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Shimla News: विवि में फीस बढ़ोतरी से 30% तक बढ़ेगा विद्यार्थियों का सालाना खर्च
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एचपीयू में कोर्स फीस, बस किराया और परीक्षा शुल्क में बढ़ाने की तैयारी, ईसी की बैठक में हो चुका है फैसला
छात्र संगठन फीस बढ़ाने का कर रहे हैं विरोध
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला की कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिए फीस बढ़ाने के फैसले के बाद छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है। कोर्स फीस, बस किराया और परीक्षा शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी के चलते नए शैक्षणिक सत्र से एक सामान्य छात्र का सालाना खर्च औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।
रोजाना बस से आने-जाने वाले और गैर-अनुदानित कोर्सों में पढ़ने वाले छात्रों पर इसका असर सबसे अधिक रहने की संभावना है।प्रस्ताव के अनुसार विभिन्न कोर्सों की फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। वाणिज्य विषय में लड़कों की फीस 4,230 से बढ़कर 5300 रुपये और लड़कियों की 3030 से बढ़कर 3800 रुपये तक की जा सकती है। विधि विभाग में लड़कों की फीस 4780 से 5975 रुपये और लड़कियों की 3580 से 4475 रुपये तक पहुंचने का प्रस्ताव है। एमए म्यूजिक में लड़कों की फीस 5350 से 6700 और लड़कियों की 3550 से 4450 रुपये तक बढ़ने की संभावना है। विजुअल आर्ट में फीस 5470 से 6850 और 3670 से 4600 रुपये तक प्रस्तावित है।
शिक्षा (एमए) में फीस 10,900 से 13,625 रुपये और एलएलएम में 16,530 से 20,700 रुपये तक जाने का प्रस्ताव रखा है। सबसे अधिक असर गैर-अनुदानित सीटों पर पड़ने का अनुमान है जहां फीस 50,000 से बढ़ाकर 62,500 रुपये तक करने का प्रस्ताव है यानी एक छात्र पर 12,500 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। शोध से जुड़े शुल्कों में भी वृद्धि प्रस्तावित है। शोध जमा करने की फीस 10–15 हजार से बढ़ाकर 15–20 हजार और अतिरिक्त वर्षों के लिए शुल्क 25–75 हजार रुपये तक करने की योजना है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट शुल्क भी 500 से बढ़ाकर 1500 रुपये तक करने का प्रस्ताव है।
परीक्षा शुल्क में भी बढ़ोतरी प्रस्तावित है। अभी जहां यह शुल्क करीब 1200 रुपये है उसे बढ़ाकर 1600 रुपये तक किया जा सकता है। बस किराये में भी व्यापक संशोधन का प्रस्ताव है। बालूगंज से कैंपस का किराया 2 से 5 रुपये, 103 टनल, टुटू, टूटीकंडी, बस स्टैंड, ताराहाल, विक्ट्री टनल, रामनगर और फागली से 4 से 7 रुपये तक बढ़ना प्रस्तावित है। सेंट एडवर्ड्स, कनलोग, लांगवुड, टालैंड और खलीणी से 7 से 12 रुपये तक किया जा सकता है। छोटा शिमला और बीसीएस से 8 से 14 रुपये, संजौली, सेंट बीड्स कॉलेज और विकासनगर से 10 से 15 रुपये, पंथाघाटी से 11 से 17 और मैहली से 12 से 20 रुपये तक किराया बढ़ना प्रस्तावित है। हॉस्टल शुल्क में प्रति छात्र करीब 300 रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव है। इससे सामान्य छात्र को सालाना 2 से 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
कोट
वर्ष 2014 के बाद बढ़ रही फीस : कुलपति
कुलपति प्रो. महावीर सिंह के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से एचपीयू फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ जबकि इस अवधि में विश्वविद्यालय के संचालन, अधोसंरचना और शैक्षणिक गतिविधियों पर खर्च लगातार बढ़ा है। वित्तीय दबाव और सीमित संसाधनों की स्थिति को देखते हुए परिषद ने फीस में बदलाव को अनिवार्य माना है।संसाधन जुटाने के लिए पहले अधिक बढ़ोतरी का सुझाव सामने रखा था लेकिन छात्रों पर असर को देखते हुए इसे घटाकर नाममात्र वृद्धि तक सीमित कर दिया गया।
भविष्य के साथ खिलवाड़ : मुकेश
एसएफआई एचपीयू कैंपस सेक्रेटरी मुकेश कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सामने आए अकादमिक भ्रष्टाचार और फीस बढ़ोतरी के मुद्दे समावेशी शिक्षा की अवधारणा के खिलाफ हैं। समावेशी शिक्षा का अर्थ है कि हर छात्र चाहे वह आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक रूप से किसी भी पृष्ठभूमि से हो उसके लिए समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होनी चाहिए। यह विश्वविद्यालय का फीस वृद्धि का फरमान लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
छात्र विरोधी है फैसला : अक्षय
एबीवीपी के एचपीयू कैंपस अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने बताया कि बढ़ती फीस से गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों की पहुंच शिक्षा से दूर होगी। इस तरह का छात्र विरोधी फरमान शिक्षा में असमानता को बढ़ाएगा है। आवश्यक है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शिता, गुणवत्ता सुधार और फीस नियंत्रण के माध्यम से सभी छात्रों के लिए न्यायपूर्ण तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करें।
