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Kota: नकली ऑक्सीटोन सप्लाई करने वाली फर्म का लाइसेंस रद्द, WHO तक गूंजा मामला, भारत सरकार से मांगी रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2026 04:44 PM IST
सार
प्रसूताओं की मौत के मामले में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सप्लाई को लेकर ड्रग विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सप्लाई करने वाली फर्म का लाइसेंस रद्द कर दिया है। दूसरी ओर WHO ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
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ड्रग विभाग ने नकली दवा बनाने वाली फर्म पर किया एक्शन
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विस्तार
कोटा में जेके लोन अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी विंग में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत के मामले में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की सप्लाई करने वाली फर्म के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। औषधि नियंत्रण विभाग ने संबंधित फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। इससे पहले अमृतसर स्थित दवा निर्माता कंपनी का लाइसेंस भी रद्द किया जा चुका है।
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मामले के सामने आने के बाद ड्रग विभाग की टीम ने 19 मई को इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया स्थित संबंधित फर्म का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान नकली इंजेक्शन की सप्लाई के साथ-साथ कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं।
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सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग द्वारा 23 जून को जारी आदेश के अनुसार अस्पतालों में सप्लाई किए गए टोसिन (ऑक्सीटोसिन) इंजेक्शन जांच में नकली पाए गए। प्रयोगशाला परीक्षण में इन इंजेक्शनों में ऑक्सीटोसिन की मात्रा शून्य मिली। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने अमृतसर स्थित मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्री से कुल 9,300 डोज खरीदी थीं, जबकि रिकॉर्ड में 10,050 डोज की बिक्री दर्शाई गई। ऐसे में अतिरिक्त 750 इंजेक्शन कहां से आए, इसकी जांच जारी है।
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निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि फर्म से जुड़े शादाब खान मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि फर्म संचालक महेश मित्तल स्वयं दवाओं के विक्रय का कार्य कर रहे थे। इन अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए विभाग ने 21 मई को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।
डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार से मांगी रिपोर्ट
कोटा में प्रसूताओं की मौत का मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए भारत सरकार से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
डब्ल्यूएचओ ने विशेष रूप से अस्पतालों में सप्लाई किए गए नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का पूरा विवरण मांगा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि संबंधित इंजेक्शन भारत के अलावा अन्य देशों में भी सप्लाई किए गए थे या नहीं। यदि ऐसा हुआ है तो किन देशों में सप्लाई हुई, ताकि आवश्यक स्तर पर समय रहते रोकथाम और निगरानी की कार्रवाई की जा सके। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और ड्रग विभाग के साथ अन्य एजेंसियां भी नकली दवा सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं।