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Shimla News: एबीवीपी ने फीस वृद्धि और नीतियों पर उठाए सवाल
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फीस वृद्धि का कड़ा विरोध करते आंदोलन को चेताया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र संगठन एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कुलपति के एक वर्ष के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं तो हो रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
एबीवीपी ने हाल ही में की गई फीस वृद्धि का कड़ा विरोध करते हुए इसे छात्र विरोधी निर्णय बताया। संगठन का कहना है कि पहले से ही छात्र अधिक फीस दे रहे हैं, ऐसे में दोबारा फीस बढ़ाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने पाठ्यक्रमों को बंद कर नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं जो छात्रों के हित में नहीं हैं। प्रशासन के पुराने विभागों को आर्थिक रूप से लाभकारी न मानने के तर्क को खारिज करते हुए एबीवीपी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि ज्ञान प्रदान करना है और इसका व्यवसायीकरण स्वीकार्य नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी संगठन ने सवाल खड़े किए। एबीवीपी ने पूछा कि पिछले एक वर्ष में इन समझौतों से छात्रों को क्या वास्तविक लाभ मिला है। कितने छात्रों को अध्ययन, शोध या प्लेसमेंट के अवसर प्राप्त हुए और क्या उन्हें आधुनिक प्रयोगशालाओं व संसाधनों तक पहुंच मिली है या यह केवल प्रचार तक सीमित है। आपदा प्रबंधन के दावों पर भी एबीवीपी ने प्रशासन को घेरा। संगठन ने कहा कि पिछले वर्ष कुलपति ने भूस्खलन रोकने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की बात कही थी लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। विश्वविद्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर हाल ही में बड़ा भूस्खलन हुआ है, जो परिसर से करीब 400 मीटर की दूरी पर है। एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र संगठन एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कुलपति के एक वर्ष के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं तो हो रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।
एबीवीपी ने हाल ही में की गई फीस वृद्धि का कड़ा विरोध करते हुए इसे छात्र विरोधी निर्णय बताया। संगठन का कहना है कि पहले से ही छात्र अधिक फीस दे रहे हैं, ऐसे में दोबारा फीस बढ़ाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने पाठ्यक्रमों को बंद कर नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं जो छात्रों के हित में नहीं हैं। प्रशासन के पुराने विभागों को आर्थिक रूप से लाभकारी न मानने के तर्क को खारिज करते हुए एबीवीपी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि ज्ञान प्रदान करना है और इसका व्यवसायीकरण स्वीकार्य नहीं होगा।
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अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी संगठन ने सवाल खड़े किए। एबीवीपी ने पूछा कि पिछले एक वर्ष में इन समझौतों से छात्रों को क्या वास्तविक लाभ मिला है। कितने छात्रों को अध्ययन, शोध या प्लेसमेंट के अवसर प्राप्त हुए और क्या उन्हें आधुनिक प्रयोगशालाओं व संसाधनों तक पहुंच मिली है या यह केवल प्रचार तक सीमित है। आपदा प्रबंधन के दावों पर भी एबीवीपी ने प्रशासन को घेरा। संगठन ने कहा कि पिछले वर्ष कुलपति ने भूस्खलन रोकने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की बात कही थी लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। विश्वविद्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर हाल ही में बड़ा भूस्खलन हुआ है, जो परिसर से करीब 400 मीटर की दूरी पर है। एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि यदि फीस वृद्धि का निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।