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Shoolini University Controversy: मम्मी-पापा अपना ख्याल रखना... बस यही अंतिम शब्द बोल फंदे से झूल गया नितिन

संवाद न्यूज एजेंसी, रोहड़ू। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 02 Apr 2026 11:48 AM IST
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सार

शूलिनी विश्वविद्यालय में प्रताड़ित होने से घर का इकलौता चिराग बुझ गया। वहीं, परिजनों में विश्वविद्यालय पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। खासकर अवनी नाम की महिला मैडम का नाम सामने आ रहा है। जानें पूरा मामला...

Himachal News In Hindi Shoolini University Student Nitin Chauhan Suicide Case
शूलिनी विश्वविद्यालय/छात्र नितिन चौहान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

मम्मी-पापा अपना ख्याल रखना, यह अंतिम शब्द शूलिनी विश्वविद्यालय के छात्र नितिन चौहान ने फंदा लगाने से पहले अपने माता-पिता को फोन पर कहे थे। जॉब प्लेसमेंट के नाम पर हुए धोखे और विश्वविद्यालय में प्रताड़ित होने से घर का इकलौता चिराग बुझ गया। नितिन के दाह संस्कार के बाद बुधवार को घर पर शुद्धि संस्कार की रस्म रखी गई थी।

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शूलिनी विश्वविद्यालय प्रबंधन से करीब आठ लोग बुधवार को नितिन के घर पर शाम तक मौजूद रहे। वहीं, नितिन के पिता कल्याण सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि शूलिनी विश्वविद्यालय में उनके बेटे को प्रताड़ित किया गया। जॉब प्लेसमेंट के नाम पर धोखा किया गया। नितिन को इतना तनाव दिया गया कि उसे आत्महत्या करनी पड़ी। आज अपना बेटा खोया है।

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भविष्य में किसी दूसरे के बेटे के साथ ऐसा न हो, इसके लिए मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बेटे ने अपनी आपबीती सुसाइड नोट में लिख रखी है। विश्वविद्यालय में उसे अवनी नाम की मैम तंग करती थी, जिसका जिक्र नितिन ने सुसाइड नोट में भी किया है। नितिन की माता प्रोमिला चौहान ने बताया कि मेरा बेटा हमेशा बोलता था कि शूलिनी विश्वविद्यालय में अवनी नाम की मैम उसे प्रताड़ित करती है। नितिन को बोला तू सब कुछ छोड़कर घर आ जा, लेकिन वह एमबीए की पढ़ाई करने के बाद अच्छी नौकरी करना चाहता था। अपने पांवों पर खड़ा होना चाहता है। नितिन शूलिनी विश्वविद्यालय में एमबीए की शिक्षा प्राप्त कर रहा था।

जॉब प्लेसमेंट के नाम पर उसे 50 हजार प्रति माह के पैकेज पर किसी कंपनी में भेजा गया, जहां उससे पोछा तक लगवाया गया। साफ-सफाई करवाई गई। सैलरी भी काटकर मात्र 25 हजार रुपये ही दी गई। नितिन से देर रात ढाई बजे तक काम करवाया जा रहा था, जिससे वह तनावग्रस्त हो गया था। इसके बाद नितिन ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के समक्ष भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसे वहां भी प्रताड़ित ही किया गया। 

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