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Shimla News: आईजीएमसी की क्रस्ना लैब में तीसरे दिन मिल रही रिपोर्ट, सरकारी में मेजर टेस्ट बंद
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दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
सरकारी लैब में एक सप्ताह से आरएफटी, एलएफटी, किडनी, लीवर फंक्शन, शुगर समेत 15 टेस्ट नहीं हो रहे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में मेजर टेस्ट बंद हैं, वहीं क्रस्ना लैब से मरीजों को तीसरे दिन रिपोर्ट मिल रही है। इस कारण मरीजों को उपचार करवाने में दिक्कतें पेश आनी शुरू हो गई हैं। सही समय पर मरीज उपचार नहीं करवा पा रहे हैं। ज्यादा परेशानी दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को हो रही है जिन्हें रोजाना रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्रस्ना लैब प्रबंधन की मानें तो सरकारी लैब में मेजर टेस्ट बंद होने के बाद से टेस्ट फ्लो काफी बढ़ गया है। इस कारण रिपोर्ट बनाने में देरी हो रही है।
अस्पताल की सरकारी लैब में एक सप्ताह से बायोकेमेस्ट्री मशीन बंद पड़ी है। बताया जा रहा है कि टेस्ट करने के लिए आवश्यक रिजेंट यानी किट्स खत्म हो गई हैं। इसके बाद से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। करीब 15 टेस्ट ऐसे हैं जो अस्पताल में नहीं हो रहे हैं। इनमें लीवर फंक्शन टेस्ट एलएफटी, आरएफटी, कैल्शियम, प्रोटीन और बिलीरुबिन, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, शुगर, यूरिक एसिड, टीपीओ, पीएसए, थायराइड, एचबीए1सी, इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन बी12, विटामिन डी थ्री टेस्ट शामिल हैं। इन टेस्ट को करवाने के लिए मरीजों को क्रस्ना लैब में जाना पड़ रहा है। क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पहले तो लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। रक्त सैंपल देने के बाद अगले दिन बुलाया जाता है। बुलाने के बाद टेस्ट की रिपोर्ट नहीं मिल रही है। आईजीएमसी में न केवल जिला शिमला बल्कि पूरे प्रदेश से मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं।
इनसेट
निशुल्क टेस्ट के भी देने पड़ रहे पैसे
अस्पताल की सरकारी लैब में सुविधा न मिलने के कारण कई मरीज निजी लैब में जा रहे हैं। सरकारी लैब में निशुल्क में होने वाले टेस्ट के निजी में पैसे देने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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सरकारी लैब में एक सप्ताह से आरएफटी, एलएफटी, किडनी, लीवर फंक्शन, शुगर समेत 15 टेस्ट नहीं हो रहे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज की सरकारी लैब में मेजर टेस्ट बंद हैं, वहीं क्रस्ना लैब से मरीजों को तीसरे दिन रिपोर्ट मिल रही है। इस कारण मरीजों को उपचार करवाने में दिक्कतें पेश आनी शुरू हो गई हैं। सही समय पर मरीज उपचार नहीं करवा पा रहे हैं। ज्यादा परेशानी दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को हो रही है जिन्हें रोजाना रिपोर्ट के लिए अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्रस्ना लैब प्रबंधन की मानें तो सरकारी लैब में मेजर टेस्ट बंद होने के बाद से टेस्ट फ्लो काफी बढ़ गया है। इस कारण रिपोर्ट बनाने में देरी हो रही है।
अस्पताल की सरकारी लैब में एक सप्ताह से बायोकेमेस्ट्री मशीन बंद पड़ी है। बताया जा रहा है कि टेस्ट करने के लिए आवश्यक रिजेंट यानी किट्स खत्म हो गई हैं। इसके बाद से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। करीब 15 टेस्ट ऐसे हैं जो अस्पताल में नहीं हो रहे हैं। इनमें लीवर फंक्शन टेस्ट एलएफटी, आरएफटी, कैल्शियम, प्रोटीन और बिलीरुबिन, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, शुगर, यूरिक एसिड, टीपीओ, पीएसए, थायराइड, एचबीए1सी, इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन बी12, विटामिन डी थ्री टेस्ट शामिल हैं। इन टेस्ट को करवाने के लिए मरीजों को क्रस्ना लैब में जाना पड़ रहा है। क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को पहले तो लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। रक्त सैंपल देने के बाद अगले दिन बुलाया जाता है। बुलाने के बाद टेस्ट की रिपोर्ट नहीं मिल रही है। आईजीएमसी में न केवल जिला शिमला बल्कि पूरे प्रदेश से मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं।
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निशुल्क टेस्ट के भी देने पड़ रहे पैसे
अस्पताल की सरकारी लैब में सुविधा न मिलने के कारण कई मरीज निजी लैब में जा रहे हैं। सरकारी लैब में निशुल्क में होने वाले टेस्ट के निजी में पैसे देने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।