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Shimla News: वैशाखी पर्व पर स्नान और दान का विशेष महत्व
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सूर्य देव मेष राशि में करेंगे प्रवेश, नई फसल के साथ भगवान नारायण और विष्णु की होगी पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में 14 अप्रैल को मनाए जाने वाले वैशाखी पर्व को लेकर श्रद्धा और उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए इसे मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।
राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन का सबसे उत्तम अभिजीत मुहूर्त सुबह 9:31 बजे शुरू होगा जिसमें सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष संक्रांति 14 अप्रैल को पुण्य काल सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:55 बजे तक रहेगी। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों पर स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। पंडित ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों या घर में नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद भगवान सूर्य नारायण और विष्णु की पूजा करें। इस दौरान भगवान को नई फसल या अन्न अर्पित करें।
वैशाखी पर्व मुख्य रूप से रबी फसल की कटाई का प्रतीक है और किसानों के लिए खुशियों का अवसर लेकर आता है। इस दौरान शहर के गुरुद्वारों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस कारण यह पर्व धार्मिक आस्था और गौरव का प्रतीक माना जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर में 14 अप्रैल को मनाए जाने वाले वैशाखी पर्व को लेकर श्रद्धा और उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए इसे मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।
राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि इस दिन का सबसे उत्तम अभिजीत मुहूर्त सुबह 9:31 बजे शुरू होगा जिसमें सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष संक्रांति 14 अप्रैल को पुण्य काल सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:55 बजे तक रहेगी। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदियों और तीर्थ स्थलों पर स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। पंडित ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों या घर में नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद भगवान सूर्य नारायण और विष्णु की पूजा करें। इस दौरान भगवान को नई फसल या अन्न अर्पित करें।
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वैशाखी पर्व मुख्य रूप से रबी फसल की कटाई का प्रतीक है और किसानों के लिए खुशियों का अवसर लेकर आता है। इस दौरान शहर के गुरुद्वारों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा। ऐतिहासिक दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस कारण यह पर्व धार्मिक आस्था और गौरव का प्रतीक माना जाता है।