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Nagaur News: नागौर में प्रसूता की मौत पर सियासी घमासान, आरएलपी नेताओं पर एफआईआर के बाद गर्माया माहौल
Thu, 25 Jun 2026 10:48 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2026 10:48 PM IST
सार
नागौर में एक प्रसूता की संदिग्ध मौत के बाद शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन अब सियासी विवाद में बदल गया है। धरने में शामिल आरएलपी नेताओं पर एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया है।
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रुकमा देवी की मौत पर पुलिस और आरएलपी आमने-सामने
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विस्तार
जिले में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन के मामले में नागौर पुलिस ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, जबकि आरएलपी नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कार्रवाई का विरोध किया है।
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नागौर पुलिस ने आरएलपी के जिला प्रभारी हनुमान भाकर, नेता अनिल बारूपाल, मगनाराम केड़ली, पृथ्वीसिंह मेघवाल समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 189(2), 132, 121(1), 285 और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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क्या है मामला?
नागौर जिले में प्रसूता रुकमा मेघवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों और समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि महिला की मौत चिकित्सा लापरवाही के कारण हुई। इसके विरोध में RLP नेताओं के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया गया, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों और अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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एफआईआर के अनुसार धरने के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को डराने-धमकाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने जैसी घटनाएं हुईं। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। इधर आरएलपी नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और वे केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि धरने में अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे, लेकिन कार्रवाई केवल आरएलपी नेताओं के खिलाफ की गई, जो राजनीतिक पूर्वाग्रह को दर्शाता है।
बढ़ी सियासी हलचल
महिला की मौत और उसके बाद दर्ज हुई एफआईआर को लेकर नागौर की राजनीति गरमा गई है। मेघवाल समाज और कई स्थानीय संगठनों ने आरएलपी के समर्थन में आवाज उठाई है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि जनता की आवाज दबाने के लिए राजनीतिक विरोधियों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं महिला की मौत और चिकित्सा लापरवाही के आरोपों की जांच भी जारी है। पूरे घटनाक्रम ने जिले में राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है।