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Rajasthan: पहले गला घोंटा, फिर पोल से बांधकर कुएं में फेंका; भीलवाड़ा फाइनेंसर हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा
Sat, 01 Aug 2026 06:55 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 06:55 PM IST
सार
Rajasthan News: भीलवाड़ा के चर्चित फाइनेंसर शोभालाल जैन हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी और मृतक का मुनीम अब भी फरार है। जांच में सामने आया कि करोड़ों की संपत्ति और 70 लाख रुपये की नकदी हड़पने के लालच में हत्या की साजिश रची गई।
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फाइनेंसर की हत्या का एक आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
करोड़ों की संपत्ति और 70 लाख रुपये की नकदी हड़पने की हवस ने एक भरोसेमंद रिश्ते को खौफनाक साजिश में बदल दिया। भीलवाड़ा जिले में चर्चित फाइनेंसर शोभालाल जैन हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस सनसनीखेज वारदात का मुख्य आरोपी और मृतक का मुनीम अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
करोड़ों की संपत्ति और 70 लाख रुपये बने हत्या की वजह
जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने बताया कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में आरोपी नारायण लाल को उदयपुर से गिरफ्तार किया गया है, जबकि मृतक का मुनीम रोशन गुर्जर अब भी फरार है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपियों की नजर शोभालाल जैन की करोड़ों रुपये की संपत्ति और उनके पास मौजूद करीब 70 लाख रुपये की नकदी पर थी।
पहली कोशिश नाकाम, फिर दो दिन बाद रची गई हत्या की साजिश
पुलिस के अनुसार, यह साजिश अचानक नहीं बनी थी। आरोपी रोशन को अच्छी तरह पता था कि शोभालाल जैन के पास बड़ी मात्रा में नकदी रहती है। इसी जानकारी के आधार पर उसने अपने दोस्त नारायण लाल को साथ मिलाया और हत्या की पूरी योजना तैयार की। दोनों ने पहले 16 जुलाई को सांवरियाजी यात्रा के दौरान वारदात को अंजाम देने की कोशिश की थी, लेकिन उस दिन शोभालाल जैन के साथ उनके भाई मदनलाल जैन मौजूद थे। इस कारण आरोपियों को मौका नहीं मिला और उन्होंने अपनी योजना टाल दी।
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चलती कार में गला घोंटा
बागोर थाना अधिकारी बच्छराज ने बताया कि 18 जुलाई को आरोपियों ने योजना को अंतिम रूप दिया। पुलिस के अनुसार, जब शोभालाल जैन, रोशन और नारायण सिरियारी से लौट रहे थे, तभी सुनसान स्थान पर कार के भीतर वारदात को अंजाम दिया गया। नारायण ने पीछे से शोभालाल के दोनों हाथ कसकर पकड़ लिए, जबकि रोशन ने उनका मुंह दबाकर गला घोंट दिया। मौत की पुष्टि होने के बाद आरोपियों ने मुंह पर टेप चिपका दिया, ताकि किसी प्रकार का सुराग न मिल सके।
पोल से बांधकर कुएं में फेंका शव
आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी पहले से कर रखी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि घटनास्थल के पास पड़े बिजली के पोल को शव के पैरों से बांध दिया गया, ताकि शव पानी में डूबा रहे और लंबे समय तक बाहर न आ सके। इसके बाद हाथ-पैर बांधकर शव को मदनपुरा स्थित गहरे कुएं में फेंक दिया गया। इसके बाद दोनों आरोपी करीब 70 लाख रुपये की नकदी लेकर मौके से फरार हो गए।
कुएं से मिला शव तो खुला हत्या का राज
घटना का खुलासा 26 जुलाई को हुआ, जब मदनपुरा के कुएं में शव होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही बागोर थाना पुलिस, एसडीआरएफ की टीम और क्रेन मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला गया। शव की स्थिति बेहद खराब थी। मृतक के हाथ-पैर बिजली के पोल से बंधे हुए थे और मुंह पर कपड़ा बंधा हुआ था।
साइबर जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
तकनीकी साक्ष्यों, साइबर इनपुट और अन्य पहलुओं पर गहन जांच के बाद बागोर थाना पुलिस, जिला विशेष टीम (डीएसटी) और साइबर शाखा की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी नारायण लाल को उदयपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। थाना प्रभारी बच्छराज ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश की, लेकिन सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके दाहिने पैर में चोट लग गई।
