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हिमाचल: इंट्रा मस्कुलर इंजेक्ट होगी टिटनेस और डिप्थीरिया वैक्सीन, दाम भी होंगे कम

आदित्य सोफत, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 27 Feb 2026 11:14 AM IST
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सार

अप्रैल तक सीआरआई कसौली की ओर से 55 लाख डोज तैयार करने वाला है। ऐसे में स्वदेशी वैक्सीन आसानी से अस्पतालों में उपलब्ध हो जाएगी और यूआईपी के तहत लगवाने में भी आसानी होगी। 

Himachal: Tetanus and diphtheria vaccines will be injected intramuscularly, prices will also be low.
सीआरआई कसौली। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली की ओर से तैयार की गई स्वदेशी टिटनेस व डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन इंट्रा मस्कुलर इंजेक्ट होगी। लोग अपने सुविधा के अनुसार वैक्सीन को कंधे और हिप में इंजेक्ट करवा सकेंगे। इसके दाम भी न के बराबर हाेंगे। हालांकि, ये वैक्सीन प्रदेश सरकार की ओर खरीद की जाएगी और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) में शामिल की जाएगी। इसके बाद गर्भवती महिलाओं और व्यस्कों को बीमारी से शरीर में प्रतिरोध क्षमता तैयार होगी। इस बदलाव का उद्देश्य मातृ एवं नवजात शिशु टेटनस उन्मूलन और नियमित टीकाकरण गतिविधियों में हासिल की गई उपलब्धियों को बनाए रखते हुए, टिटनेस के साथ-साथ डिप्थीरिया से सुरक्षा को बढ़ाना और मजबूत करना है।

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वैक्सीन डोज की मात्रा में इजाफा
पहले बच्चों को वैक्सीन दी जाती थीं, लेकिन अब व्यस्क और गर्भवती महिलाओं को भी टीका लगाया जा सकेगा, क्योंकि वैक्सीन डोज की मात्रा में इजाफा किया है। अप्रैल तक सीआरआई कसौली की ओर से 55 लाख डोज तैयार करने वाला है। ऐसे में स्वदेशी वैक्सीन आसानी से अस्पतालों में उपलब्ध हो जाएगी और यूआईपी के तहत लगवाने में भी आसानी होगी। खास बात ये है कि संस्थान की ओर से वैक्सीन के लिए विपणन प्राधिकरण और निर्माण एवं बिक्री के लिए लाइसेंस प्राप्त किया। इसके बाद ही संस्थान की ओर से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया। यही नहीं टिटनेस और डिप्थीरिया (टीडी) की गुणवत्ता और विश्वसनीयता की जांच के बाद केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) कसौली ने भी हरी झंडी दे दी है।

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अब एक ही इंजेक्शन लगेगा
देश में टिटनेस और डिप्थीरिया का अब एक ही इंजेक्शन लगेगा। इसके लिए केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली ने वैक्सीन तैयार की। इससे पहले दोनों बीमारियों के लिए अलग-अलग टीका लगाया जाता था, लेकिन दोनों बीमारियों के लिए एक ही टीका तैयार किया जा सके इसके लिए सीआरआई कसौली के वैज्ञानिकों ने शोध करनी शुरू की। संस्थान में शोध कार्य 2016 में शुरू हो गया, लेकिन कोरोनाकाल के दौरान कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब दोनों बीमारियों में एंटीबॉडी बनाने में वैक्सीन असरदार सिद्ध हुई है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वैक्सीन को लाॅन्च किया है।

क्या है इंट्रा मस्कुलर इंजेक्शन
इंट्रा मस्कुलर इंजेक्शन, जिसे अंतःपेशीय इंजेक्शन भी कहते हैं। ये दवा देने का तरीका है, जिसमें दवा सीधे शरीर की किसी बड़ी मांसपेशी में दी जाती है। आमतौर पर इसे कंधे, जांघ या हिप की मांसपेशियों में दिया जाता है।

वैक्सीन को सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) में शामिल किया है। लोगों को वैक्सीन इंट्रा मस्कुलर लगेगी। अप्रैल में 55 लाख खुराक की आपूर्ति की जाएगी। इसका लक्ष्य रखा गया है और इस पर कार्य किया जा रहा है। -डॉ. यशवंत कुमार, सहायक निदेशक व जनसंपर्क अधिकारी, सीआरआई कसौली

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