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Kota: जेके लोन हॉस्पिटल सवालों के घेरे में, बच्चों को चढ़ाए गए ब्लड से एचआईवी संक्रमण का आरोप

Sat, 04 Jul 2026 09:11 PM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Sat, 04 Jul 2026 09:11 PM IST
सार

Rajasthan News: कोटा के जेके लोन अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ाए गए रक्त से एचआईवी संक्रमण होने के आरोप के बाद हड़कंप मच गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर जांच शुरू कर दी है, जबकि ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग ने NAT जांच प्रणाली का हवाला देते हुए आरोपों से इनकार किया है।

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JK Lon Hospital under scrutiny for allegedly transmitting HIV to children through blood transfusions
जेके लोन अस्पताल पर लगे लापरवाही के आरोप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोटा मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को चढ़ाए गए रक्त से एचआईवी संक्रमण होने का आरोप लगा है। मामले की जांच मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने शुरू कर दी है। हालांकि ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने अपने यहां से जारी किए गए रक्त से संक्रमण होने की संभावना से इनकार किया है। इस गंभीर आरोप के बाद सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और रक्त सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
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जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित
मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से प्राप्त पत्र के आधार पर जांच शुरू की गई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि थैलेसीमिया से पीड़ित एक बालिका की जांच में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें शिशु रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. अमृता, ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. परमेंद्र पचौरी और डॉ. मनीष बोहरा को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कोटा निवासी 8 वर्षीय एक बालिका थैलेसीमिया से पीड़ित है। परिजनों को उसकी बीमारी की जानकारी करीब तीन वर्ष की उम्र में हुई थी, जिसके बाद जेके लोन अस्पताल में नियमित रूप से उसका ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराया जाता रहा। परिजनों का आरोप है कि जून 2025 में आखिरी बार अस्पताल में रक्त चढ़ाया गया था। इसके बाद बालिका का उपचार जयपुर में चल रहा था। हाल ही में हुई जांच में वह एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। परिजनों का कहना है कि वर्ष 2023 में कराई गई जांच में एचआईवी संक्रमण नहीं था। ऐसे में उनका आरोप है कि संक्रमण अस्पताल में चढ़ाए गए रक्त के कारण हुआ।
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13 वर्षीय बालक का मामला भी आया सामने
इसी तरह 13 वर्षीय एक बालक में भी एचआईवी संक्रमण की आशंका का मामला सामने आया है। इससे पूरे घटनाक्रम की गंभीरता और बढ़ गई है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच की जा रही है।


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ब्लड बैंक ने आरोपों से किया इनकार
ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. परमेंद्र पचौरी ने बताया कि ब्लड बैंक में आने वाले प्रत्येक रक्त की कई स्तरों पर जांच की जाती है। थैलेसीमिया मरीजों को दिए जाने वाले रक्त की जांच अत्याधुनिक न्यूक्लिक एसिड टेस्ट तकनीक से की जाती है, जिससे शुरुआती संक्रमण का भी पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के चलते अस्पताल से जारी रक्त के माध्यम से एचआईवी संक्रमण होने की संभावना न के बराबर है। इसके बावजूद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।
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