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Shimla News: ओवरलोडिंग का तर्क देकर मुआवजे देने से नहीं बच सकती बीमा कंपनी
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खारिज किया कंपनी का तर्क, मुआवजा देने का दिया आदेश
अतिरिक्त यात्रियों का होना दुर्घटना का कारण नहीं
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने वाहन बीमा क्लेम से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन में ओवरलोडिंग होने मात्र से बीमा कंपनी किसी भी ग्राहक का वैध क्लेम पूरी तरह से खारिज नहीं कर सकती है।
आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 75 फीसदी राशि यानी 87,600 रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमे खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता संजौली निवासी नरेश चौहान को अपनी गाड़ी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 4,63,920 रुपये की आईडीवी वैल्यू पर बीमाकृत करवाई थी। 24 सितंबर 2021 को सिरमौर जिले के राजगढ़ के तहत कोटी मावगाह के पास यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिससे वाहन को भारी नुकसान पहुंचा। इस दुर्घटना की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी थी।
बीमा कंपनी ने 29 दिसंबर 2021 को यह कहते हुए क्लेम पूरी तरह खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन में तय क्षमता से अधिक लोग सवार थे जो पॉलिसी की शर्ताें का उल्लंघन है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि ओवरलोडिंग ही दुर्घटना का एकमात्र कारण थीं। यदि अतिरिक्त यात्रियों की मौजूदगी का दुर्घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है तो क्लेम को पूरी तरह से नहीं ठुकराया जा सकता।
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आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता द्वारा आईडीवी राशि का दावा करने के लिए कोई ठोस मरम्मत बिल पेश नहीं किए गए इसलिए बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेक्षक की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। सर्वेक्षक ने वाहन के नुकसान का आकलन 1,16,800 रुपये किया था। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 45 दिन में इस आदेश का पालन करने के आदेश दिए हैं।
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अतिरिक्त यात्रियों का होना दुर्घटना का कारण नहीं
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने वाहन बीमा क्लेम से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वाहन में ओवरलोडिंग होने मात्र से बीमा कंपनी किसी भी ग्राहक का वैध क्लेम पूरी तरह से खारिज नहीं कर सकती है।
आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 75 फीसदी राशि यानी 87,600 रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमे खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता संजौली निवासी नरेश चौहान को अपनी गाड़ी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 4,63,920 रुपये की आईडीवी वैल्यू पर बीमाकृत करवाई थी। 24 सितंबर 2021 को सिरमौर जिले के राजगढ़ के तहत कोटी मावगाह के पास यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिससे वाहन को भारी नुकसान पहुंचा। इस दुर्घटना की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी थी।
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बीमा कंपनी ने 29 दिसंबर 2021 को यह कहते हुए क्लेम पूरी तरह खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन में तय क्षमता से अधिक लोग सवार थे जो पॉलिसी की शर्ताें का उल्लंघन है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनी को यह साबित करना होगा कि ओवरलोडिंग ही दुर्घटना का एकमात्र कारण थीं। यदि अतिरिक्त यात्रियों की मौजूदगी का दुर्घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है तो क्लेम को पूरी तरह से नहीं ठुकराया जा सकता।
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आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता द्वारा आईडीवी राशि का दावा करने के लिए कोई ठोस मरम्मत बिल पेश नहीं किए गए इसलिए बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त अधिकृत सर्वेक्षक की रिपोर्ट को आधार बनाया गया। सर्वेक्षक ने वाहन के नुकसान का आकलन 1,16,800 रुपये किया था। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 45 दिन में इस आदेश का पालन करने के आदेश दिए हैं।