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Shimla News: पहली बार होमस्टे-होटलों से शुल्क वसूलेंगी पंचायतें, गांव के विकास को मिलेगी रफ्तार
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होमस्टे से दो हजार और होटलों से पांच हजार रुपये प्रति शुल्क वसूलने की तैयारी
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजना पर काम कर रहा जिला प्रशासन, मशोबरा विकासखंड से होगी शुरुआत
शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक निर्माण होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हो रहा होटलों और होमस्टे का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी से सटी पंचायतें पहली बार अब अपने क्षेत्र में खुले होमस्टे और होटलों से शुल्क वसूलेंगी। इस शुल्क वसूली से होने वाली आय से गांव में विकास को रफ्तार मिलेगी। पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन उनकी आय के स्रोत सृजित करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा ने इस प्रस्ताव पर उपायुक्त अनुपम कश्यप से चर्चा भी कर कर ली है। जल्द ही इसे लागू करने की अधिसूचना जारी हो सकती है। इस योजना को मशोबरा ब्लॉक से शुरू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत पंचायतों में बने होमस्टे और होटलों से वार्षिक आधार पर शुल्क वसूलने की योजना है। होमस्टे से दो हजार रुपये प्रति वर्ष और होटलों से पांच हजार रुपये प्रति शुल्क वसूलने की तैयारी है। इससे पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं होगी। पंचायतें अपना फंड तैयार करेंगी और विकास कार्यों के लिए खर्च करेंगी। अभी पंचायतों से एनओसी लेकर इन इलाकों में होमस्टे और होटल तो खुल रहे हैं लेकिन इनसे कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। शिमला शहर और इसके आसपास नगर निगम के क्षेत्र में अत्यधिक निर्माण कार्य के कारण अब बड़ी संख्या में आसपास की पंचायतों में होमस्टे और होटलों का निर्माण हो रहा है। इस वजह से पंचायत के क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा होमस्टे और होटलों से निकलने वाले कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की चिंताएं भी बढ़ गई है। यही वजह है कि जिला प्रशासन अब इन क्षेत्रों में संचालित हो रहे होटलों और होमस्टे से वार्षिक शुल्क वसूलने की योजना पर विचार कर रहा है। इससे पंचायतों के लिए आमदनी के स्रोत उत्पन्न होंगे, वहीं पंचायतों में व्यावसायिक संस्थानों की वजह से निकलने वाले कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी काम किया जाएगा।
शहर से सटी पंचायतों में लागू होगी व्यवस्था
मशोबरा विकासखंड की ज्यादातर पंचायतें शहर से सटी हैं। यहां वर्तमान में सैकड़ों की संख्या में होटल और होमस्टे संचालित हो रहे हैं। इसको देखते हुए प्रारंभिक चरण में इस योजना को यहां से लागू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। जिला प्रशासन पंचायतों के आमदनी के स्रोतों को सृजित करने पर लंबे समय से जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है जिससे विकास के कार्यों के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट पर निर्भरता कम हो सके। इसको लेकर डेवलपमेंट प्लान में भी पंचायतों से सुझाव मांगे गए हैं। इसमें पंचायतों को दुकानों के निर्माण से लेकर अन्य स्रोतों से आय अर्जित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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होमस्टे से दो हजार और होटलों से पांच हजार रुपये प्रति शुल्क वसूलने की तैयारी
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योजना पर काम कर रहा जिला प्रशासन, मशोबरा विकासखंड से होगी शुरुआत
शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक निर्माण होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हो रहा होटलों और होमस्टे का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी से सटी पंचायतें पहली बार अब अपने क्षेत्र में खुले होमस्टे और होटलों से शुल्क वसूलेंगी। इस शुल्क वसूली से होने वाली आय से गांव में विकास को रफ्तार मिलेगी। पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन उनकी आय के स्रोत सृजित करने की योजना पर काम कर रहा है।
इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा ने इस प्रस्ताव पर उपायुक्त अनुपम कश्यप से चर्चा भी कर कर ली है। जल्द ही इसे लागू करने की अधिसूचना जारी हो सकती है। इस योजना को मशोबरा ब्लॉक से शुरू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके तहत पंचायतों में बने होमस्टे और होटलों से वार्षिक आधार पर शुल्क वसूलने की योजना है। होमस्टे से दो हजार रुपये प्रति वर्ष और होटलों से पांच हजार रुपये प्रति शुल्क वसूलने की तैयारी है। इससे पंचायतों के पास विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं होगी। पंचायतें अपना फंड तैयार करेंगी और विकास कार्यों के लिए खर्च करेंगी। अभी पंचायतों से एनओसी लेकर इन इलाकों में होमस्टे और होटल तो खुल रहे हैं लेकिन इनसे कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। शिमला शहर और इसके आसपास नगर निगम के क्षेत्र में अत्यधिक निर्माण कार्य के कारण अब बड़ी संख्या में आसपास की पंचायतों में होमस्टे और होटलों का निर्माण हो रहा है। इस वजह से पंचायत के क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा होमस्टे और होटलों से निकलने वाले कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की चिंताएं भी बढ़ गई है। यही वजह है कि जिला प्रशासन अब इन क्षेत्रों में संचालित हो रहे होटलों और होमस्टे से वार्षिक शुल्क वसूलने की योजना पर विचार कर रहा है। इससे पंचायतों के लिए आमदनी के स्रोत उत्पन्न होंगे, वहीं पंचायतों में व्यावसायिक संस्थानों की वजह से निकलने वाले कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी काम किया जाएगा।
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शहर से सटी पंचायतों में लागू होगी व्यवस्था
मशोबरा विकासखंड की ज्यादातर पंचायतें शहर से सटी हैं। यहां वर्तमान में सैकड़ों की संख्या में होटल और होमस्टे संचालित हो रहे हैं। इसको देखते हुए प्रारंभिक चरण में इस योजना को यहां से लागू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। जिला प्रशासन पंचायतों के आमदनी के स्रोतों को सृजित करने पर लंबे समय से जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है जिससे विकास के कार्यों के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मिलने वाले बजट पर निर्भरता कम हो सके। इसको लेकर डेवलपमेंट प्लान में भी पंचायतों से सुझाव मांगे गए हैं। इसमें पंचायतों को दुकानों के निर्माण से लेकर अन्य स्रोतों से आय अर्जित करने पर जोर दिया जा रहा है।
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