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Shimla News: स्कूली किताबों पर कवर के नाम से अभिभावकों से लूट
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केंद्रीय स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों पर दुकानदार वसूल रहे 30 रुपये अतिरिक्त, एक सेट के दाम में 300 रुपये तक बढ़ोतर
किताब पर मूल्य 65 रुपये दुकानदार वसूल रहे हैं 90 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में दुकानदार अभिभावकों से बच्चों की स्कूली किताबों पर लगने वाले कवर के नाम 30 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। दुकानदार केंद्रीय स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों पर कवर के नाम पर प्रति किताब 30 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। इस कारण अभिभावकों पर 100 से लेकर 300 रुपये तक अधिक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही जिनके एक से अधिक बच्चे हैं उन पर और अधिक बोझ पड़ रहा है। ऐसे में अभिभावकों ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि न तो स्कूल प्रशासन की तरफ से इसे अनिवार्य किया है और न ही अभिभावक कवर के साथ किताबों की मांग कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि हैरानी इस बात है कि दुकानदार बिना कवर वाली किताबें न होने की बात करते हैं और कहते हैं कि बिना कवर वाली किताबों के लिए विशेष रूप से मंगवानी पड़ेगी। राजधानी के लोअर बाजार में शुक्रवार को किताबों की खरीदारी करने आए अभिभावक विकास और नरेंद्र ने बताया कि वह छठी कक्षा की किताबें खरीदने आए थे। इस दौरान उन्होंने दुकानदार से किताबों के लिए पूछा तो उन्होंने कवर वाली किताब दे दीं। पूछा कि बिना कवर वाली नहीं हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि वो मंगवानी पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि किताब पर 65 रुपये अधिकतम विक्रय मूल्य है और दुकानदार 90 रुपये प्रति किताब वसूल रहे हैं। दुकानदार कवर के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अधिकतम समर्थन मू्ल्य ज्यादा पर किताबें बेच रहे हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि स्कूलों की किताबें पहले से ही महंगी हैं, ऊपर से कवर के नाम पर वसूली कर रहे हैं। यह अभिभावकों से खुली लूट है, प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए। वहीं केंद्रीय विद्यालय जतोग के प्रधानाचार्य मोहित गुप्ता ने कहा कि स्कूल की तरफ से ऐसे कोई आदेश नहीं आए हैं। विद्यार्थी अपनी इच्छा अनुसार कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं।
शिक्षा को बनाया दिया व्यापार : मेहरा
छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह अभिभावकों से खुली लूट है। कवर के नाम पर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब व्यापार बन गया है। निजी स्कूलों में पहले से ही फीस और अन्य चीजों के नाम पर अभिभावकों से खुली लूट हो रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा लगातार महंगी हो रही है। अब किताबों के कवर के नाम पर दुकानदार भी पैसे वसूल रहे हैं। मेहरा ने मांग करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग को इस पर रोक लगानी चाहिए।
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किताब पर मूल्य 65 रुपये दुकानदार वसूल रहे हैं 90 रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में दुकानदार अभिभावकों से बच्चों की स्कूली किताबों पर लगने वाले कवर के नाम 30 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। दुकानदार केंद्रीय स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली एनसीईआरटी की किताबों पर कवर के नाम पर प्रति किताब 30 रुपये अधिक वसूल रहे हैं। इस कारण अभिभावकों पर 100 से लेकर 300 रुपये तक अधिक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही जिनके एक से अधिक बच्चे हैं उन पर और अधिक बोझ पड़ रहा है। ऐसे में अभिभावकों ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं।
अभिभावकों का कहना है कि न तो स्कूल प्रशासन की तरफ से इसे अनिवार्य किया है और न ही अभिभावक कवर के साथ किताबों की मांग कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि हैरानी इस बात है कि दुकानदार बिना कवर वाली किताबें न होने की बात करते हैं और कहते हैं कि बिना कवर वाली किताबों के लिए विशेष रूप से मंगवानी पड़ेगी। राजधानी के लोअर बाजार में शुक्रवार को किताबों की खरीदारी करने आए अभिभावक विकास और नरेंद्र ने बताया कि वह छठी कक्षा की किताबें खरीदने आए थे। इस दौरान उन्होंने दुकानदार से किताबों के लिए पूछा तो उन्होंने कवर वाली किताब दे दीं। पूछा कि बिना कवर वाली नहीं हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि वो मंगवानी पड़ेगी।
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उन्होंने बताया कि किताब पर 65 रुपये अधिकतम विक्रय मूल्य है और दुकानदार 90 रुपये प्रति किताब वसूल रहे हैं। दुकानदार कवर के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अधिकतम समर्थन मू्ल्य ज्यादा पर किताबें बेच रहे हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि स्कूलों की किताबें पहले से ही महंगी हैं, ऊपर से कवर के नाम पर वसूली कर रहे हैं। यह अभिभावकों से खुली लूट है, प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए। वहीं केंद्रीय विद्यालय जतोग के प्रधानाचार्य मोहित गुप्ता ने कहा कि स्कूल की तरफ से ऐसे कोई आदेश नहीं आए हैं। विद्यार्थी अपनी इच्छा अनुसार कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं।
शिक्षा को बनाया दिया व्यापार : मेहरा
छात्र-अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यह अभिभावकों से खुली लूट है। कवर के नाम पर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब व्यापार बन गया है। निजी स्कूलों में पहले से ही फीस और अन्य चीजों के नाम पर अभिभावकों से खुली लूट हो रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा लगातार महंगी हो रही है। अब किताबों के कवर के नाम पर दुकानदार भी पैसे वसूल रहे हैं। मेहरा ने मांग करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग को इस पर रोक लगानी चाहिए।