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हिमाचल: तारा देवी वन क्षेत्र में नए निजी निर्माण पर रोक, केएनएच मामले में जवाब तलब, जानें कोर्ट के फैसले

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 21 Jun 2026 11:41 AM IST
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सार

 अदालत को सरकार की ओर से बताया गया कि शिमला के ठीक सामने स्थित तारा माता हिल एरिया को नए ग्रीन एरिया के रूप में संरक्षित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। 

Ban on new private construction in Tara Devi forest area; response sought in KNH case; here are the High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने अवैध निर्माण को लेकर दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया। अदालत को सरकार की ओर से बताया गया कि शिमला के ठीक सामने स्थित तारा माता हिल एरिया को नए ग्रीन एरिया के रूप में संरक्षित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। इस क्षेत्र में अब कोई नया निजी निर्माण नहीं हो सकेगा। केवल राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से पुराने ढांचे का उसी तर्ज पर पुनर्निर्माण किया जा सकेगा। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्टेटस रिपोर्ट के बाद कहा कि यह वन क्षेत्र शिमला शहर के लिए एक प्रमुख ग्रीन लंग्स (हरे फेफड़ों) का काम करता है, इसे संरक्षित किया जाए।

सरकार ने स्पोर्ट्स रिपोर्ट में बताया कि शिमला प्लानिंग एरिया में 23 जुलाई 2024 को संशोधन की गई अधिसूचना के तहत 8 नए ग्रीन क्षेत्र बनाए गए हैं। इनमें रिट्रीट, मशोबरा, बैंड टुकड़ा आंद्री, शिव मंदिर आंद्री, ताल और गिरी, डीपीएफ खलीनी, बीसीएस मिस्ट चैंबर और परीमहल शामिल हैं। यहां पर निर्माण पर रोक है। स्टेटस रिपोर्ट में रीजनल प्लान (क्षेत्रीय योजना) की वर्तमान स्थिति भी अदालत के समक्ष रखी गई। बताया गया कि लाहौल-स्पीति रीजनल प्लान 24 मार्च 2026 को अधिसूचित और लागू किया गया है। सोलन योजना का काम अंतिम चरण में है। ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर इन जिलों के प्लान के लिए नई दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ समझौता हुआ है। यह कार्य 18 महीने में पूरा होगा। कांगड़ा, शिमला और कुल्लू ई-टेंडर के जरिए बोलियां आमंत्रित की गई थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से कंसल्टेंट्स को अभी तक काम नहीं सौंपा जा सका है।

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पहाड़ियों के कटान पर नीति इसी महीने होगी लागू

पहाड़ियों के कटान और संरक्षण से जुड़ी पॉलिसी गाइडलाइंस 2025 को अभी तक अधिसूचित न किए जाने पर सरकार ने आश्वासन दिया कि इस महीने के अंत तक आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। इसके अलावा, बेतरतीब निर्माण रोकने के लिए तैयार की गई रूरल एरिया डेवलपमेंट गाइडलाइंस 2023 (ग्रामीण क्षेत्र विकास दिशा-निर्देश) को भी अदालत के 2023 के आदेशों के अनुरूप संशोधित कर जल्द अधिसूचित किया जाएगा।

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केएनएच के गायनी विभाग की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कमला नेहरू राज्य अस्पताल (केएनएच) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग(गायनी) को आईजीएमसी शिमला स्थानांतरित करने के मामले में राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने केएनएच के चिकित्सा अधीक्षक को भी मामले में प्रतिवादी बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने केएनएच की गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल को हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि वर्तमान में केएनएच में विभाग के लिए कितना क्षेत्र उपलब्ध है और आईजीएमसी में प्रस्तावित स्थान उसकी तुलना में पर्याप्त है या नहीं। सुनवाई के दौरान आम जनता की ओर से एक प्रतिवेदन भी अदालत के समक्ष रखा गया। इसमें विभाग की शिफ्टिंग को नीतिगत और पूर्व नियोजित फैसला बताते हुए कई सवाल उठाए गए हैं। प्रतिवेदन में कहा गया है कि केएनएच में ओपीडी, लैब और आधुनिक ऑपरेशन थियेटरों के विकास पर हाल ही में करीब 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसे में विभाग के स्थानांतरण से यह निवेश व्यर्थ हो सकता है।

प्रतिवेदन में यह भी कहा गया कि आईजीएमसी का प्रस्तावित क्षेत्र छायादार और अपेक्षाकृत ठंडे हिस्से में स्थित है, जहां सर्दियों में ब्लैक आइस बनने से मरीजों और तीमारदारों के लिए पहुंचना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके विपरीत केएनएच अपेक्षाकृत गर्म और सुरक्षित स्थान पर स्थित है। आवेदन में यह आरोप भी लगाया गया है कि विभाग को स्थानांतरित कर केएनएच परिसर की जमीन विधायकों के आवास निर्माण के लिए खाली कराने की योजना है। हाईकोर्ट ने सरकार को इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने और यह बताने के निर्देश दिए हैं कि क्या इस संबंध में कोई दीर्घकालिक योजना बनाई गई है। साथ ही सरकार को यह भी बताना होगा कि शिफ्टिंग के बाद केएनएच में खाली होने वाले क्षेत्र का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा। सुनवाई के दौरान आईजीएमसी प्रशासन की ओर से पेश स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया कि गायनो विभाग का स्थानांतरण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट के अनुसार आईजीएमसी के कुछ सुपर-स्पेशियलिटी विभागों को चमियाणा स्थित अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर-स्पेशियलिटीज में स्थानांतरित किया जा चुका है, जिससे खाली हुई जगह को गायनो विंग के लिए चिह्नित किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।
 

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