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छात्र संगठन फीस बढ़ाने का कर रहे हैं विरोध
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला की कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में लिए फीस बढ़ाने के फैसले के बाद छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है। कोर्स फीस, बस किराया और परीक्षा शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी के चलते नए शैक्षणिक सत्र से एक सामान्य छात्र का सालाना खर्च औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।
रोजाना बस से आने-जाने वाले और गैर-अनुदानित कोर्सों में पढ़ने वाले छात्रों पर इसका असर सबसे अधिक रहने की संभावना है।प्रस्ताव के अनुसार विभिन्न कोर्सों की फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। वाणिज्य विषय में लड़कों की फीस 4,230 से बढ़कर 5300 रुपये और लड़कियों की 3030 से बढ़कर 3800 रुपये तक की जा सकती है। विधि विभाग में लड़कों की फीस 4780 से 5975 रुपये और लड़कियों की 3580 से 4475 रुपये तक पहुंचने का प्रस्ताव है। एमए म्यूजिक में लड़कों की फीस 5350 से 6700 और लड़कियों की 3550 से 4450 रुपये तक बढ़ने की संभावना है। विजुअल आर्ट में फीस 5470 से 6850 और 3670 से 4600 रुपये तक प्रस्तावित है।
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शिक्षा (एमए) में फीस 10,900 से 13,625 रुपये और एलएलएम में 16,530 से 20,700 रुपये तक जाने का प्रस्ताव रखा है। सबसे अधिक असर गैर-अनुदानित सीटों पर पड़ने का अनुमान है जहां फीस 50,000 से बढ़ाकर 62,500 रुपये तक करने का प्रस्ताव है यानी एक छात्र पर 12,500 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। शोध से जुड़े शुल्कों में भी वृद्धि प्रस्तावित है। शोध जमा करने की फीस 10–15 हजार से बढ़ाकर 15–20 हजार और अतिरिक्त वर्षों के लिए शुल्क 25–75 हजार रुपये तक करने की योजना है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट शुल्क भी 500 से बढ़ाकर 1500 रुपये तक करने का प्रस्ताव है।
परीक्षा शुल्क में भी बढ़ोतरी प्रस्तावित है। अभी जहां यह शुल्क करीब 1200 रुपये है उसे बढ़ाकर 1600 रुपये तक किया जा सकता है। बस किराये में भी व्यापक संशोधन का प्रस्ताव है। बालूगंज से कैंपस का किराया 2 से 5 रुपये, 103 टनल, टुटू, टूटीकंडी, बस स्टैंड, ताराहाल, विक्ट्री टनल, रामनगर और फागली से 4 से 7 रुपये तक बढ़ना प्रस्तावित है। सेंट एडवर्ड्स, कनलोग, लांगवुड, टालैंड और खलीणी से 7 से 12 रुपये तक किया जा सकता है। छोटा शिमला और बीसीएस से 8 से 14 रुपये, संजौली, सेंट बीड्स कॉलेज और विकासनगर से 10 से 15 रुपये, पंथाघाटी से 11 से 17 और मैहली से 12 से 20 रुपये तक किराया बढ़ना प्रस्तावित है। हॉस्टल शुल्क में प्रति छात्र करीब 300 रुपये की वृद्धि का प्रस्ताव है। इससे सामान्य छात्र को सालाना 2 से 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
कोट
वर्ष 2014 के बाद बढ़ रही फीस : कुलपति
कुलपति प्रो. महावीर सिंह के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से एचपीयू फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ जबकि इस अवधि में विश्वविद्यालय के संचालन, अधोसंरचना और शैक्षणिक गतिविधियों पर खर्च लगातार बढ़ा है। वित्तीय दबाव और सीमित संसाधनों की स्थिति को देखते हुए परिषद ने फीस में बदलाव को अनिवार्य माना है।संसाधन जुटाने के लिए पहले अधिक बढ़ोतरी का सुझाव सामने रखा था लेकिन छात्रों पर असर को देखते हुए इसे घटाकर नाममात्र वृद्धि तक सीमित कर दिया गया।
भविष्य के साथ खिलवाड़ : मुकेश
एसएफआई एचपीयू कैंपस सेक्रेटरी मुकेश कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सामने आए अकादमिक भ्रष्टाचार और फीस बढ़ोतरी के मुद्दे समावेशी शिक्षा की अवधारणा के खिलाफ हैं। समावेशी शिक्षा का अर्थ है कि हर छात्र चाहे वह आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक रूप से किसी भी पृष्ठभूमि से हो उसके लिए समान, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होनी चाहिए। यह विश्वविद्यालय का फीस वृद्धि का फरमान लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
छात्र विरोधी है फैसला : अक्षय
एबीवीपी के एचपीयू कैंपस अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने बताया कि बढ़ती फीस से गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों की पहुंच शिक्षा से दूर होगी। इस तरह का छात्र विरोधी फरमान शिक्षा में असमानता को बढ़ाएगा है। आवश्यक है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पारदर्शिता, गुणवत्ता सुधार और फीस नियंत्रण के माध्यम से सभी छात्रों के लिए न्यायपूर्ण तथा समावेशी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करें।