10 लाख के लालच में बना हत्याकांड का हिस्सा
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि मुनीम रोशन ने अपने साथी नारायण को हत्या में सहयोग करने के बदले 10 लाख रुपये देने का लालच दिया था। इसी लालच में नारायण इस जघन्य अपराध में शामिल हो गया। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी रोशन गुर्जर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे हत्याकांड से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
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करोड़ों की संपत्ति और 70 लाख रुपये बने हत्या की वजह
जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने बताया कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में आरोपी नारायण लाल को उदयपुर से गिरफ्तार किया गया है, जबकि मृतक का मुनीम रोशन गुर्जर अब भी फरार है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपियों की नजर शोभालाल जैन की करोड़ों रुपये की संपत्ति और उनके पास मौजूद करीब 70 लाख रुपये की नकदी पर थी।
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पहली कोशिश नाकाम, फिर दो दिन बाद रची गई हत्या की साजिश
पुलिस के अनुसार, यह साजिश अचानक नहीं बनी थी। आरोपी रोशन को अच्छी तरह पता था कि शोभालाल जैन के पास बड़ी मात्रा में नकदी रहती है। इसी जानकारी के आधार पर उसने अपने दोस्त नारायण लाल को साथ मिलाया और हत्या की पूरी योजना तैयार की। दोनों ने पहले 16 जुलाई को सांवरियाजी यात्रा के दौरान वारदात को अंजाम देने की कोशिश की थी, लेकिन उस दिन शोभालाल जैन के साथ उनके भाई मदनलाल जैन मौजूद थे। इस कारण आरोपियों को मौका नहीं मिला और उन्होंने अपनी योजना टाल दी।
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चलती कार में गला घोंटा
बागोर थाना अधिकारी बच्छराज ने बताया कि 18 जुलाई को आरोपियों ने योजना को अंतिम रूप दिया। पुलिस के अनुसार, जब शोभालाल जैन, रोशन और नारायण सिरियारी से लौट रहे थे, तभी सुनसान स्थान पर कार के भीतर वारदात को अंजाम दिया गया। नारायण ने पीछे से शोभालाल के दोनों हाथ कसकर पकड़ लिए, जबकि रोशन ने उनका मुंह दबाकर गला घोंट दिया। मौत की पुष्टि होने के बाद आरोपियों ने मुंह पर टेप चिपका दिया, ताकि किसी प्रकार का सुराग न मिल सके।
पोल से बांधकर कुएं में फेंका शव
आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी पहले से कर रखी थी। पुलिस जांच में सामने आया कि घटनास्थल के पास पड़े बिजली के पोल को शव के पैरों से बांध दिया गया, ताकि शव पानी में डूबा रहे और लंबे समय तक बाहर न आ सके। इसके बाद हाथ-पैर बांधकर शव को मदनपुरा स्थित गहरे कुएं में फेंक दिया गया। इसके बाद दोनों आरोपी करीब 70 लाख रुपये की नकदी लेकर मौके से फरार हो गए।
कुएं से मिला शव तो खुला हत्या का राज
घटना का खुलासा 26 जुलाई को हुआ, जब मदनपुरा के कुएं में शव होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही बागोर थाना पुलिस, एसडीआरएफ की टीम और क्रेन मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला गया। शव की स्थिति बेहद खराब थी। मृतक के हाथ-पैर बिजली के पोल से बंधे हुए थे और मुंह पर कपड़ा बंधा हुआ था।
साइबर जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
तकनीकी साक्ष्यों, साइबर इनपुट और अन्य पहलुओं पर गहन जांच के बाद बागोर थाना पुलिस, जिला विशेष टीम (डीएसटी) और साइबर शाखा की संयुक्त कार्रवाई में आरोपी नारायण लाल को उदयपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। थाना प्रभारी बच्छराज ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने पुलिस को चकमा देकर भागने की कोशिश की, लेकिन सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके दाहिने पैर में चोट लग गई।
10 लाख के लालच में बना हत्याकांड का हिस्सा
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि मुनीम रोशन ने अपने साथी नारायण को हत्या में सहयोग करने के बदले 10 लाख रुपये देने का लालच दिया था। इसी लालच में नारायण इस जघन्य अपराध में शामिल हो गया। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी रोशन गुर्जर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे हत्याकांड से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।