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Kishau Dam project: किशाऊ बांध परियोजना से सिरमौर-शिमला के 2,092 लोग होंगे प्रभावित

जगत सिंह तोमर, संवाद न्यूज एजेंसी, शिलाई (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 18 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

टौंस (तमसा) नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को अब नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। 

2,092 people from Sirmaur and Shimla will be affected by the Kishau Dam project.
यहां प्रस्तावित है किशाऊ बांध परियोजना। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस (तमसा) नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को अब नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। करीब 86 वर्ष पुरानी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। परियोजना से हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला जिलों के 2,092 लोग प्रभावित होंगे। जानकारी के अनुसार, प्रभावित आठ गांवों में से छह गांव सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल और दो गांव शिमला जिले में स्थित हैं। किशाऊ बांध परियोजना का इतिहास काफी पुराना है। इसकी अवधारणा पहली बार वर्ष 1940 में सामने आई थी। इसके बाद तत्कालीन पंजाब सरकार ने वर्ष 1944-45 में प्रारंभिक सर्वेक्षण कराया। वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश सरकार ने दोबारा सर्वे शुरू किया और 1964 में परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की गई। इसके बावजूद लागत साझेदारी, जल बंटवारे और बिजली हिस्सेदारी जैसे मुद्दों के कारण यह परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।

236 मीटर ऊंचा होगा बांध, 660 मेगावाट बिजली पैदा होगी

परियोजना के वर्तमान स्वरूप के अनुसार टौंस नदी पर 236 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा, जिसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 660 मेगावाट होगी। परियोजना से सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में दोनों राज्यों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। हाल ही में लागत और लाभ साझेदारी के मुद्दे पर सहमति बनने के बाद परियोजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 17 गांव जलमग्न क्षेत्र में आएंगे, जिनमें उत्तराखंड के नौ और हिमाचल प्रदेश के आठ गांव शामिल हैं।

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डूब क्षेत्र में आएगी इतने हेक्टेयर भूमि

डूब क्षेत्र में उत्तराखंड की लगभग 1,452 हेक्टेयर और हिमाचल प्रदेश की करीब 1,498 हेक्टेयर भूमि आएगी। परियोजना दस्तावेजों के अनुसार पुनर्वास की आवश्यकता वाले लोगों की संख्या भी काफी अधिक है। उत्तराखंड के 3,406 और हिमाचल प्रदेश के 2,092 लोग प्रभावित होंगे। किशाऊ परियोजना को जहां विकास, सिंचाई और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, वहीं हजारों लोगों के विस्थापन, मुआवजे और प्रभावित गांवों के भविष्य को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे में परियोजना के क्रियान्वयन के साथ पारदर्शी और प्रभावी पुनर्वास नीति सुनिश्चित करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा। 

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