{"_id":"6a7896d85460558d44069a2f","slug":"wrong-billing-in-shimla-shimla-news-c-19-sml1002-767365-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: अचानक डिफाल्टरों पर मेहरबान हो गया नगर निगम का नया सॉफ्टवेयर, देने लगा डिस्काउंट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: अचानक डिफाल्टरों पर मेहरबान हो गया नगर निगम का नया सॉफ्टवेयर, देने लगा डिस्काउंट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला एक्सक्लूसिव....
पहले स्लैब दर के कारण जारी हो गए थे गलत बिल, अब डिफाल्टरों को डिस्काउंट, दूसरी बार रोकने पड़े बिल
नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को फिर लिखा पत्र, कहा-डिफाल्टरों को बंद करो दस फीसदी का डिस्काउंट
अशोक चौहान
शिमला। शहरवासियों को गलत स्लैब दर पर टैक्स के दोगुने बिल जारी करने वाला नगर निगम का नया सॉफ्टवेयर अब अचानक डिफाल्टरों पर मेहरबान हो गया। कई साल से बिल न चुकाने वाले इन भवनमालिकों को टैक्स के नए बिल में पेनल्टी की जगह दस फीसदी डिस्काउंट मिलने लगा।
मामला जैसे ही अधिकारियों के ध्यान में आया कि तुरंत इन भवनमालिकों को टैक्स बिल जारी करने पर रोक लगानी पड़ी। इसके साथ ही शहरी विकास विभाग को भी पत्र लिख दिया गया है। इसमें टैक्स डिफाल्टरों को आम भवनमालिकों की तरह एकमुश्त बिल भुगतान पर मिलने वाला दस फीसदी का डिस्काउंट हटाने को कहा गया है। नगर निगम के अनुसार शिमला शहर में करीब 35 हजार भवनमालिक हैं। इनमें चार हजार से ज्यादा भवनमालिक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक पिछला टैक्स जमा नहीं करवाया है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्होंने कई साल से टैक्स भरा ही नहीं है। नगर निगम इन्हें कई नोटिस भी जारी कर चुका है। अब बिजली-पानी काटने की भी तैयारी चल रही है। नियमों के अनुसार नगर निगम की ओर से जारी होने वाले टैक्स बिल का 15 दिन में एकमुश्त भुगतान करने पर 10 फीसदी डिस्काउंट दिया जाता है। नगर निगम के अनुसार यह डिस्काउंट सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है जिन्होंने पिछला टैक्स जमा कर रखा है। जिन लोगों ने पिछला बिल जमा नहीं किया है, उन्हें यह डिस्काउंट नहीं मिलता। जो लोग पिछला टैक्स नहीं दे रहे, उनकी बिल राशि में हर माह एक फीसदी ब्याज और साल में दो बार पांच फीसदी पेनल्टी राशि भी जुड़ती है। हालांकि, इन सबके उलट नए सॉफ्टवेयर में अचानक डिस्काउंट मिलने लगा।
नए सॉफ्टवेयर में फिर करना होगा बदलाव
नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को पत्र लिखकर ऐसे लोगों के बिल से डिस्काउंट हटाने को कहा है, जिनमें पिछली बिल राशि एरियर के तौर पर शामिल है। यह दूसरा मौका है जब टैक्स के लिए तैयार किए गए नए उपयोग सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा। नगर निगम के अनुसार जब तक सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होगा, तब तक डिफाल्टरों को टैक्स के बिल जारी नहीं होंगे। अन्य लोगों को बिल जारी करने की प्रक्रिया चलती रहेगी।
विज्ञापन
काेट्स
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि सॉफ्टवेयर अपडेट करने को कहा गया है। इसके बाद ही डिफाल्टरों को बिल जारी होंगे।
सरकार ने तैयार करवाया है नया सॉफ्टवेयर
शिमला शहर में टैक्स के बिल जारी करने के लिए पहले नगर निगम के बनाए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा था। इस साल से सरकार ने शहरी विकास विभाग के माध्यम से उपयोग सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस सॉफ्टवेयर में पहले भी गड़बड़ी सामने आ चुकी है। लोगों को गलत स्लैब दर लागू होने के कारण दोगुना बिल जारी हो गए थे। इसके बाद बिल जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। अब इस गड़बड़ी को दूर किया तो डिफाल्टरों को डिस्काउंट मिलने लगा। अब इसे भी दुरुस्त करने को कहा गया है। इसके अलावा 200 वर्ग मीटर से ज्यादा आकार वाले भवनों की स्लैब दर भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
