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हिमाचल: डीजी सेट से स्वयं उपयोग की बिजली पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूलना अवैध, हाईकोर्ट ने ठहराया गैर कानूनी

Sat, 08 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 08 Aug 2026 05:00 AM IST
सार

 हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि उपभोक्ता की ओर से अपने उपयोग के लिए डीजल जनरेटिंग (डीजी) सेट से उत्पन्न बिजली पर राज्य सरकार बिजली शुल्क वसूल नहीं कर सकती है।  अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के अन्य प्रावधान पूर्ववत लागू रहेंगे।

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Himachal: Levying electricity duty on self-consumed power from DG sets is illegal; High Court delivers verdict
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि उपभोक्ता की ओर से अपने उपयोग के लिए डीजल जनरेटिंग (डीजी) सेट से उत्पन्न बिजली पर राज्य सरकार बिजली शुल्क वसूल नहीं कर सकती है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश बिजली (शुल्क) अधिनियम, 2009 की धारा 3(1)(11) के उस प्रावधान को रद्द कर दिया है, जिसके तहत यह शुल्क लगाया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के अन्य प्रावधान पूर्ववत लागू रहेंगे।

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अदालत ने अधिनियम की मूल चार्जिंग धारा-3 का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट किया कि बिजली शुल्क केवल दो परिस्थितियों में लगाया जा सकता है। पहला, जब बिजली का उपभोग बोर्ड, लाइसेंसधारी, बिजली व्यापारी या उत्पादक कंपनी की ओर से किया जाए। दूसरा, जब इन्हीं संस्थाओं की ओर से किसी उपभोक्ता को बिजली की आपूर्ति की जाए। अदालत ने कहा कि उपभोक्ता की ओर से अपने डीजी सेट से स्वयं के उपयोग के लिए उत्पादित बिजली इन दोनों श्रेणियों में नहीं आती। इसलिए उस पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लगाने का कोई वैधानिक आधार नहीं है।

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सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि उद्योग और उपभोक्ता स्वेच्छा से डीजल जनरेटर नहीं चलाते, बल्कि बिजली कटौती के दौरान उत्पादन और कार्य प्रभावित न हो, इसलिए मजबूरी में उनका उपयोग करते हैं। अदालत ने कहा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित न कर पाने की स्थिति में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालना न्यायसंगत नहीं है। याचिकाकर्ता ने डीजल जनरेटर से स्वयं उत्पादित बिजली पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की वैधता को चुनौती दी थी। वहीं, 1 सितंबर 2023 की उस अधिसूचना को भी चुनौती दी थी, जिसके तहत डीजी सेट से उत्पादित बिजली पर शुल्क 30 पैसे प्रति यूनिट से बढ़ाकर 45 पैसे प्रति यूनिट किया गया था।

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सरकार और बोर्ड की दलील - हरित ऊर्जा-राजस्व बढ़ाने के लिए लगाया शुल्क
राज्य सरकार और बिजली बोर्ड ने दलील दी गई कि हरित ऊर्जा और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से यह शुल्क लगाया गया था। कहा गया कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची 53 के तहत राज्य को ऐसा कर लगाने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि विधायी अधिकार होने के बावजूद जब तक अधिनियम की मूल धारा में स्व उत्पादित और स्व उपभोग की बिजली पर शुल्क का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तब तक नियमों या अधिसूचनाओं के जरिये ऐसा शुल्क नहीं लगाया जा सकता।

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