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Kota News: बाकायदा साइबर ठगी सीखकर आया था मास्टर माइंड, फर्जी कॉल सेंटर खोलकर बिछाया जाल, पांच गिरफ्तार

Tue, 18 Aug 2026 09:53 AM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Tue, 18 Aug 2026 09:53 AM IST
सार

बेंगलुरु से साइबर ठगी का तरीका सीखकर कोटा में कॉल सेंटर खोलकर ठगी वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपी युवतियों से फोन करवाकर लोगों को निवेश के नाम पर ठगी का शिकार बनाते थे। मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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Kota News: Cyber Fraud Network Busted, 3 Fake Call Centres Exposed; 5 Arrested
हिरासत में साइबर ठग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर ठगी के खिलाफ कोटा पुलिस की कार्रवाई में तीन फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा हुआ है। पुलिस इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों में दो जोधपुर, दो नागौर और एक बीकानेर का रहने वाला है। पूछताछ में पुलिस के सामने साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह का मास्टर माइंड जोधपुर निवासी मोहम्मद अशफाक बताया जा रहा है। उसने बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर से साइबर ठगी का तरीका सीखा था। इसके बाद वह मध्य प्रदेश और मुंबई में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क के संपर्क में आया। वहां से तौर-तरीके सीखने के बाद उसने कोटा में अपना नेटवर्क खड़ा किया और कॉल सेंटर के जरिए लोगों को निवेश के नाम पर ठगना शुरू किया।

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डीएसपी गंगा सहाय शर्मा के अनुसार कोटा आने के बाद अशफाक ने स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क किया और गुमानपुरा क्षेत्र स्थित उमेश सदन में ऑफिस किराए पर लिया। इसके बाद उसने अपने रिश्तेदारों और साथियों को जोड़कर कॉल सेंटर का पूरा सेटअप तैयार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने रोजगार के नाम पर युवतियों को नौकरी पर रखा और उनसे रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को फोन करवाए जाते थे और इसके जरिए लोगों को निवेश में बेहतर रिटर्न का झांसा देकर ठगी के जाल में फंसाया जाता था।
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जांच में यह भी सामने आया कि अशफाक ने ठगी का तरीका सीखने के दौरान यह समझ लिया था कि लोग पुरुषों की आवाज की तुलना में युवतियों की बात पर निवेश के लिए जल्दी भरोसा कर लेते हैं। इसी वजह से उसने युवतियों को कॉलिंग के काम में लगाया। पुलिस के अनुसार युवतियों की भर्ती के लिए OLX सहित अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। गिरोह ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए पहले एक फर्जी वेबसाइट तैयार करवाई। इसके बाद वेबसाइट के डोमेन को विदेश में रजिस्टर कराया गया, ताकि जांच एजेंसियों के लिए उससे जुड़ी जानकारी हासिल करना मुश्किल हो। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने निवेश कंपनी को वास्तविक दिखाने के लिए फर्जी विदेशी सर्टिफिकेट भी तैयार करवाए थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 102 मोबाइल फोन, 11 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, डेस्कटॉप, साइबर ठगी से संबंधित डायरियां और रजिस्टर बरामद किए हैं। इसके अलावा करीब 65 हजार रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले में अब तक मोहम्मद अशफाक (जोधपुर), आवेश (बीकानेर), सैयद अली (नागौर), जावेद अली (नागौर) और मजीद खान (जोधपुर) को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आने की संभावना है।

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