{"_id":"6a6469971e319a2d2403a2f0","slug":"rpsc-geography-lecturer-recruitment-answer-key-challenged-in-high-court-candidates-allege-merit-loss-due-to-changed-answers-jaipur-news-c-1-1-noi1422-4539728-2026-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaipur: RPSC स्कूल लेक्चरर भर्ती 2022, फाइनल आंसर-की बदलने का आरोप, अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaipur: RPSC स्कूल लेक्चरर भर्ती 2022, फाइनल आंसर-की बदलने का आरोप, अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
Sat, 25 Jul 2026 03:50 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 03:50 PM IST
सार
आरपीएससी स्कूल लेक्चरर (भूगोल) भर्ती-2022 की फाइनल आंसर-की में उत्तर बदलने को लेकर विवाद गहरा गया है। अभ्यर्थी चयन सूची में धांधली की शिकायत लेकर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गए हैं।
विज्ञापन
RPSC आंसर की का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्कूल लेक्चरर (भूगोल) भर्ती-2022 एक बार फिर विवादों में आ गई है। भर्ती की फाइनल आंसर-की को लेकर अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि आयोग ने पहले जारी मॉडल आंसर-की में जिन उत्तरों को सही माना था, उन्हें बाद में बिना स्पष्ट कारण बदला गया। इससे कई अभ्यर्थियों के अंक कम हो गए और वे अंतिम चयन सूची से बाहर हो गए।
याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव और अन्य अभ्यर्थियों के अनुसार आयोग ने 23 दिसंबर 2022 को मॉडल आंसर-की जारी कर विभिन्न प्रश्नों पर आपत्तियां आमंत्रित की थीं। अभ्यर्थियों ने प्रश्न संख्या 33 और 122 सहित कई सवालों पर मानक पुस्तकों एवं दस्तावेजों के आधार पर आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना है कि 29 जनवरी 2024 को जारी फाइनल आंसर-की में कुछ उत्तरों को बदल दिया गया, जबकि उन पर आयोग की ओर से कोई विस्तृत कारण या विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
ये भी पढ़ें: Sikar News: केस कमजोर करने के नाम पर मांगे तीन लाख, नीमकाथाना एपीपी 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार
विज्ञापन
अभ्यर्थियों का दावा है कि 5 अक्टूबर 2023 को जारी रिजर्व सूची में उनके रोल नंबर शामिल थे और उनके प्राप्तांक संबंधित श्रेणी की अंतिम कटऑफ से अधिक थे। इसके बावजूद अंतिम चयन सूची में उन्हें स्थान नहीं मिला। उनका आरोप है कि फाइनल आंसर-की में बदलाव के कारण उनके अंक कम हो गए, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और वे नियुक्ति से वंचित रह गए। याचिका में यह भी कहा गया है कि भूगोल विषय के कई प्रश्न मानक संदर्भ पुस्तकों, मूल प्रश्नपत्र और आयोग की मॉडल आंसर-की के अनुरूप सही थे, लेकिन अंतिम उत्तर कुंजी में उन्हें बदल दिया गया। इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से फाइनल आंसर-की में संशोधन, सही उत्तरों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन कराने तथा संशोधित मेरिट सूची जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उत्तर कुंजी में त्रुटि आयोग की ओर से हुई है तो इसका खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए। अब इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि न्यायालय का निर्णय न केवल इस भर्ती बल्कि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर कुंजी और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव और अन्य अभ्यर्थियों के अनुसार आयोग ने 23 दिसंबर 2022 को मॉडल आंसर-की जारी कर विभिन्न प्रश्नों पर आपत्तियां आमंत्रित की थीं। अभ्यर्थियों ने प्रश्न संख्या 33 और 122 सहित कई सवालों पर मानक पुस्तकों एवं दस्तावेजों के आधार पर आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना है कि 29 जनवरी 2024 को जारी फाइनल आंसर-की में कुछ उत्तरों को बदल दिया गया, जबकि उन पर आयोग की ओर से कोई विस्तृत कारण या विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Sikar News: केस कमजोर करने के नाम पर मांगे तीन लाख, नीमकाथाना एपीपी 50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार
विज्ञापन
अभ्यर्थियों का दावा है कि 5 अक्टूबर 2023 को जारी रिजर्व सूची में उनके रोल नंबर शामिल थे और उनके प्राप्तांक संबंधित श्रेणी की अंतिम कटऑफ से अधिक थे। इसके बावजूद अंतिम चयन सूची में उन्हें स्थान नहीं मिला। उनका आरोप है कि फाइनल आंसर-की में बदलाव के कारण उनके अंक कम हो गए, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और वे नियुक्ति से वंचित रह गए। याचिका में यह भी कहा गया है कि भूगोल विषय के कई प्रश्न मानक संदर्भ पुस्तकों, मूल प्रश्नपत्र और आयोग की मॉडल आंसर-की के अनुरूप सही थे, लेकिन अंतिम उत्तर कुंजी में उन्हें बदल दिया गया। इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से फाइनल आंसर-की में संशोधन, सही उत्तरों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन कराने तथा संशोधित मेरिट सूची जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उत्तर कुंजी में त्रुटि आयोग की ओर से हुई है तो इसका खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए। अब इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि न्यायालय का निर्णय न केवल इस भर्ती बल्कि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की उत्तर कुंजी और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।