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Rajasthan News: व्हाट्सएप पर आया 'बॉस का मैसेज' पड़ सकता है भारी, साइबर पुलिस ने किया आगाह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 25 Jun 2026 07:16 AM IST
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सार

 

राजस्थान पुलिस ने फेक बॉस और फर्जी नियामक संस्थाओं के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर अलर्ट जारी किया है। कर्मचारियों को भुगतान से पहले सत्यापन करने की सलाह दी गई।

Cyber Criminals Impersonating CEOs and Regulators to Steal Company Funds
Cyber crime - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाया है, जिसमें वे सीधे आम लोगों के बजाय कंपनियों, संस्थानों और उनके वित्तीय सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि ठग अब खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि या किसी नियामक संस्था का अधिकारी बताकर कर्मचारियों को झांसे में ले रहे हैं।

पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी ईमेल, व्हाट्सएप या फोन कॉल के जरिए पहले भरोसा जीतते हैं और फिर तत्काल भुगतान, गोपनीय ट्रांजेक्शन या विशेष निर्देशों का दबाव बनाते हैं। कई मामलों में कर्मचारियों को ZIP फाइल, लिंक या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। इन्हें खोलते ही मालवेयर सिस्टम में प्रवेश कर संवेदनशील जानकारी और व्हाट्सएप वेब तक पहुंच बना लेता है।

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इसके बाद अपराधी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के नाम से संदेश भेजकर खातों में पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं। सबसे अधिक खतरा वित्त विभाग, अकाउंट्स शाखा और भुगतान संबंधी जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों को बताया गया है।

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इन संकेतों से रहें सावधान?

-तत्काल भुगतान या गोपनीय लेन-देन का दबाव।

-अनजान स्रोत से ZIP फाइल या सॉफ्टवेयर।

-संदिग्ध ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर।

-RBI या किसी नियामक संस्था के नाम से असामान्य संदेश।

पुलिस की सलाह

राजस्थान पुलिस ने कहा है कि किसी भी भुगतान संबंधी आदेश की स्वतंत्र रूप से फोन या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पुष्टि करें। अज्ञात लिंक और फाइल डाउनलोड न करें। व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइस की नियमित जांच करें तथा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और अपडेटेड सुरक्षा सॉफ्टवेयर का उपयोग करें।

पुलिस का कहना है कि साइबर ठग अब तकनीकी कमजोरियों के साथ-साथ कर्मचारियों के भरोसे और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में संस्थानों को केवल डिजिटल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की साइबर जागरूकता भी बढ़ानी होगी। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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