AI Summit protest: रोहड़ू से गिरफ्तार सिद्धार्थ ने प्रदर्शन से पहले किया था टी-शर्ट का इंतजाम, जानें
रोहड़ू से गिरफ्तार तीन यूथ कांग्रेस नेताओं में एक भी हिमाचल का रहने वाला नहीं है। ये तीनों भागकर छिपने के लिए हिमाचल प्रदेश आए थे। जानें विस्तार से...
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भारतीय एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस ने जिन टी-शर्ट को उतारकर प्रदर्शन किया था, उन टी-शर्ट का इंतजाम शिमला के रोहड़ू से गिरफ्तार यूथ कांग्रेस नेता सिद्धार्थ ने किया था। बाकी दोनों आरोपी नेता एआई समिट के दौरान प्रदर्शन में शामिल थे। दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश की शिमला पुलिस के बीच बॉर्डर पर 24 घंटे चले हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद एआई समिट में प्रदर्शन के इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) के तीनों आरोपी नेताओं अरबाज अहमद खान, सौरभ और सिद्धार्थ को वीरवार सुबह दिल्ली ले आई। इनमेंं से एक भी हिमाचल प्रदेश का रहने वाला नहीं है। लेकिन सब शिमला जिले के चिड़गांव में एक होटल में रुके हुए थे। सब भागकर छिपने के लिए हिमाचल प्रदेश गए थे।
दिल्ली पुलिस की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी यूथ कांग्रेस नेता सौरभ और अरजाब एआई समिट के दौरान टी-शर्ट उतारकर प्रदर्शन करने में शामिल थे। ये प्रदर्शन करने के बाद पुलिस गिरफ्तारी से बच गए थे और दिल्ली से तीनों हिमाचल प्रदेश भाग गए। तीनों आरोपी दो दिन पहले दिल्ली आ गए थे और यूथ कांग्रेस की यूथ कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक में शामिल थे। यूथ कांग्रेस ने प्रदर्शन के लिए जो एआई समिट व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, उसके लिए एडमिन भी थे।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि एआई समिट प्रदर्शन मामले की जांच नई दिल्ली जिला पुलिस से लेकर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की इंटरस्टेट सेल को दी गई है। मगर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व अन्य यूनिटों को भी जांच में लगाया हुआ है। स्पेशल सेल की नई दिल्ली रेंज में तैनात एसीपी राहुल विक्रम व इंस्पेक्टर सतीश राणा की टीम आरोपियों को पकड़ने हिमाचल प्रदेश गई थी। इंस्पेक्टर सतीश राणा की टीम ने ही इनको वीरवार को पटियाला कोर्ट में पेश किया। देर शाम को तीनों आरोपी नेताओं का मेडिकल कराने के बाद अपराध शाखा की इंटर स्टेट सेल को सौंप दिया गया।
खुफिया एजेंसियों की चूक पर राज्य सरकार ने तल्खी दिखाई है। मुख्य सचिव ने राज्य पुलिस महानिदेशक से इस विषय पर लंबी चर्चा की है। दो दिन तक दिल्ली पुलिस यहां पर रुकती है और इसकी गुप्तचर एजेंसियों को भनक तक नहीं लगती। शिमला पुलिस को इसकी सूचना न मिलती तो राज्य सरकार को इस कार्रवाई की कानोंकान सूचना नहीं मिलती।