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Shimla News: केएनएच से गायनी ओपीडी शिफ्ट करने पर गरमाई सियासत, एआईडीडब्लूए का प्रदर्शन आज
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महिलाओं के विरोध के बाद राजनीतिक पार्टियों ने भी प्रदर्शन की दी चेतावनी
मार्क्सवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, निर्णय को तुरंत वापस लेने को कहा
भाजपा का आरोप, महिलाओं को परेशान कर सरकार कर रही व्यवस्था परिवर्तन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में पूरी तरह शिफ्ट करने की तैयारियों के बीच सियासत गरमा गई है। पार्टियों ने सरकार पर महिलाओं को परेशानी में डालने का आरोप लगाया है। साथ ही निर्णय की निंदा भी की है। सोमवार को मुद्दे पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की ओर से प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके लिए समिति की ओर से महिलाओं को कमला नेहरू अस्पताल में पूर्वाह्न 11:00 बजे पहुंचने का समय भी दे दिया है।
वहीं, मार्क्सवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र भी भेजा है। पत्र के माध्यम से तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग की है। इसी के साथ भाजपा ने भी महिलाओं को परेशानी में डालकर सरकार पर व्यवस्था परिवर्तन का आरोप लगाया है। प्रदर्शन करने की चेतावनी दे दी है। बता दें कि केएनएच में 16 अप्रैल से गायनी मरीजों को उपचार नहीं मिलेगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से पर्चियां न बनाने के आदेश भी दे दिए गए हैं। इसके बाद से महिलाओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। महिला मरीजों को अब आईजीएमसी में ही उपचार के लिए जाना पड़ेगा। हालांकि, इस निर्णय के विरोध में महिलाएं भी हैं और ओपीडी को केएनएच में ही सुचारु करने की मांग कर रही हैं। इससे पहले एक अप्रैल को गायनी ओपीडी को आईजीएमसी में शिफ्ट किया जा चुका है, लेकिन मरीजों को कोई दिक्कत न हो दोनों ओर ओपीडी चलाई जा रही हैं। अब आगामी दिनों में यहां से ओपीडी को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
उधर, कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार के निर्णय से आक्रोश है। इसके विरुद्ध महिलाएं आवाज उठ रही हैं। पार्टी भी निर्णय से सहमत नहीं है और सरकार से तुरंत निर्णय को वापस लेकर ओपीडी कमला नेहरू अस्पताल में ही चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी के ओपीडी परिसर में स्थान की उपलब्धता की कमी है और काफी भीड़भाड़ रहती है। ऐसे में काफी दिक्कतें पेश आएंगी।
इनसेट
कमला नेहरू अस्पताल को खत्म करने की साजिश : कर्णनंदा
भाजपा मीडिया संयोजक कर्णनंदा ने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल को खत्म करने की साजिश की जा रही है। सरकार सरेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। आईजीएमसी पहले ही क्षमता से अधिक भरा हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से 300 बिस्तर के अस्पताल को जबरन समायोजित किया जा रहा है। मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार ने न सुना तो मुद्दा न्यायालय तक पहुंचेगा।
इनसेट
अस्पताल ब्रिटिश काल से दे रहा सेवाएं
कमला नेहरू अस्पताल लेडी रीडिंग अस्पताल के नाम से जाना जाता था, जोकि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में सन 1924 में किया गया था। पिछली करीब एक सदी से सरकार की ओर से इस अस्पताल को प्रदेश के एकमात्र मातृ एवं शिशु अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है। अस्पताल में प्रदेशभर से महिलाएं प्रसूति एवं स्त्री रोग के साथ ही साथ प्रसवपूर्व तथा प्रसवोत्तर उपचार के लिए आती हैं। इस अस्पताल में 300 से 400 महिलाएं प्रतिदिन इलाज करवाने के लिए आती हैं और इसमें 300 बिस्तरों की व्यवस्था है।
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भाजपा का आरोप, महिलाओं को परेशान कर सरकार कर रही व्यवस्था परिवर्तन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में पूरी तरह शिफ्ट करने की तैयारियों के बीच सियासत गरमा गई है। पार्टियों ने सरकार पर महिलाओं को परेशानी में डालने का आरोप लगाया है। साथ ही निर्णय की निंदा भी की है। सोमवार को मुद्दे पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की ओर से प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके लिए समिति की ओर से महिलाओं को कमला नेहरू अस्पताल में पूर्वाह्न 11:00 बजे पहुंचने का समय भी दे दिया है।
वहीं, मार्क्सवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र भी भेजा है। पत्र के माध्यम से तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग की है। इसी के साथ भाजपा ने भी महिलाओं को परेशानी में डालकर सरकार पर व्यवस्था परिवर्तन का आरोप लगाया है। प्रदर्शन करने की चेतावनी दे दी है। बता दें कि केएनएच में 16 अप्रैल से गायनी मरीजों को उपचार नहीं मिलेगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से पर्चियां न बनाने के आदेश भी दे दिए गए हैं। इसके बाद से महिलाओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। महिला मरीजों को अब आईजीएमसी में ही उपचार के लिए जाना पड़ेगा। हालांकि, इस निर्णय के विरोध में महिलाएं भी हैं और ओपीडी को केएनएच में ही सुचारु करने की मांग कर रही हैं। इससे पहले एक अप्रैल को गायनी ओपीडी को आईजीएमसी में शिफ्ट किया जा चुका है, लेकिन मरीजों को कोई दिक्कत न हो दोनों ओर ओपीडी चलाई जा रही हैं। अब आगामी दिनों में यहां से ओपीडी को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
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उधर, कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार के निर्णय से आक्रोश है। इसके विरुद्ध महिलाएं आवाज उठ रही हैं। पार्टी भी निर्णय से सहमत नहीं है और सरकार से तुरंत निर्णय को वापस लेकर ओपीडी कमला नेहरू अस्पताल में ही चलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी के ओपीडी परिसर में स्थान की उपलब्धता की कमी है और काफी भीड़भाड़ रहती है। ऐसे में काफी दिक्कतें पेश आएंगी।
इनसेट
कमला नेहरू अस्पताल को खत्म करने की साजिश : कर्णनंदा
भाजपा मीडिया संयोजक कर्णनंदा ने बताया कि कमला नेहरू अस्पताल को खत्म करने की साजिश की जा रही है। सरकार सरेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। आईजीएमसी पहले ही क्षमता से अधिक भरा हुआ है, लेकिन सरकार की ओर से 300 बिस्तर के अस्पताल को जबरन समायोजित किया जा रहा है। मरीजों और नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अगर सरकार ने न सुना तो मुद्दा न्यायालय तक पहुंचेगा।
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अस्पताल ब्रिटिश काल से दे रहा सेवाएं
कमला नेहरू अस्पताल लेडी रीडिंग अस्पताल के नाम से जाना जाता था, जोकि एक ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसका निर्माण ब्रिटिश काल में सन 1924 में किया गया था। पिछली करीब एक सदी से सरकार की ओर से इस अस्पताल को प्रदेश के एकमात्र मातृ एवं शिशु अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है। अस्पताल में प्रदेशभर से महिलाएं प्रसूति एवं स्त्री रोग के साथ ही साथ प्रसवपूर्व तथा प्रसवोत्तर उपचार के लिए आती हैं। इस अस्पताल में 300 से 400 महिलाएं प्रतिदिन इलाज करवाने के लिए आती हैं और इसमें 300 बिस्तरों की व्यवस्था है।