फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   court decession

Shimla News: वाहन में बार-बार खराबी और सर्विस में लापरवाही पर 45 हजार मुआवजा देने के आदेश

Sun, 09 Aug 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
court decession
वाहन खरीदने के कुछ समय बाद से ही लगातार ओवरहीटिंग और इंजन की समस्याएं आईं
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, शिमला ने वाहन में लगातार आने वाली तकनीकी खराबी और समय पर उसका सही समाधान न किए जाने के एक मामले में वाहन निर्माता कंपनी और उसके अधिकृत डीलरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इसे सेवा में बड़ी कोताही और अनुचित व्यावसायिक व्यवहार करार देते हुए कंपनी व संबंधित पक्षों को उपभोक्ता को 40,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
ठियोग निवासी शिकायतकर्ता नितेश कुमार ने अपने आजीविका और स्वरोजगार के लिए 2 जुलाई 2020 को 14,00,000 रुपये की लागत से वाहन खरीदा था। वाहन खरीदने के कुछ समय बाद से ही इसमें गंभीर समस्याएं आनी शुरू हो गई थीं। शिकायतकर्ता के अनुसार, दिसंबर 2021 से वाहन में इंजन खराब होने, बार-बार ओवरहीट होने और ऑयल लीकेज जैसी दिक्कतें लगातार बनी रहीं। वाहन को ठीक कराने के लिए उसे कई बार शिमला, सोलन और अन्य अधिकृत वर्कशॉप ले जाना पड़ा था। स्थिति यहां तक बिगड़ गई कि सफर के दौरान गाड़ी कई बार बीच रास्ते (जैसे कुफरी, जीरकपुर और निगुलसारी, किन्नौर) में खराब हुई जिसके चलते उपभोक्ता को भारी-भरकम क्रेन का खर्च और रिपेयर बिलों के रूप में हजारों रुपये चुकाने पड़े थे। बार-बार की खराबी के कारण वाहन लंबे समय तक खड़ा रहा जिससे परेशान होकर उपभोक्ता समय पर फाइनेंस कंपनी की किस्तें भी नहीं चुका पाया और वाहन को फाइनेंसर की ओर से जब्त कर लिया गया था। वीई कमर्शियल व्हीकल लिमिटेड और अधिकृत डीलरों ने अपनी दलील में कहा कि वाहन का उपयोग कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और इसमें कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था। उन्होंने दावा किया कि खराबी केवल सामान्य टूट-फूट या रखरखाव में कमी के कारण आई थी और शिकायतकर्ता पर रिपेयर के कुछ पैसे भी बकाया हैं। आयोग ने माना कि भले ही मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित न हुआ हो, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि वाहन खरीदने के तुरंत बाद से ही उसे बार-बार वर्कशॉप ले जाना पड़ा था।
विज्ञापन

अधिकृत डीलर और निर्माता वाहन की कमियों को पूरी तरह से ठीक करने में असफल रहे जो कि स्पष्ट रूप से सेवा में कमी को दर्शाता है। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, शिमला के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि वाहन फाइनेंसर की ओर से दोबारा कब्जा कर लिया गया है और उसकी सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए वाहन बदलने या पूरे पैसे रिफंड करने का आदेश तो नहीं दिया जा सकता, परंतु उपभोक्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना, वित्तीय नुकसान और कानूनी लड़ाई के लिए हर्जाना मिलना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed