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Shimla News: कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ढहे डंगों का 80 फीसदी कार्य पूरा
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खास खबर
वर्ष-2025 की बरसात में 34 जगहों पर हुआ था भूस्खलन, कुमारहट्टी-धर्मपुर स्टेशन के बीच धंसी जमीन की जा रही समतल
25 जगहों में पुरानी ड्राइंग के अनुसार तैयार किए डंगें
आदित्य सोफत
शिमला। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर बरसात में ढहे डंगों का निर्माण और धंसी जगहों का कार्य 80 फीसदी तक पूरा कर दिया है। इससे अब ट्रेन की रफ्तार में भी इजाफा हुआ है। इससे पहले क्षतिग्रस्त क्षेत्रों से ट्रेन 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से निकलती थी। इससे कालका से शिमला और शिमला से कालका पहुंचने में करीब 15 से 20 मिनट का फर्क पड़ जाता था लेकिन अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को गंतव्य पहुंचने का समय कम हो जाएगा।
खास बात यह है कि डंगों के निर्माण के लिए पुरानी तकनीक का ही प्रयोग किया जा रहा है। पुरानी ड्राइंग से ही डंगें बनाए जा रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने दावा किया है कि विश्व धरोहर लाइन के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। विश्व धरोहर की पहचान कायम रखने के लिए पुरानी ड्राइंग के अनुसार ही मरम्मत कार्य किया जा रहा है ताकि पर्यटकों को पुराने इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके।
गौर रहे कि वर्ष 2025 की बरसात में कालका से शिमला के बीच 34 स्पॉट काफी खतरनाक हो गए थे। इस स्पॉट में कई जगहों पर बारिश के बाद लगे डंगे ढह गए थे जबकि कई जगहों पर ट्रैक के साथ लगती जमीन धंस गई थी। इससे काफी नुकसान रेलवे बोर्ड को हुआ था। इसके बाद रेलवे बोर्ड की ओर से योजना तैयार की गई। योजना के अनुसार रेलवे मंत्रालय ने बजट का आवंटन किया और निर्माण कार्य शुरू किया गया। कुमारहट्टी-धर्मपुर के बीच भी 200 मीटर का हिस्सा धंस गया था। इसके बाद से यहां पर ट्रेन करीब 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की चाल से निकलती है। वहीं सोलन के कोटी टनल के पास भी डंगा ढहने के कारण यहां गति पर ब्रेक लग जाती है। हालांकि इन जगहों पर अभी कार्य चला हुआ है। रेलवे बोर्ड ने बरसात से पहले कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अब तक 25 जगहों पर कार्य पूरा हो गया है। अब उन साइटों पर कार्य चला हुआ है जहां पर अधिक मात्रा में भूस्खलन हुआ था।
इनसेट
कालका-शिमला रेलवे ट्रैक के बीच बरसात में ढहे डंगें और धंसी जगहों का 80 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। नौ साइटों पर कार्य चला है। आगामी दिनों में कार्य पूरा हो जाएगा।
-नवीन कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधन, रेल मंडल अंबाला
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वर्ष-2025 की बरसात में 34 जगहों पर हुआ था भूस्खलन, कुमारहट्टी-धर्मपुर स्टेशन के बीच धंसी जमीन की जा रही समतल
25 जगहों में पुरानी ड्राइंग के अनुसार तैयार किए डंगें
आदित्य सोफत
शिमला। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर बरसात में ढहे डंगों का निर्माण और धंसी जगहों का कार्य 80 फीसदी तक पूरा कर दिया है। इससे अब ट्रेन की रफ्तार में भी इजाफा हुआ है। इससे पहले क्षतिग्रस्त क्षेत्रों से ट्रेन 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से निकलती थी। इससे कालका से शिमला और शिमला से कालका पहुंचने में करीब 15 से 20 मिनट का फर्क पड़ जाता था लेकिन अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को गंतव्य पहुंचने का समय कम हो जाएगा।
खास बात यह है कि डंगों के निर्माण के लिए पुरानी तकनीक का ही प्रयोग किया जा रहा है। पुरानी ड्राइंग से ही डंगें बनाए जा रहे हैं। रेलवे बोर्ड ने दावा किया है कि विश्व धरोहर लाइन के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। विश्व धरोहर की पहचान कायम रखने के लिए पुरानी ड्राइंग के अनुसार ही मरम्मत कार्य किया जा रहा है ताकि पर्यटकों को पुराने इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके।
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गौर रहे कि वर्ष 2025 की बरसात में कालका से शिमला के बीच 34 स्पॉट काफी खतरनाक हो गए थे। इस स्पॉट में कई जगहों पर बारिश के बाद लगे डंगे ढह गए थे जबकि कई जगहों पर ट्रैक के साथ लगती जमीन धंस गई थी। इससे काफी नुकसान रेलवे बोर्ड को हुआ था। इसके बाद रेलवे बोर्ड की ओर से योजना तैयार की गई। योजना के अनुसार रेलवे मंत्रालय ने बजट का आवंटन किया और निर्माण कार्य शुरू किया गया। कुमारहट्टी-धर्मपुर के बीच भी 200 मीटर का हिस्सा धंस गया था। इसके बाद से यहां पर ट्रेन करीब 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की चाल से निकलती है। वहीं सोलन के कोटी टनल के पास भी डंगा ढहने के कारण यहां गति पर ब्रेक लग जाती है। हालांकि इन जगहों पर अभी कार्य चला हुआ है। रेलवे बोर्ड ने बरसात से पहले कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अब तक 25 जगहों पर कार्य पूरा हो गया है। अब उन साइटों पर कार्य चला हुआ है जहां पर अधिक मात्रा में भूस्खलन हुआ था।
इनसेट
कालका-शिमला रेलवे ट्रैक के बीच बरसात में ढहे डंगें और धंसी जगहों का 80 फीसदी कार्य पूरा हो गया है। नौ साइटों पर कार्य चला है। आगामी दिनों में कार्य पूरा हो जाएगा।
-नवीन कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधन, रेल मंडल अंबाला