{"_id":"6a5c6c094545a2d27505cd3b","slug":"rajasthan-346-mahatma-gandhi-english-medium-schools-hindi-medium-restart-low-enrollment-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर शुरू होगा हिंदी माध्यम! कम एडमिशन पर सरकार का बड़ा फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर शुरू होगा हिंदी माध्यम! कम एडमिशन पर सरकार का बड़ा फैसला
Sun, 19 Jul 2026 11:48 AM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:48 AM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने कम नामांकन वाले 346 महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी माध्यम की कक्षाएं दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। अंग्रेजी माध्यम जारी रहेगा, जबकि नए छात्रों को दोनों माध्यमों का विकल्प मिलेगा। सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं।
विज्ञापन
राजस्थान के 346 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में फिर शुरू होगा हिंदी माध्यम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान सरकार ने कम नामांकन वाले 346 महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों (MGGS) में फिर से हिंदी माध्यम शुरू करने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग की समीक्षा में सामने आया कि कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 70 से भी कम रह गई है। इसके बाद सरकार ने अंग्रेजी माध्यम जारी रखते हुए हिंदी माध्यम की कक्षाएं भी संचालित करने का निर्णय लिया है, ताकि स्कूलों में नामांकन बढ़ाया जा सके। इस फैसले को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को कमजोर करने की कोशिश बताया है, जबकि भाजपा ने इसे व्यावहारिक फैसला करार दिया है।
कम नामांकन के बाद सरकार का बड़ा फैसला
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा कम नामांकन पर चिंता जताने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अगले पखवाड़े के भीतर नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों में पर्याप्त भवन और कक्ष उपलब्ध हैं, वहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं एक ही पाली में चलेंगी। वहीं, जगह की कमी वाले स्कूलों में दोनों माध्यम अलग-अलग पालियों में संचालित किए जाएंगे।
प्रदेशभर के 346 स्कूलों में कम मिले छात्र
विभागीय समीक्षा के अनुसार यह समस्या पूरे प्रदेश में सामने आई है। सबसे अधिक 34 स्कूल जयपुर में प्रभावित हैं। इसके बाद सीकर (27), चूरू (22), जोधपुर (22), बीकानेर (18), दौसा (15), डूंगरपुर और बांसवाड़ा (14-14), भरतपुर (13), जालोर (12) तथा फलोदी और उदयपुर (11-11) स्कूलों में नामांकन बेहद कम पाया गया।
विज्ञापन
कहीं छात्र नहीं, फिर भी तैनात हैं शिक्षक
समीक्षा रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जोधपुर के भादवा की ढाणी स्थित महात्मा गांधी स्कूल में वर्ष 2026-27 के लिए एक भी छात्र नामांकित नहीं हुआ, जबकि वहां नौ शिक्षक-कर्मचारी तैनात हैं। वहीं, झालावाड़ के पीडावा स्थित स्कूल में दो छात्रों पर पांच स्टाफ और भरतपुर के गिलग पट्टी स्थित स्कूल में तीन छात्रों पर सात स्टाफ कार्यरत हैं। इन आंकड़ों के बाद विभाग ने स्कूलों की व्यवस्था की समीक्षा शुरू की।
एक साल में आधे रह गए छात्र
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के कल्याणपुरा महात्मा गांधी स्कूल में वर्ष 2025-26 में 107 छात्र थे, जो 2026-27 में घटकर सिर्फ 50 रह गए। ऐसे कई स्कूलों में लगातार घटते नामांकन को देखते हुए सरकार ने नीति में बदलाव का फैसला लिया है।
पुराने छात्रों की पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई उसी माध्यम में जारी रहेगी। नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों का विकल्प मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे अभिभावकों को सुविधा मिलेगी और स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा।
यह भी पढ़ें: एक हफ्ते में तीन बार सांप ने डसा, फिर भी बच गई महिला की जान! डॉक्टर भी रह गए हैरान
कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने किया बचाव
पूर्व शिक्षा मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर शुरू से ही महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बंद करने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के बयानों से अभिभावकों में भ्रम फैला, जिससे प्रवेश प्रभावित हुए। वहीं भाजपा प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने बिना पर्याप्त योजना और जरूरत के कई अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोल दिए थे। वर्तमान सरकार ने जमीनी समीक्षा के आधार पर यह फैसला लिया है।
विज्ञापन
कम नामांकन के बाद सरकार का बड़ा फैसला
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा कम नामांकन पर चिंता जताने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अगले पखवाड़े के भीतर नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्कूलों में पर्याप्त भवन और कक्ष उपलब्ध हैं, वहां हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं एक ही पाली में चलेंगी। वहीं, जगह की कमी वाले स्कूलों में दोनों माध्यम अलग-अलग पालियों में संचालित किए जाएंगे।
विज्ञापन
प्रदेशभर के 346 स्कूलों में कम मिले छात्र
विभागीय समीक्षा के अनुसार यह समस्या पूरे प्रदेश में सामने आई है। सबसे अधिक 34 स्कूल जयपुर में प्रभावित हैं। इसके बाद सीकर (27), चूरू (22), जोधपुर (22), बीकानेर (18), दौसा (15), डूंगरपुर और बांसवाड़ा (14-14), भरतपुर (13), जालोर (12) तथा फलोदी और उदयपुर (11-11) स्कूलों में नामांकन बेहद कम पाया गया।
विज्ञापन
कहीं छात्र नहीं, फिर भी तैनात हैं शिक्षक
समीक्षा रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जोधपुर के भादवा की ढाणी स्थित महात्मा गांधी स्कूल में वर्ष 2026-27 के लिए एक भी छात्र नामांकित नहीं हुआ, जबकि वहां नौ शिक्षक-कर्मचारी तैनात हैं। वहीं, झालावाड़ के पीडावा स्थित स्कूल में दो छात्रों पर पांच स्टाफ और भरतपुर के गिलग पट्टी स्थित स्कूल में तीन छात्रों पर सात स्टाफ कार्यरत हैं। इन आंकड़ों के बाद विभाग ने स्कूलों की व्यवस्था की समीक्षा शुरू की।
एक साल में आधे रह गए छात्र
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के कल्याणपुरा महात्मा गांधी स्कूल में वर्ष 2025-26 में 107 छात्र थे, जो 2026-27 में घटकर सिर्फ 50 रह गए। ऐसे कई स्कूलों में लगातार घटते नामांकन को देखते हुए सरकार ने नीति में बदलाव का फैसला लिया है।
पुराने छात्रों की पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई उसी माध्यम में जारी रहेगी। नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों का विकल्प मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे अभिभावकों को सुविधा मिलेगी और स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा।
यह भी पढ़ें: एक हफ्ते में तीन बार सांप ने डसा, फिर भी बच गई महिला की जान! डॉक्टर भी रह गए हैरान
कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने किया बचाव
पूर्व शिक्षा मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर शुरू से ही महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को बंद करने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के बयानों से अभिभावकों में भ्रम फैला, जिससे प्रवेश प्रभावित हुए। वहीं भाजपा प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने बिना पर्याप्त योजना और जरूरत के कई अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोल दिए थे। वर्तमान सरकार ने जमीनी समीक्षा के आधार पर यह फैसला लिया है।