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हिमाचल प्रदेश: बौने पौधे उगाकर अमेरिका और न्यूजीलैंड के सेब को चुनौती, सुनील लिख रहे सेब बागवानी की नई इबारत
सुरेश शांडिल्य, क्यार-कमाह (ठियोग)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 27 Feb 2026 10:00 AM IST
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सार
जिला शिमला की ठियोग तहसील की ग्राम पंचायत क्यार के जई गांव के सुनील शर्मा विदेशों की तर्ज पर बौने पौधों वाली उच्च तकनीक से सेब की फसल उगाने के नए प्रयोग कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
जई गांव में बगीचा और जानकारी देते बागवान सुनील।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
बौने पौधे उगाकर हिमाचल के सेब बागवान अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपियन यूनियन के सेब को चुनौती दे रहे हैं। इन देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से कम कर 20 से 25 फीसदी तक हो गया है। ऐसे में पुरानी किस्मों की मांग घटने की आशंका से कई युवा बागवानों ने कमर कस ली है। वे एक बीघा में कम से कम 350 बौने पौधे उगा रहे हैं। एक पौधा 20 किलो के कार्टन की उपज दे सकता है। बड़े आकार के पौधे एक बीघा में 40 से 50 ही उगाए जा सकते हैं। ये प्रति पौधा औसत तीन कार्टन की उपज ही दे पाते हैं। यही नहीं, फलों के रंग और आकार में रात-दिन का फर्क रहता है।
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राजधानी शिमला से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है जिला शिमला की ठियोग तहसील की ग्राम पंचायत क्यार का जई गांव। यह गांव मशहूर पराला मंडी से भी महज छह किलोमीटर की दूरी पर है। जई निवासी सुनील शर्मा आशंकित हैं कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के सेब पर आयात शुल्क घटाने के बाद उनकी फसल को अच्छे रेट नहीं मिल पाएंगे, इसलिए वे विदेशों की तर्ज पर बौने पौधों वाली उच्च तकनीक से सेब की फसल उगाने के नए प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने एम 9 रूट स्टॉक पर 1700 पौधे इस तकनीक से उगाए हैं। इनमें रेड डिलिशियस और गाला दोनों ही श्रेणियों की किस्में हैं।
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क्यार गांव के निवासी दीपक मेहता भी इसी तकनीक से करीब सात-आठ साल से बागवानी कर रहे हैं। उनके पास 4000 बौने पौधे उगे हैं। दीपक मेहता के पिता दिलाराम का कहना है कि वह खुद राजनीति से विश्राम लेकर फुलटाइम बागवानी में जुट गए हैं। जई गांव के नरेंद्र शर्मा ने भी 300 पौधे लगा लिए हैं। समोल के सुरेश शर्मा ने भी बौने पौधे लगाए हैं। ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर का कहना है कि सरकारी स्तर पर ऐसे बागवानों की किस तरह से मदद की जाए। इस पर भी विचार किया जाएगा।
इन पौधों को उगाने में कश्मीर हिमाचल से आगे : कुनाल
इटली से बौने पौधे आयात कर बागवानों को उपलब्ध करवाने का काम कर रहे कुनाल चौहान का कहना है कि इन पौधों को उगाने में कश्मीर हिमाचल से आगे है, क्योंकि वहां की जमीन सीधी होने पर इन्हें लगाना ज्यादा आसान है। वहां सरकार बागवानों को अच्छा उपदान भी दे रही है। हिमाचल सरकार को भी इस दिशा में अधिक ध्यान चाहिए। वहीं, कमाह निवासी कुलदीप कांत शर्मा ने भी रूट स्टॉक पर 1800 पौधे लगा लिए हैं। वह एम 9 के अलावा एमएम 111, एमएम 106 जैसे रूट स्टॉक को कारगर मानते हैं। काशो के निवासी सेना से सेवानिवृत्त जोगेंद्र कंवर ने 500 पौधे उगाए हैं।
इटली से बौने पौधे आयात कर बागवानों को उपलब्ध करवाने का काम कर रहे कुनाल चौहान का कहना है कि इन पौधों को उगाने में कश्मीर हिमाचल से आगे है, क्योंकि वहां की जमीन सीधी होने पर इन्हें लगाना ज्यादा आसान है। वहां सरकार बागवानों को अच्छा उपदान भी दे रही है। हिमाचल सरकार को भी इस दिशा में अधिक ध्यान चाहिए। वहीं, कमाह निवासी कुलदीप कांत शर्मा ने भी रूट स्टॉक पर 1800 पौधे लगा लिए हैं। वह एम 9 के अलावा एमएम 111, एमएम 106 जैसे रूट स्टॉक को कारगर मानते हैं। काशो के निवासी सेना से सेवानिवृत्त जोगेंद्र कंवर ने 500 पौधे उगाए हैं।