{"_id":"69a1402082585581ae03e782","slug":"himalayan-bee-park-will-be-built-for-the-conservation-of-native-bees-2026-02-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"योजना: देसी मधुमक्खियों के संरक्षण के लिए बनेंगे हिमालयन बी पार्क, पर्यटकों और छात्रों के लिए बनेगा विशेष हब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योजना: देसी मधुमक्खियों के संरक्षण के लिए बनेंगे हिमालयन बी पार्क, पर्यटकों और छात्रों के लिए बनेगा विशेष हब
भारती शर्मा, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 27 Feb 2026 12:26 PM IST
विज्ञापन
सार
हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग द्वारा विशेष हिमालयन बी पार्क बनाए जा रहे हैं। विभाग ट्रायल के तौर पर ऐसे बी पार्क बना रहा है जिसमें मधुमक्खियों का संरक्षण होगा। पढ़ें पूरी खबर...
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन
विस्तार
हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग विलुप्त हो रहीं देसी मधुमक्खियों (एपीस सेराना) के संरक्षण के लिए नई पहल शुरू कर रहा है। विभाग की ओर से इसके लिए विशेष हिमालयन बी पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके लिए शिमला, कांगड़ा और ऊना जिले चयनित किए गए हैं।
Trending Videos
पहाड़ी मधुमक्खी स्थायी होने के कारण हर परिस्थिति के लिए बनी है। इसका संरक्षण अति आवश्यक हो गया है। इसको लेकर विभाग ट्रायल के तौर पर ऐसे बी पार्क बना रहा है जिसमें मधुमक्खियों का संरक्षण होगा। किसानों को इनके संरक्षण का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा और पार्क में फूलों के पौधे भी लगाए जाएंगे। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 100 एपीस सेराना मधुमक्खी के मिट्टी के मड हाइब बनाएं जाएंगे और 100 लकड़ी के बॉक्स एपीस मेलिफेरा मधुमक्खी के रखे जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके अलावा शहद और इससे बने प्राकृतिक उत्पाद भी यहां पर उपलब्ध होंगे। यह पार्क जहां एक ओर सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा, वहीं स्कूल और कॉलेज के बच्चों के लिए एक एजुकेशनल हब भी बनेगा। विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 1.20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की खेती हो रही है। एक हेक्टेयर क्षेत्र में सीजन के दौरान परागण के लिए चार बॉक्स की जरूरत होती है। वर्तमान में मधुमक्खियों की देसी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। बगीचों में परागण के लिए ज्यादातर इटालियन मधुमक्खियों (एपीस मेलिफेरा) का इस्तेमाल करते हैं। यह देसी मधुमक्खियों के मुकाबले ज्यादा शहद तैयार करती हैं। हालांकि गुणवत्ता मेें देसी एपीस सेराना का शहद ज्यादा बेहतर माना जाता है।
उद्यान विभाग की ओर से हिमालयन बी पार्क पीसीडीओ सुन्नी में बनाया जाएगा। वहीं कांगड़ा के पीसीडीओ गुम्मर और ऊना के पीसीडीओ सलोह में बनाया जाएगा। विभाग की ओर से नेशनल बी बोर्ड को प्रोजेक्ट बनाकर भेजा है।
कई फसलों में मधुमक्खियों की जरूरत होती है। आने वाले समय में यह मांग बढ़ने वाली है। हिमालयन बी पार्क सहायक सिद्ध होंगे। विदेशी मधुमक्खी 18 से 24 डिग्री तापमान में ज्यादा परागण करती हैं। वहीं देसी मधुमक्खी को परागण करने के लिए सबसे अच्छा तापमान 15 से 22 डिग्री सेल्सियस होता है। -डॉ. दलीप नरगेटा, मौन पालन विशेषज्ञ, उद्यान विभाग शिमला
हिमालयन बी पार्क बनाने का मुख्य उद्देश्य हिमालयी स्वदेशी मधुमक्खियों का संरक्षण, बागवानी और कृषि फसलों के लिए परागण सेवाओं में सुधार, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं की क्षमता में निर्माण करना है। 100 से अधिक बागवानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसी साल में यह पार्क बनकर तैयार हो जाएंगे। -डॉ. सतीश कुमार शर्मा, निदेशक, उद्यान विभाग हिमाचल प्रदेश