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Shimla News: कंडम हो रही गाड़ियों पर लाखों फूंकने के मामले पर गरमाई सियासत, निशाने पर निगम
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गाड़ियों पर किए गए खर्च का सदन और आरटीआई में नगर निगम ने दिया है अलग-अलग जवाब
कौन सा जवाब सही, इस पर पार्षदों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कूड़ा उठाने वाली नगर निगम की पुरानी गाड़ियों पर लाखों रुपये खर्च करने के मामले में सियासत गरमा गई है। नगर निगम सदन और आरटीआई में दिए गए इन गाड़ियों के खर्च से जुड़े रिकॉर्ड पर निगम प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है।
निगम प्रशासन ने नगर निगम सदन में जो जवाब दिया है, उसके उलट आरटीआई में दी गई सूचना में इन गाड़ियों पर किए गए खर्च को ज्यादा दिखाया गया है। ऐसे में कौन सा रिकॉर्ड सही है, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस पार्षदों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्षद सिम्मी नंदा का कहना है कि यदि सदन में दी गई जानकारी गलत है तो इस पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। सदन में गलत जानकारी देना सही नहीं है। यह जनता के साथ धोखा है। भाजपा पार्षद आशा शर्मा ने कहा कि नगर निगम सदन में सही जानकारी दी जानी चाहिए। पार्षद जनता से जुड़े कामों को लेकर सवाल पूछते हैं। यदि उन पर गलत जानकारी दी गई तो इससे सदन की गरिमा खत्म हो सकती है। कहा कि नगर निगम सदन में इस मामले को उठाया जाएगा।
यह है पूरा मामला
शहर में कूड़ा ढोने वाली नगर निगम की पांच गाड़ियों पर अगस्त 2025 से मार्च 2026 तक हुए खर्चे का भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने नगर निगम सदन में रिकॉर्ड मांगा था। निगम ने इसके जवाब में बताया कि कुल 2.86 लाख रुपये पांच गाड़ियों की मरम्मत पर खर्च किए गए हैं। वहीं जब आरटीआई से इन पांच गाड़ियों के खर्च का ब्योरा लिया गया तो यह अलग था। इसमें यह खर्च करीब चार लाख रुपये दर्शाया गया है। आरटीआई में दी गई सूचना में अभी खर्च के सभी बिल भी नहीं दिए गए हैं जिस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाए हैं। अब निगम प्रशासन ने संबंधित अधिकारी को पूरे बिल देने के निर्देश दिए हैं।
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कौन सा जवाब सही, इस पर पार्षदों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कूड़ा उठाने वाली नगर निगम की पुरानी गाड़ियों पर लाखों रुपये खर्च करने के मामले में सियासत गरमा गई है। नगर निगम सदन और आरटीआई में दिए गए इन गाड़ियों के खर्च से जुड़े रिकॉर्ड पर निगम प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है।
निगम प्रशासन ने नगर निगम सदन में जो जवाब दिया है, उसके उलट आरटीआई में दी गई सूचना में इन गाड़ियों पर किए गए खर्च को ज्यादा दिखाया गया है। ऐसे में कौन सा रिकॉर्ड सही है, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस पार्षदों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्षद सिम्मी नंदा का कहना है कि यदि सदन में दी गई जानकारी गलत है तो इस पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। सदन में गलत जानकारी देना सही नहीं है। यह जनता के साथ धोखा है। भाजपा पार्षद आशा शर्मा ने कहा कि नगर निगम सदन में सही जानकारी दी जानी चाहिए। पार्षद जनता से जुड़े कामों को लेकर सवाल पूछते हैं। यदि उन पर गलत जानकारी दी गई तो इससे सदन की गरिमा खत्म हो सकती है। कहा कि नगर निगम सदन में इस मामले को उठाया जाएगा।
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यह है पूरा मामला
शहर में कूड़ा ढोने वाली नगर निगम की पांच गाड़ियों पर अगस्त 2025 से मार्च 2026 तक हुए खर्चे का भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने नगर निगम सदन में रिकॉर्ड मांगा था। निगम ने इसके जवाब में बताया कि कुल 2.86 लाख रुपये पांच गाड़ियों की मरम्मत पर खर्च किए गए हैं। वहीं जब आरटीआई से इन पांच गाड़ियों के खर्च का ब्योरा लिया गया तो यह अलग था। इसमें यह खर्च करीब चार लाख रुपये दर्शाया गया है। आरटीआई में दी गई सूचना में अभी खर्च के सभी बिल भी नहीं दिए गए हैं जिस पर आरटीआई कार्यकर्ता ने सवाल उठाए हैं। अब निगम प्रशासन ने संबंधित अधिकारी को पूरे बिल देने के निर्देश दिए हैं।