ओबीसी आरक्षण पर फैसला सरकार करे, हम दो दिन में चुनाव घोषित कर देंगे: राज्य निर्वाचन आयुक्त
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण तय करना सरकार का अधिकार है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही दो दिन में चुनाव घोषित कर दिए जाएंगे।
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राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) राजेश्वर सिंह ने कहा है कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिला आरक्षण तय करना राज्य निर्वाचन आयोग का नहीं, बल्कि राज्य सरकार का काम है। उन्होंने कहा कि वार्डों और पदों के वर्गवार आरक्षण की प्रक्रिया राज्यसरकार जिस दिन पूरी कर देगी ,मैं उसके अगले दो दिन में चुनाव की घोषणा कर दूंगा ।
गौरतलब है कि गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनावों में हो रही देरी के मुद्दे पर गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार को 5 दिन में चुनाव कार्यक्रम की तारीख तय करने के निर्देश जारी कर दिए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीईसी को भी कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि आप क्यों चाहते हैं कि हम आपके खिलाफ अवमानना याचिका की कार्यवाही शुरू करें।
अब इस पूरे मामले को लेकर सीईसी राजेश्वर सिंह ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई निर्णय लेना है, तो वह भी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। आयोग केवल सरकार द्वारा आरक्षण प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार जिस दिन वार्डों और पदों का वर्गवार आरक्षण तय कर देगी, राज्य निर्वाचन आयोग दो दिन के भीतर चुनाव की अधिसूचना जारी कर देगा।
हाईकोर्ट में रखीं तीन प्रमुख बातें
उन्होंने कहा कि कल गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष हुई वर्चुअल सुनवाई में उन्होंने आयोग का पक्ष स्पष्ट करते हुए तीन प्रमुख बिंदु रखे-
- एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।
- ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना आरक्षण पर निर्णय लेना भी सरकार का अधिकार है।
- सरकार द्वारा पदवार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करते ही आयोग दो दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर देगा।
उन्होंने कहा कि अदालत की सुनवाई मुख्य रूप से राज्य सरकार और ओबीसी आयोग की भूमिका पर केंद्रित रही।
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20 जुलाई को पेश होगी कार्ययोजना
राजेश्वर सिंह के अनुसार, हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग को निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने, राज्य सरकार को पदवार आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के निर्देश दिए हैं। अब 20 जुलाई को सभी संबंधित पक्ष अपनी कार्ययोजना के साथ हाईकोर्ट के समक्ष पेश होंगे। उन्होंने कहा कि जनता तक सही और प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना मीडिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, "भोजन में मिर्च-मसाला होना चाहिए, लेकिन इतना नहीं कि उसका वास्तविक स्वाद ही खत्म हो जाए।"
हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिखाई थी सख्ती
इससे पहले गुरुवार को पंचायत और निकाय चुनावों में देरी को लेकर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों से कड़े सवाल पूछे थे। अदालत ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से यह स्पष्ट करने को कहा था कि चुनाव कराने के लिए 90 दिन का अतिरिक्त समय मांगने वाला पत्र किस आधार पर भेजा गया।
सुनवाई के दौरान राजेश्वर सिंह ने अदालत को बताया था कि यह पत्र राज्य सरकार के अनुरोध पर भेजा गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि आयोग समय पर चुनाव कराने के लिए सरकार को कई बार पत्र लिख चुका है।
खंडपीठ ने ओबीसी आयोग को सात दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि आयोग को 14 अगस्त तक का समय नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार, पंचायती राज विभाग, स्थानीय निकाय विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग को 20 जुलाई को चुनाव कार्यक्रम और अब तक की कार्ययोजना के साथ अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।