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News: राजस्थान में दो साल में 8.4 लाख से ज्यादा छात्रों का नामांकन घटा, सरकारी स्कूलों में सबसे बड़ी गिरावट
Fri, 17 Jul 2026 01:09 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:09 PM IST
सार
यूडीआईएसई रिपोर्ट में राजस्थान में दो वर्षों में 8.4 लाख से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन घटा है। डोटासरा ने इसे शिक्षा का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में स्कूली शिक्षा को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यूडीआईएसई (UDISE) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों का कुल नामांकन 8.4 लाख से अधिक घट गया है। सबसे अधिक गिरावट सरकारी स्कूलों में दर्ज की गई है, जबकि निजी स्कूलों में इसी अवधि में 11 लाख से अधिक नए विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है।
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए इसे "शिक्षा का सबसे बड़ा घोटाला" बताया। उन्होंने कहा कि करीब नौ लाख विद्यार्थियों का स्कूलों से गायब होना गंभीर सामाजिक विषय है और इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
सरकारी स्कूलों से घटे 9.3 लाख विद्यार्थी
यूडीआईएसई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 83.8 लाख विद्यार्थी नामांकित थे। यह संख्या 2024-25 में घटकर 77.8 लाख और 2025-26 में 74.5 लाख रह गई। यानी दो वर्षों में सरकारी स्कूलों से 9.3 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ।
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इसके विपरीत, निजी स्कूलों में इसी अवधि के दौरान लगभग 11.3 लाख नए विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं।
डोटासरा बोले- कांग्रेस सरकार में स्थिर था नामांकन
गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूलों में नामांकन 1.74 करोड़ से अधिक बना रहा। उनके अनुसार, 2018-19 और 2020-21 में यह आंकड़ा 1.79 करोड़ था, जबकि कोविड काल के बाद भी 2022-23 में 1.77 करोड़ और 2023-24 में नामांकन में फिर बढ़ोतरी हुई थी। उनका आरोप है कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद नामांकन लगातार घटता गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अंग्रेजी माध्यम महात्मा गांधी स्कूलों की अवधारणा को कमजोर किया और सैकड़ों स्कूल बंद कर दिए, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।
रिपोर्ट में सामने आईं कई विसंगतियां
यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 7,200 ऐसे स्कूल हैं, जहां 1.78 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। एक साल में ऐसे स्कूलों की संख्या 6,117 से बढ़कर 7,200 हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में 140 ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है, लेकिन वहां 189 शिक्षक पदस्थापित हैं।
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इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए इसे "शिक्षा का सबसे बड़ा घोटाला" बताया। उन्होंने कहा कि करीब नौ लाख विद्यार्थियों का स्कूलों से गायब होना गंभीर सामाजिक विषय है और इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
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सरकारी स्कूलों से घटे 9.3 लाख विद्यार्थी
यूडीआईएसई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में सरकारी स्कूलों में 83.8 लाख विद्यार्थी नामांकित थे। यह संख्या 2024-25 में घटकर 77.8 लाख और 2025-26 में 74.5 लाख रह गई। यानी दो वर्षों में सरकारी स्कूलों से 9.3 लाख विद्यार्थियों का नामांकन कम हुआ।
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इसके विपरीत, निजी स्कूलों में इसी अवधि के दौरान लगभग 11.3 लाख नए विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं।
डोटासरा बोले- कांग्रेस सरकार में स्थिर था नामांकन
गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूलों में नामांकन 1.74 करोड़ से अधिक बना रहा। उनके अनुसार, 2018-19 और 2020-21 में यह आंकड़ा 1.79 करोड़ था, जबकि कोविड काल के बाद भी 2022-23 में 1.77 करोड़ और 2023-24 में नामांकन में फिर बढ़ोतरी हुई थी। उनका आरोप है कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद नामांकन लगातार घटता गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अंग्रेजी माध्यम महात्मा गांधी स्कूलों की अवधारणा को कमजोर किया और सैकड़ों स्कूल बंद कर दिए, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।
रिपोर्ट में सामने आईं कई विसंगतियां
यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 7,200 ऐसे स्कूल हैं, जहां 1.78 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। एक साल में ऐसे स्कूलों की संख्या 6,117 से बढ़कर 7,200 हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में 140 ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है, लेकिन वहां 189 शिक्षक पदस्थापित हैं।