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Shimla News: स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, 358 पद खाली<bha>;</bha> 187 में मुख्य शिक्षक नहीं
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जिले में वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित, शिक्षक निपटा रहे मुख्याध्यापकों के कार्य
अर्थशास्त्र के सबसे ज्यादा 60 पद चल रहे हैं खाली
एक्सक्लूसिव
अनिल पंवार
शिमला। जिले के सरकारी स्कूल में मुख्य अध्यापकों की भारी कमी है। जिले में 187 स्कूल ऐसे हैं, जहां मुख्य शिक्षक नहीं है। इनमें 104 प्रधानाचार्य और 83 मुख्य अध्यापकों के खाली चल रहे हैं। इसके अलावा पीजीटी और डीपीई के भी करीब 358 पद रिक्त हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों की संख्या करीब 400 है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत स्कूलों में मुखिया न होने के कारण प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां अन्य शिक्षकों को संभालनी पड़ रही हैं। इससे इन शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसका सीधा असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में विभिन्न विषयों के प्रवक्ताओं और डीपीई के 2,259 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 1901 पद ही भरे हुए हैं। इस तरह प्रवक्ताओं और डीपीई के 358 पद खाली चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर रिक्त पद ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में हैं। वहीं नई परिसर प्रणाली लागू होने के बाद स्कूल प्रधानाचार्यों का कार्यक्षेत्र और अधिक बढ़ गया है। ऐसे में प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाल रहे शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ बढ़ गया है। इससे शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
कोट
रिटायरमेंट की वजह से प्रधानाचार्यों के पद खाली हुए हैं। वहीं कुछ प्रधानाचार्य सीबीएसई बने स्कूलों में शिफ्ट हो गए हैं। इस वजह से भी ज्यादातर पद खाली हुए हैं। सीबीएसई बने स्कूलों में पहले से तैनात कई प्रधानाचार्य एचपी बोर्ड में शिफ्ट हुए हैं। एचपी बोर्ड में आए कुछ प्रधानाचार्यों को अभी स्टेशन अलॉट नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द ही नियुक्तियां दे दी जाएंगी।
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-लेखराज भारद्वाज, उप शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा, जिला शिमला
किस विषय के कितने पद खाली
जीव विज्ञान के 13, रसायन विज्ञान के 14, वाणिज्य के 37, अर्थशास्त्र के 60, अंग्रेजीके 27, भूगोल के 9, हिंदी के 35, इतिहास के 27, गृह विज्ञान के एक शिक्षक का पद रिक्त है। इसके अलावा गणित के 30, संगीत में 7 पद, भौतिक विज्ञान 11, राजनीति विज्ञान के 42, समाजशास्त्र के 10 और डीपीई के 20 पद रिक्त हैं।
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अर्थशास्त्र के सबसे ज्यादा 60 पद चल रहे हैं खाली
एक्सक्लूसिव
अनिल पंवार
शिमला। जिले के सरकारी स्कूल में मुख्य अध्यापकों की भारी कमी है। जिले में 187 स्कूल ऐसे हैं, जहां मुख्य शिक्षक नहीं है। इनमें 104 प्रधानाचार्य और 83 मुख्य अध्यापकों के खाली चल रहे हैं। इसके अलावा पीजीटी और डीपीई के भी करीब 358 पद रिक्त हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वरिष्ठ माध्यमिक और उच्च विद्यालयों की संख्या करीब 400 है। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत स्कूलों में मुखिया न होने के कारण प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां अन्य शिक्षकों को संभालनी पड़ रही हैं। इससे इन शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसका सीधा असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में विभिन्न विषयों के प्रवक्ताओं और डीपीई के 2,259 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 1901 पद ही भरे हुए हैं। इस तरह प्रवक्ताओं और डीपीई के 358 पद खाली चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर रिक्त पद ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में हैं। वहीं नई परिसर प्रणाली लागू होने के बाद स्कूल प्रधानाचार्यों का कार्यक्षेत्र और अधिक बढ़ गया है। ऐसे में प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाल रहे शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ बढ़ गया है। इससे शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
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कोट
रिटायरमेंट की वजह से प्रधानाचार्यों के पद खाली हुए हैं। वहीं कुछ प्रधानाचार्य सीबीएसई बने स्कूलों में शिफ्ट हो गए हैं। इस वजह से भी ज्यादातर पद खाली हुए हैं। सीबीएसई बने स्कूलों में पहले से तैनात कई प्रधानाचार्य एचपी बोर्ड में शिफ्ट हुए हैं। एचपी बोर्ड में आए कुछ प्रधानाचार्यों को अभी स्टेशन अलॉट नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द ही नियुक्तियां दे दी जाएंगी।
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-लेखराज भारद्वाज, उप शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा, जिला शिमला
किस विषय के कितने पद खाली
जीव विज्ञान के 13, रसायन विज्ञान के 14, वाणिज्य के 37, अर्थशास्त्र के 60, अंग्रेजीके 27, भूगोल के 9, हिंदी के 35, इतिहास के 27, गृह विज्ञान के एक शिक्षक का पद रिक्त है। इसके अलावा गणित के 30, संगीत में 7 पद, भौतिक विज्ञान 11, राजनीति विज्ञान के 42, समाजशास्त्र के 10 और डीपीई के 20 पद रिक्त हैं।