी नहीं हुई। उसके पिता तक गांव छोड़ने को मजबूर हो गए। समाज ने भी धीरे-धीरे उससे पूरी तरह दूरी बना ली।

धमकियां भी दीं और सुरक्षा भी मांगी
2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर देशभर में सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद उस पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बाद में उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डीजीपी को पत्र लिखकर खुद और अपने परिवार की सुरक्षा भी मांगी। उसका कहना था कि जेल से बाहर आने पर कई लोग उसे मारना चाहते हैं।


आखिरी गिरफ्तारी और अंतिम सफर
2022 में कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को धमकी देने वाला वीडियो जारी करने के बाद पुलिस ने जंगल में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से वह अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। 29 जून को उसी जेल की बैरक में उसकी हत्या कर दी गई। आरोप है कि साथी बंदी विष्णु ने गमछे से गला घोंटकर उसकी जान ले ली। इस घटना के साथ चंबल के सबसे चर्चित डाकुओं में शामिल जगन गुर्जर की कहानी हमेशा के लिए खत्म हो गई।

 

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