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Jhunjhunu bypoll: बगावत के दंश को रोकना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती, बागियों के फेर में फंसी भाजपा; जानें समीकरण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू
Published by: झुंझुनू ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:56 PM IST
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सार
Jhunjhunu: झुंझुनूं सीट तीसरी बार बागियों के फेर में उलझती नजर आ रही है। यहां से तीसरी बार राजेंद्र भांबू और बबलू चौधरी आमने-सामने होंगे। यहां से लगातार 3 बार विधायक रह चुके बृजेंद्र ओला इस बार लोकसभा में सांसद हैं।
झुंझुनू उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झुंझुनू उपचुनाव में टिकट घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लगातार कार्यकर्ताओं के द्वारा विरोध किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी से पहले प्रत्याशी रहे बबलू चौधरी ने बागी तेवर दिखाते हुए विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने के साथ ही भाजपा में बगावत की। आज यह बगावत काफी तेजी से उठती हुई नजर आ रही है। टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा नेता और आम चुनाव में पार्टी प्रत्याशी रहे बबलू चौधरी ने बगावत करते हुए 23 तारीख को 11:15 बजे नामांकन रैली के साथ अपना नामांकन दर्ज करवाने की घोषणा की है।
ऐसे में विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी बार बगावत के आसार बने हुए हैं। इसी के साथ राजेंद्र भांबू और बबलू चौधरी एक बार फिर आमने–सामने हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राजेंद्र भांबू को उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है। आपको बता दें कि यह तीसरी बार है जब राजेंद्र भांबू और बबलू चौधरी आमने–सामने होंगे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी भांबू और बबलू ने एक–दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस बार भी यदि बबलू चौधरी घोषणा के अनुसार चुनाव लड़ते हैं तो दोनों तीसरी बार आमने–सामने होंगे।
2018 मेंभाजपा ने कांग्रेस से आए राजेंद्र भांबू को पार्टी का टिकट दिया था, तब टिकट मांग रहे बबलू चौधरी ने बागी होकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में भाजपा के राजेंद्र भांबू को 35,612 वोट हासिल हुए, जबकि बागी के रूप में चुनाव लड़ने वाले बबलू चौधरी ने 29,410 वोट प्राप्त किए। इसके बाद 2023 के चुनाव में पार्टी ने 2018 के बागी बबलू चौधरी को प्रत्याशी बनाया तो राजेंद्र भांबू ने बगावत करते हुए चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बबलू चौधरी ने 57,935 वोट हासिल किए जबकि राजेंद्र भांबू ने 42,407 वोट प्राप्त किए। दोनों चुनावों में प्रत्याशियों की हार हुई।
बता दें कि यह बगावत 2013 से चली आ रही है। इस विधानसभा सीट पर 2013 में भाजपा में पहली बार बगावत शुरू हुई थी। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर वरिष्ठ भाजपा नेता सुमित्रा सिंह ने बागी होकर प्रत्याशी के रूप में राजीव सिंह के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, उस समय भी पार्टी की हार हुई। इसके बाद 2018 में भाजपा की टिकट मांग रहे बबलू चौधरी और पूर्व विधायक डॉ. मूल सिंह के बेटे यशवर्धन सिंह ने बागी होकर मैदान में उतरने का निर्णय लिया।
इस चुनाव में प्रत्याशी राजेंद्र भांबू की हार हुई। इसी तरह 2023 में जब बबलू चौधरी को टिकट मिला, तो राजेंद्र भांबू ने बागी होकर चुनाव लड़ा, जिसमें भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले, सुमित्रा सिंह ने 2008 में मंडावा सीट पर चले जाने के बाद पार्टी ने ओमप्रकाश अबूसरिया को टिकट देने की घोषणा की थी। तब भी भाजपा नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए, हालांकि बाद में पार्टी ने उनका टिकट काटकर पूर्व विधायक डॉ. मूल सिंह को दिया। तब सेइस सीट पर लगातार कांग्रेस की विजय होती आ रही है। झुंझुनू की सीट बृजेंद्र ओला के लोकसभा से सांसद निर्वाचित होने पर रिक्त हुई है। इससे पहले 2013, 2018 और 2023 में वह झुंझुनू से विधायक रह चुके हैं।
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ऐसे में विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी बार बगावत के आसार बने हुए हैं। इसी के साथ राजेंद्र भांबू और बबलू चौधरी एक बार फिर आमने–सामने हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राजेंद्र भांबू को उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है। आपको बता दें कि यह तीसरी बार है जब राजेंद्र भांबू और बबलू चौधरी आमने–सामने होंगे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी भांबू और बबलू ने एक–दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस बार भी यदि बबलू चौधरी घोषणा के अनुसार चुनाव लड़ते हैं तो दोनों तीसरी बार आमने–सामने होंगे।
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2018 मेंभाजपा ने कांग्रेस से आए राजेंद्र भांबू को पार्टी का टिकट दिया था, तब टिकट मांग रहे बबलू चौधरी ने बागी होकर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में भाजपा के राजेंद्र भांबू को 35,612 वोट हासिल हुए, जबकि बागी के रूप में चुनाव लड़ने वाले बबलू चौधरी ने 29,410 वोट प्राप्त किए। इसके बाद 2023 के चुनाव में पार्टी ने 2018 के बागी बबलू चौधरी को प्रत्याशी बनाया तो राजेंद्र भांबू ने बगावत करते हुए चुनाव लड़ा। इस चुनाव में बबलू चौधरी ने 57,935 वोट हासिल किए जबकि राजेंद्र भांबू ने 42,407 वोट प्राप्त किए। दोनों चुनावों में प्रत्याशियों की हार हुई।
बता दें कि यह बगावत 2013 से चली आ रही है। इस विधानसभा सीट पर 2013 में भाजपा में पहली बार बगावत शुरू हुई थी। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर वरिष्ठ भाजपा नेता सुमित्रा सिंह ने बागी होकर प्रत्याशी के रूप में राजीव सिंह के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, उस समय भी पार्टी की हार हुई। इसके बाद 2018 में भाजपा की टिकट मांग रहे बबलू चौधरी और पूर्व विधायक डॉ. मूल सिंह के बेटे यशवर्धन सिंह ने बागी होकर मैदान में उतरने का निर्णय लिया।
इस चुनाव में प्रत्याशी राजेंद्र भांबू की हार हुई। इसी तरह 2023 में जब बबलू चौधरी को टिकट मिला, तो राजेंद्र भांबू ने बागी होकर चुनाव लड़ा, जिसमें भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले, सुमित्रा सिंह ने 2008 में मंडावा सीट पर चले जाने के बाद पार्टी ने ओमप्रकाश अबूसरिया को टिकट देने की घोषणा की थी। तब भी भाजपा नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए, हालांकि बाद में पार्टी ने उनका टिकट काटकर पूर्व विधायक डॉ. मूल सिंह को दिया। तब सेइस सीट पर लगातार कांग्रेस की विजय होती आ रही है। झुंझुनू की सीट बृजेंद्र ओला के लोकसभा से सांसद निर्वाचित होने पर रिक्त हुई है। इससे पहले 2013, 2018 और 2023 में वह झुंझुनू से विधायक रह चुके हैं।