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Shimla News: एचपीयू के 180 आउटसोर्स कर्मियों का कार्यकाल बढ़ा
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उच्च न्यायालय के फैसले तक जारी रहेंगी सेवाएं
कई कर्मचारी 8 से 12 वर्ष से दे रहे हैं सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 183 आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्यकाल अस्थायी रूप से बढ़ाने का निर्णय लिया है।
अब इन कर्मचारियों के भविष्य पर अंतिम फैसला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा। इस फैसले से लंबे समय से असमंजस में चल रहे कर्मचारियों को कुछ समय के लिए राहत मिल रही है हालांकि स्थायी समाधान अभी भी स्पष्ट नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायालय से अंतिम दिशा-निर्देश नहीं मिलते तब तक सभी आउटसोर्स कर्मचारी अपने-अपने विभागों में कार्य करते रहेंगे और उन्हें नियमित रूप से वेतन भी मिलता रहेगा। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक, तकनीकी और शैक्षणिक कामकाज में इन कर्मचारियों की अहम भूमिका है, ऐसे में एक साथ सेवाएं समाप्त होने से कार्य प्रभावित हो सकता था। एचपीयू में करीब 180 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कई वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई 8 से 12 वर्ष से जुड़े हुए हैं लेकिन अनुबंध समाप्त होने के बाद नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर असंतोष भी सामने आया था।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। मामला केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में आउटसोर्स भर्ती और नियमितीकरण को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में इस विषय से जुड़े कई मामले लंबित हैं जिन पर निर्णय आना बाकी है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आगे की कार्रवाई न्यायालय के फैसले और राज्य सरकार की नीति के अनुसार तय होगी।
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कई कर्मचारी 8 से 12 वर्ष से दे रहे हैं सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 183 आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्यकाल अस्थायी रूप से बढ़ाने का निर्णय लिया है।
अब इन कर्मचारियों के भविष्य पर अंतिम फैसला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा। इस फैसले से लंबे समय से असमंजस में चल रहे कर्मचारियों को कुछ समय के लिए राहत मिल रही है हालांकि स्थायी समाधान अभी भी स्पष्ट नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्यायालय से अंतिम दिशा-निर्देश नहीं मिलते तब तक सभी आउटसोर्स कर्मचारी अपने-अपने विभागों में कार्य करते रहेंगे और उन्हें नियमित रूप से वेतन भी मिलता रहेगा। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक, तकनीकी और शैक्षणिक कामकाज में इन कर्मचारियों की अहम भूमिका है, ऐसे में एक साथ सेवाएं समाप्त होने से कार्य प्रभावित हो सकता था। एचपीयू में करीब 180 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कई वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई 8 से 12 वर्ष से जुड़े हुए हैं लेकिन अनुबंध समाप्त होने के बाद नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर असंतोष भी सामने आया था।
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कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। मामला केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में आउटसोर्स भर्ती और नियमितीकरण को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में इस विषय से जुड़े कई मामले लंबित हैं जिन पर निर्णय आना बाकी है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि आगे की कार्रवाई न्यायालय के फैसले और राज्य सरकार की नीति के अनुसार तय होगी।