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Shimla News: हत्या के मामले में जमानत याचिका की खारिज, जेल में ही रहना होगा
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नेरवा में सर्राफा कारोबारी की हत्या का मामला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नेरवा में दो साल पहले सामने आए सर्राफा कारोबारी की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और हत्या लूट के मकसद से की गई।
इसको देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने सर्राफा कारोबारी गगन देव सोनी हत्याकांड में आरोपी सोनू कुमार निवासी बिहार निवासी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला 19 फरवरी 2024 को नेरवा थाना शिमला में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। सर्राफा कारोबारी गगन देव सोनी का शव उनके घर के अंदर नीले पानी के टैंक में उल्टा मिला था। हाथ लोहे की तार से बंधे थे। घटनास्थल पर खून, पत्थर और तेज लोहे की रॉड भी पड़ी थी। पुलिस के अनुसार यह हत्या लूट के इरादे से की थी। पुलिस ने आरोपियों पर धारा आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 392 (लूट), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत केस दर्ज किया गया।
सोनू कुमार इस समय कैथू जेल, शिमला में न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं और प्राथमिक तौर पर आरोपी की संलिप्तता दिखती है। अभी 20 गवाह बाकी हैं (मुख्य चालान में 17 और पूरक चालान में 3)। इन गवाहों के बयान दर्ज होने हैं जो परिस्थितियों की कड़ी को साबित करेंगे। आरोपी बिहार के चंपारण जिले का रहने वाला है और प्रदेश का स्थायी निवास नहीं है। इसको देखते हुए उसके फरार होने की आशंका है।
गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। अपराध की गंभीरता, सजा की तीव्रता (आजीवन कारावास या फांसी) और न्याय प्रक्रिया बाधित होने का खतरा देखते हुए जमानत देना उचित नहीं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत देते समय अपराध की प्रकृति, साक्ष्यों की प्राथमिकता, गवाहों पर प्रभाव और फरार होने की आशंका जैसे कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है। याचिका में आरोपी का तर्क सोनू कुमार के वकील ने कहा कि आरोपी निर्दोष है और झूठे मामलों में फंसाया गया है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अब हिरासत का कोई फायदा नहीं है। आरोपी समाज का सम्मानजनक सदस्य है और सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है लेकिन अदालत ने इन तर्कों को इस चरण में पर्याप्त नहीं माना।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नेरवा में दो साल पहले सामने आए सर्राफा कारोबारी की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और हत्या लूट के मकसद से की गई।
इसको देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने सर्राफा कारोबारी गगन देव सोनी हत्याकांड में आरोपी सोनू कुमार निवासी बिहार निवासी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला 19 फरवरी 2024 को नेरवा थाना शिमला में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। सर्राफा कारोबारी गगन देव सोनी का शव उनके घर के अंदर नीले पानी के टैंक में उल्टा मिला था। हाथ लोहे की तार से बंधे थे। घटनास्थल पर खून, पत्थर और तेज लोहे की रॉड भी पड़ी थी। पुलिस के अनुसार यह हत्या लूट के इरादे से की थी। पुलिस ने आरोपियों पर धारा आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 392 (लूट), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत केस दर्ज किया गया।
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सोनू कुमार इस समय कैथू जेल, शिमला में न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं और प्राथमिक तौर पर आरोपी की संलिप्तता दिखती है। अभी 20 गवाह बाकी हैं (मुख्य चालान में 17 और पूरक चालान में 3)। इन गवाहों के बयान दर्ज होने हैं जो परिस्थितियों की कड़ी को साबित करेंगे। आरोपी बिहार के चंपारण जिले का रहने वाला है और प्रदेश का स्थायी निवास नहीं है। इसको देखते हुए उसके फरार होने की आशंका है।
गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। अपराध की गंभीरता, सजा की तीव्रता (आजीवन कारावास या फांसी) और न्याय प्रक्रिया बाधित होने का खतरा देखते हुए जमानत देना उचित नहीं। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत देते समय अपराध की प्रकृति, साक्ष्यों की प्राथमिकता, गवाहों पर प्रभाव और फरार होने की आशंका जैसे कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है। याचिका में आरोपी का तर्क सोनू कुमार के वकील ने कहा कि आरोपी निर्दोष है और झूठे मामलों में फंसाया गया है। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अब हिरासत का कोई फायदा नहीं है। आरोपी समाज का सम्मानजनक सदस्य है और सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है लेकिन अदालत ने इन तर्कों को इस चरण में पर्याप्त नहीं माना।