पहले स्लैब दर के कारण जारी हो गए थे गलत बिल, अब डिफाल्टरों को डिस्काउंट, दूसरी बार रोकने पड़े बिल
नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को फिर लिखा पत्र, कहा-डिफाल्टरों को बंद करो दस फीसदी का डिस्काउंट
अशोक चौहान
शिमला। शहरवासियों को गलत स्लैब दर पर टैक्स के दोगुने बिल जारी करने वाला नगर निगम का नया सॉफ्टवेयर अब अचानक डिफाल्टरों पर मेहरबान हो गया। कई साल से बिल न चुकाने वाले इन भवनमालिकों को टैक्स के नए बिल में पेनल्टी की जगह दस फीसदी डिस्काउंट मिलने लगा।
मामला जैसे ही अधिकारियों के ध्यान में आया कि तुरंत इन भवनमालिकों को टैक्स बिल जारी करने पर रोक लगानी पड़ी। इसके साथ ही शहरी विकास विभाग को भी पत्र लिख दिया गया है। इसमें टैक्स डिफाल्टरों को आम भवनमालिकों की तरह एकमुश्त बिल भुगतान पर मिलने वाला दस फीसदी का डिस्काउंट हटाने को कहा गया है। नगर निगम के अनुसार शिमला शहर में करीब 35 हजार भवनमालिक हैं। इनमें चार हजार से ज्यादा भवनमालिक ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक पिछला टैक्स जमा नहीं करवाया है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्होंने कई साल से टैक्स भरा ही नहीं है। नगर निगम इन्हें कई नोटिस भी जारी कर चुका है। अब बिजली-पानी काटने की भी तैयारी चल रही है। नियमों के अनुसार नगर निगम की ओर से जारी होने वाले टैक्स बिल का 15 दिन में एकमुश्त भुगतान करने पर 10 फीसदी डिस्काउंट दिया जाता है। नगर निगम के अनुसार यह डिस्काउंट सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलता है जिन्होंने पिछला टैक्स जमा कर रखा है। जिन लोगों ने पिछला बिल जमा नहीं किया है, उन्हें यह डिस्काउंट नहीं मिलता। जो लोग पिछला टैक्स नहीं दे रहे, उनकी बिल राशि में हर माह एक फीसदी ब्याज और साल में दो बार पांच फीसदी पेनल्टी राशि भी जुड़ती है। हालांकि, इन सबके उलट नए सॉफ्टवेयर में अचानक डिस्काउंट मिलने लगा।
विज्ञापन
नए सॉफ्टवेयर में फिर करना होगा बदलाव
नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को पत्र लिखकर ऐसे लोगों के बिल से डिस्काउंट हटाने को कहा है, जिनमें पिछली बिल राशि एरियर के तौर पर शामिल है। यह दूसरा मौका है जब टैक्स के लिए तैयार किए गए नए उपयोग सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा। नगर निगम के अनुसार जब तक सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होगा, तब तक डिफाल्टरों को टैक्स के बिल जारी नहीं होंगे। अन्य लोगों को बिल जारी करने की प्रक्रिया चलती रहेगी।
विज्ञापन
काेट्स
नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि सॉफ्टवेयर अपडेट करने को कहा गया है। इसके बाद ही डिफाल्टरों को बिल जारी होंगे।
सरकार ने तैयार करवाया है नया सॉफ्टवेयर
शिमला शहर में टैक्स के बिल जारी करने के लिए पहले नगर निगम के बनाए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा था। इस साल से सरकार ने शहरी विकास विभाग के माध्यम से उपयोग सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इस सॉफ्टवेयर में पहले भी गड़बड़ी सामने आ चुकी है। लोगों को गलत स्लैब दर लागू होने के कारण दोगुना बिल जारी हो गए थे। इसके बाद बिल जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। अब इस गड़बड़ी को दूर किया तो डिफाल्टरों को डिस्काउंट मिलने लगा। अब इसे भी दुरुस्त करने को कहा गया है। इसके अलावा 200 वर्ग मीटर से ज्यादा आकार वाले भवनों की स्लैब दर भी दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।