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खाकी पर दाग: एसपी ऑफिस का हेड कांस्टेबल निकला नशा तस्करों का मददगार, पुलिस टीम को करता था गुमराह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्री गंगानगर Published by: श्री गंगानगर ब्यूरो Updated Thu, 07 May 2026 12:41 PM IST
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सार

पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हो रही हेरोइन तस्करी के मामले में की जा रही जांच के दौरान एसपी ऑफिस की सीडीआर सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल पर तस्करों की मदद का आरोप है। उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

Sri Ganganagar News: Head Constable Suspended in Border Drug Smuggling Case, Accused of Misleading Police Team
नशा तस्करों की मदद करने के आरोप में हैड कांस्टेबल सस्पेंड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

श्री गंगानगर में पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए होने वाली हेरोइन तस्करी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कॉल डिटेल रिकॉर्ड सेल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल मंगतराम पर तस्करों की मदद करने और पुलिस टीम को गुमराह करने के आरोप लगे हैं। मामले में उसे निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।




जानकारी के अनुसार 26 मार्च को रावला थाना क्षेत्र के चक 7-8 एसकेएम की रोही में पाकिस्तानी ड्रोन से गिराई गई 10 किलो 830 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। इस मामले में जिला पुलिस और सीआईडी की संयुक्त टीम ने हरमेश, रणजीत सिंह, सोनू सिंह, गुरप्रीत सिंह और कीर्तन सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से 20 पैकेट हेरोइन बरामद हुई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई।
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गैलेंट्री प्रमोशन भी मिला

जांच के दौरान सामने आया कि ऑपरेशन के समय पुलिस टीम ने सीडीआर सेल से फोन लोकेशन और कॉल डिटेल मांगी थी लेकिन हेड कॉन्स्टेबल मंगतराम ने गलत जानकारी देकर टीम को भटकाने की कोशिश की। बाद में जांच में पता चला कि वह गिरफ्तार आरोपियों में से एक के साथ सीधे संपर्क में था।

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चूनावढ़ निवासी मंगतराम वर्ष 2013 में पुलिस सेवा में भर्ती हुआ था। वह साइबर क्राइम और तकनीकी जांच में विशेषज्ञ माना जाता था। कई ब्लाइंड मर्डर और सीमा पार तस्करी के मामलों को सुलझाने में उसकी अहम भूमिका रही थी। उसकी कार्यशैली से प्रभावित होकर तत्कालीन एसपी आनंद शर्मा ने उसे सीडीआर सेल में लगाया था।

अच्छे कामों के लिए मिल चुका है सम्मान

मंगतराम भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए होने वाली हेरोइन और हथियार तस्करी के मामलों में पुलिस को अहम इनपुट देता था। उत्कृष्ट कार्यों के चलते उसे डीजीपी डिस्क सम्मान और गैलेंट्री प्रमोशन भी मिल चुका था। नवंबर 2025 में उसे कॉन्स्टेबल से हेड कॉन्स्टेबल बनाया गया था। करीब 35 दिनों की जांच के बाद पुलिस को उसके खिलाफ ठोस सबूत मिले, जिसके बाद उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभागीय जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुवीर शर्मा को सौंपी गई है।


फिर बन गया तस्करों का साथी

जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर यादव ने बताया कि जांच में सामने आया है कि मंगतराम ने हेरोइन तस्करी मामले में रावला पुलिस टीम को गुमराह करने की कोशिश की थी। साथ ही वह पकड़े गए आरोपियों में से एक के संपर्क में भी था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि मंगतराम का संबंध अन्य तस्करी सिंडिकेट से भी था या नहीं। यदि जांच में और गंभीर तथ्य सामने आते हैं तो उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा सकती है।

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