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हिमाचल: औद्योगिक विकास में पिछड़े लाहौल स्पीति, शिमला, कुल्लू और किन्नौर, रिपोर्ट में खुलासा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 18 Jun 2026 06:00 AM IST
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सार

औद्योगिक विकास के बावजूद जिलों के बीच असमानता बढ़ी है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश और आधारभूत ढांचे का लाभ मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित रहा। 

Himachal: Report reveals Lahaul Spiti, Shimla, Kullu, and Kinnaur lag behind in industrial development.
उद्योग(सांकेतिक)। - फोटो : संवाद
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विस्तार

 हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास के बावजूद जिलों के बीच असमानता बढ़ी है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश और आधारभूत ढांचे का लाभ मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा जिलों तक सीमित रहा। दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकीं। समग्र औद्योगिक विकास सूचकांक में सोलन जिला पहले स्थान पर रहा। इसके बाद सिरमौर, ऊना, कांगड़ा और मंडी का स्थान ठीक ठीक है। जिला चंबा सबसे निचले पायदान पर पाया गया। कुल्लू, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला भी अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में शामिल रहे। समय के साथ जिलों के बीच औद्योगिक विकास की खाई और चौड़ी हुई है। क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने के लिए सरकार को लक्षित नीतियां अपनाने का सुझाव दिया है।


 

यह खुलासा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर टेक सिंह और शोधार्थी आत्मा राम ने अपने अध्ययन में किया है। इस शोध में राज्य के विभिन्न जिलों में औद्योगिक विकास के स्तर और क्षेत्रीय असमानताओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन ने हिमाचल प्रदेश सरकार के उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग किया। औद्योगिक विकास के 14 संकेतकों का विश्लेषण किया। इसका उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास के भौगोलिक वितरण का आकलन करना था। सोलन जिला लगातार औद्योगिक विकास में अग्रणी रहा। वहीं, चंबा जिला सबसे पीछे रहा। सिरमौर, ऊना, कांगड़ा और मंडी भी शीर्ष जिलों में शामिल थे।

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संतुलित औद्योगिक विकास के लिए सुझाव

अध्ययन में सुझाव दिए गए हैं कि पिछड़े जिलों में आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाए और उद्योग विशिष्ट क्लस्टर विकसित किए जाएं। साथ ही निवेश को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज और लक्षित नीतियां लागू की जाएं। उनका मानना है कि इससे राज्य में संतुलित और समावेशी औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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उद्योगपति निवेश करते समय परिवहन लागत, सस्ती मजदूरी, श्रमिकों के ठहरने की सुविधाएं और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं को प्राथमिकता देते हैं। सरकार प्रदेश में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।- हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री

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