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हिमाचल प्रदेश: जयराम ठाकुर बोले- मोदी सरकार में हिमाचल को पांच गुना ज्यादा सहायता, असली अन्याय UPA काल में हुआ

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 19 Feb 2026 12:57 PM IST
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सार

शिमला में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान जयराम ठाकुर ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर कांग्रेस और सुक्खू सरकार पर निशाना साधा। पढ़ें पूरी खबर...

Leader of Opposition Jairam Thakur press conference in Shimla
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद से लगातार केंद्र सरकार से भरपूर सहयोग ले रही है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां कर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मुद्दा यह नहीं है कि केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का उल्लेख हुआ या नहीं, बल्कि असली प्रश्न यह है कि जब यह ग्रांट हिमाचल प्रदेश को मिल रही थी तब भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का रोना रो रही थी।

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'आरडीजी बंद होने के लिए जिम्मेदार वर्तमान कांग्रेस सरकार'
जयराम ठाकुर ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिश के बाद यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो वर्तमान कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रभावी वित्तीय प्रबंधन करे और प्रदेश को आगे ले जाए। अपनी नाकामियों का दोष केंद्र या पूर्व सरकारों पर डालना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि यदि वह स्थिति संभाल नहीं पा रही है तो जनता के सामने सच्चाई रखे।

'मुख्यमंत्री ने पेश किया गलत तथ्य'
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होना परंपरा और नियम दोनों का हिस्सा है, लेकिन सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर राजनीतिक प्रस्ताव लाने पर आमादा थी। विपक्ष ने चर्चा में भाग लेकर तीन साल के कार्यकाल की नाकामियों को तथ्यों सहित रखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान कई तथ्य गलत ढंग से प्रस्तुत किए गए और जब विपक्ष ने उन्हें सुधारने के लिए बोलने का अवसर मांगा तो अनुमति नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में विरोध स्वरूप भाजपा विधायकों को सदन के वेल में जाना पड़ा।

'राजनीति करने के बजाए समाधान पर ध्यान देना चाहिए'
जयराम ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश के हितों के साथ खड़ी है और प्रदेश हित सर्वोपरि है। यदि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद हुई है तो सरकार को यह भी समझना चाहिए कि अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने में उसकी विफलता भी इसका कारण हो सकती है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक भाषणों से आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए ठोस नीति और वित्तीय अनुशासन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं बार-बार यह स्वीकार कर चुके हैं कि आने वाले समय में आर्थिक संकट बढ़ सकता है, गारंटियां पूरी करना कठिन होगा, विकास कार्य प्रभावित होंगे, कर्मचारियों के वेतन-पेंशन और डीए पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में संकट का राजनीतिकरण करने के बजाय समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

'यूपीए सरकार के दौरान हुआ हिमाचल के साथ अन्याय'
वित्त आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान 12वें और 13वें वित्त आयोग में हिमाचल प्रदेश को लगभग ₹18,000 करोड़ के आसपास अनुदान मिला, जबकि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 14वें और 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग ₹89,254 करोड़ की सहायता मिली, जो पांच गुना से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि हिमाचल के साथ वास्तविक अन्याय कब हुआ। पिछले चालीस साल में हिमाचल को मात्र 21 हजार करोड़ मिले पीएम मोदी के कार्यकाल में 89 हजार करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान मिला। यह भी रिकॉर्ड है। हिमाचल के लिए केंद्र सरकार लगातार बढ़ चढ़कर सहयोग कर रही है और सुक्खू सरकार आभार तो दूर सिर्फ कोसने का काम कर रही है। 

'आंकड़ों पर विश्वास कैसे करे जनता?'
18 फरवरी 2026 को विधानसभा में एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने ₹23,000 करोड़ ऋण लिया और ₹26,000 करोड़ चुकाया, जबकि अगले ही दिन कहा कि ₹35,400 करोड़ ऋण लिया और ₹27,043 करोड़ चुकाया। इसके अलावा विधानसभा में 26 अगस्त 2025 को विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि उनकी सरकार ने 26830 करोड़ कर्ज लिया और 8253 करोड़ रुपए वापस किए। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मूलधन और ब्याज चुकाने के लिए 10200 करोड़ रुपए प्रावधान का प्रावधान किया गया है। विरोधी आंकड़ों पर जनता कैसे विश्वास करे।

'मुख्यमंत्री द्वारा झूठ के महल बनाना शोभा नहीं देता'
उन्होंने कहा कि यदि सात महीने में ₹19,000 करोड़ से अधिक ऋण लेकर उसे चुकता करने का दावा किया जा रहा है। जब बजट में प्रावधान ही नहीं हैं तो वह कर्ज कहां से चुकाया गया। इस कदर सड़क से सदन तक मुख्यमंत्री द्वारा झूठ के महल बनाना उन्हें शोभा नहीं देता। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऋण लेना कोई असामान्य बात नहीं है और सभी सरकारें आवश्यकता अनुसार ऋण लेती हैं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग ₹40,672 करोड़ ऋण लिया गया और लगभग ₹38,276 करोड़ वापस किया गया, यानी अधिकांश ऋण की अदायगी की गई।

'भाजपा सहयोग के लिए हमेशा तैयार'
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के पास अंतिम वित्तीय वर्ष में लगभग 6500 करोड़ की उधार सीमा उपलब्ध थी, फिर भी उसे नहीं लिया गया। सत्ता में आते ही सुक्खू सरकार ने 6900 करोड़ रुपए का कर्ज लिया और उसे भाजपा के खाते में डाल दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियों के बावजूद सरकार संकट का माहौल क्यों बना रही है। अंत में जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन यदि प्रदेश की आर्थिक स्थिति का गलत चित्र प्रस्तुत कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया गया तो भाजपा तथ्य और आंकड़ों के साथ जवाब देगी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को विपक्ष का सहयोग चाहिए तो उसे व्यवहार भी जिम्मेदार और लोकतांत्रिक रखना होगा।

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