सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Power cut in New Shimla Sector 3 and 4 today

Shimla News: आईजीएमसी में जल्द शुरू हो सकता है बोनमैरो और सेल ट्रांसप्लांट

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
Power cut in New Shimla Sector 3 and 4 today
विज्ञापन
एक्सकलूसिव


पीजीआई के हेमेटोलॉजी विभाग ने आईजीएमसी को दिया एमओयू का प्रस्ताव, दोनों संस्थान मिलकर करेंगे काम
पीजीआई में एक संस्था देती है 10 लाख का विशेष फंड
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान एवं अस्पताल (पीजीआई) चंडीगढ़ के हेमेटोलॉजी विभाग ने मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) को एमओयू करने का प्रस्ताव दिया है।

अस्पताल प्रबंधन के साथ अगर एमओयू हो जाता है, तो बोनमैरो और सेल ट्रांसप्लांट करवाने वाले मरीजों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। पीजीआई में एक संस्था ऐसे मरीजों के लिए दस लाख रुपये का फंड मुहैया करवाती है। ऐसे में अगर आईजीएमसी के साथ एमओयू साइन होता है यह सुविधा प्रदेश के मरीजों को भी मिलेगी। मरीजों के लिए संस्था से बजट भी आसानी से मिल सकेगा। अभी तक बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों के लाखों रुपये खर्च होते हैं। एमओयू के बाद ट्रांसप्लांट करवाने वाले मरीजों की देखभाल भी बढ़ जाएगी। पीजीआई की ओर से प्रस्ताव इसलिए दिया है क्योंकि हिमाचल से कैंसर के कई मरीज उपचार करवाने के लिए चंडीगढ़ जाते हैं। इनमें से कई मरीज ऐसे होते हैं जो ट्रांसप्लांट का खर्च नहीं उठा पाते। ऐसे में अगर एमओयू साइन हो जाता है, तो संस्था के जरिये मरीजों का उपचार करवाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह संस्था पीजीआई को रक्त संबंधित हीमोफिलिया समेत बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए स्पेशल 10 लाख रुपये का बजट उपलब्ध करवाती है। इस फंड से हिमाचल से आने वाले मरीजों को भी लाभ दिया जा सकता है। इससे देखभाल और उपचार व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ के हेमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज मल्होत्रा ने कहा कि आईजीएमसी के कैंसर विभाग के विभागाध्यक्ष को एमओयू का प्रस्ताव दिया है। यह कार्य मरीजों के हित के लिए किया गया है।
विज्ञापन
Trending Videos


पीजीआई में हर साल 66 हजार का होता है उपचार
पीजीआई के हेमेटोलॉजी विभाग के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 66 हजार मरीजों को सेवाएं प्रदान की जाती हैं। आईजीएमसी में मल्टीपल मायलोमा के लगभग 50 मरीज उपचार के लिए आते हैं, जिनमें 40 मरीजों को बेहतर उपचार और ट्रांसप्लांट के लिए पीजीआई रेफर करना पड़ता है। इस प्रकार लिम्फोमा के मरीजों को भी विशेष उपचार सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इस बीमारी से ग्रसित प्रतिवर्ष 160 मरीज अस्पताल उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसमें से 40 फीसदी मरीजों को आईजीएमसी से उपचार के लिए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया जाता है। ऐसे में एमओयू हस्ताक्षर के बाद मरीजों के लाखों रुपये भी आसानी से बच जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article